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'दो किमी दूर भेजा तो पढ़ाई छोड़ देंगे': सीहोर में स्कूल मर्ज करने के फैसले का विरोध, कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चे

Sat, 15 Aug 2026 03:19 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Sat, 15 Aug 2026 03:19 PM IST
सार

सीहोर में शासकीय प्राथमिक शाला वार्ड क्रमांक 26 को 2 किमी दूर सरदार पटेल स्कूल में मर्ज करने के प्रस्ताव का बच्चों और अभिभावकों ने विरोध किया। आजम लाला के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपकर स्कूल यथावत रखने या नजदीकी विद्यालय में मर्ज करने की मांग की गई।

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Sehore news: Children Protest School Merger in Sehore, Parents Demand Nearby School for 61 Students
हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर पहुंचे बच्चे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

“सर, अगर हमारा स्कूल दो किलोमीटर दूर दूसरे स्कूल में मर्ज कर दिया गया तो हम स्कूल जाना ही छोड़ देंगे।” शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में छोटे-छोटे बच्चों की यह बात हर किसी का ध्यान खींच रही थी। अपने माता-पिता के साथ हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर पहुंचे बच्चों ने शासकीय प्राथमिक शाला वार्ड क्रमांक 26, गोहापुरा कस्बा को दूसरे स्कूल में मर्ज किए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया। बच्चों के चेहरों पर चिंता थी, जबकि अभिभावक सवाल उठा रहे थे कि जब आसपास स्कूल उपलब्ध हैं तो छोटे बच्चों को इतनी दूर क्यों भेजा जाए।
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आजम लाला के नेतृत्व में सौंपा ज्ञापन
युवा समाजसेवी एवं कांग्रेस नेता आजम लाला के नेतृत्व में क्षेत्र के अभिभावकों और नागरिकों ने डिप्टी कलेक्टर तथा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के प्रमुख बाबू को ज्ञापन सौंपा। इसमें शासकीय प्राथमिक शाला वार्ड क्रमांक 26, गोहापुरा कस्बा को यथावत संचालित रखने की मांग की गई। नागरिकों ने कहा कि यदि प्रशासनिक कारणों से स्कूल का विलय जरूरी है तो उसे क्षेत्र के सबसे नजदीकी विद्यालय में किया जाए, ताकि छोटे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
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61 बच्चों की पढ़ाई पर संकट
अभिभावकों के मुताबिक विद्यालय में वार्ड क्रमांक 30, 31, 32 और 33 के करीब 61 बच्चे अध्ययनरत हैं। इन बच्चों के घरों और क्षेत्र के आसपास होने के कारण स्कूल उनके लिए सुविधाजनक है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल दूर होने पर बच्चों की नियमित उपस्थिति प्रभावित हो सकती है और कई बच्चे पढ़ाई से दूर हो सकते हैं।
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पुराना भवन क्षतिग्रस्त होने से बदली जगह
आजम लाला ने बताया कि शासकीय प्राथमिक शाला वार्ड क्रमांक 26 पहले नगर पालिका सीहोर के सामुदायिक भवन, वार्ड क्रमांक 33 में संचालित होती थी। भवन काफी पुराना और क्षतिग्रस्त होने के कारण विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल का संचालन वर्तमान में सुरक्षित स्थान पर किया जा रहा है। अब विद्यालय को शासकीय माध्यमिक शाला सरदार पटेल में मर्ज किए जाने की कार्रवाई प्रस्तावित है।

दो किलोमीटर से अधिक दूरी को लेकर चिंता
अभिभावकों का कहना है कि सरदार पटेल विद्यालय गोहापुरा क्षेत्र से करीब दो किलोमीटर से अधिक दूर है। छोटे बच्चों के लिए प्रतिदिन इतनी दूरी तय करना आसान नहीं है। अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा, आने-जाने की सुविधा और नियमित उपस्थिति को लेकर चिंता जताई है।

नजदीकी स्कूलों में मर्ज करने का सुझाव
नागरिकों ने प्रशासन के सामने विकल्प भी रखा है। उनका कहना है कि यदि विद्यालय को मर्ज करना जरूरी है तो शासकीय माध्यमिक शाला सिपाहीपुरा, भोपाली फाटक अथवा शासकीय माध्यमिक शाला टैगोर में मर्ज किया जा सकता है। इन विद्यालयों को गोहापुरा क्षेत्र के बच्चों के लिए प्रस्तावित सरदार पटेल विद्यालय की तुलना में अधिक नजदीक और सुविधाजनक बताया गया।

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‘स्कूल दूर हुआ तो बच्चों की पढ़ाई छूट सकती है’
अभिभावकों ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को स्कूल तक पहुंचाना है, न कि स्कूल को इतनी दूर कर देना कि वे वहां पहुंच ही न सकें। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि किसी भी निर्णय से पहले बच्चों की उम्र, स्कूल की दूरी, सुरक्षा और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए।


बड़ी संख्या में बच्चे और अभिभावक पहुंचे
कलेक्ट्रेट पहुंचे नागरिकों में मजीद अंसारी, जमशेद पहलवान, अतहर अहमद, आसिफ खान, रवि पांडे, मजीद खान, तौसीफ पटेल, साजिद पठान, अमन लाला, शब्बू पहलवान, आरिफ खान, रुखसाना बी, शबनम खान, सकीना बी, नजमा बी, नाजिश, नसीर उल्ला, जुनैद अंसारी, सोनू खान, मुबारक खान, रोहन राजपूत, आबिद कन्ना, राजा बाबू और उबैद खान सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, परिजन एवं क्षेत्र के नागरिक मौजूद रहे।

प्रशासन के फैसले पर टिकी नजर
बच्चों और अभिभावकों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी परेशानी को समझते हुए विद्यालय को यथावत संचालित रखने पर विचार करेगा। यदि विलय अपरिहार्य है तो बच्चों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नजदीकी विद्यालय का चयन किया जाए। अब क्षेत्रवासियों की नजर प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी है।
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