मध्य प्रदेश: शहडोल में औद्योगिक प्रदूषण का मामला NHRC पहुंचा, कलेक्टर और प्रदूषण बोर्ड को नोटिस
शहडोल में औद्योगिक प्रदूषण से सोन और मुड़ना नदियों के दूषित होने का मामला NHRC पहुंचा है। शिकायत में 1,200 से अधिक बैगा परिवारों के स्वास्थ्य और आजीविका प्रभावित होने का आरोप है। आयोग ने कलेक्टर और प्रदूषण बोर्ड से चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
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शहडोल जिले में औद्योगिक प्रदूषण के कारण सोन और मुड़ना नदियों के दूषित होने तथा इससे प्रभावित बैगा आदिवासी परिवारों के जीवन, स्वास्थ्य और आजीविका का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) पहुंच गया है। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शहडोल कलेक्टर और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह मामला शहडोल निवासी अशोक पटेल की शिकायत के आधार पर सामने आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अल्ट्राटेक सीमेंट संयंत्र से निकलने वाला औद्योगिक अपशिष्ट सोन और मुड़ना नदियों तक पहुंच रहा है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसका असर क्षेत्र में रहने वाले 1,200 से अधिक बैगा आदिवासी परिवारों के स्वास्थ्य, आजीविका और जीवन-यापन पर पड़ रहा है।
जीवन के अधिकार से जोड़ा मामला
शिकायत में नदी प्रदूषण को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जोड़ते हुए कहा गया है कि स्वच्छ जल और स्वस्थ पर्यावरण का अभाव प्रभावित परिवारों के सम्मानजनक जीवन को प्रभावित कर सकता है। शिकायत में कंपनी की कथित CSR गतिविधियों और प्रदूषण से संबंधित रिपोर्टों की निष्पक्ष जांच की मांग भी की गई है।
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चार सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
NHRC के विधि प्रभाग ने केस नंबर 3708/12/41/2025 में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कर उसकी रिपोर्ट आयोग के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कार्रवाई रिपोर्ट और आवश्यक साक्ष्य HRCNet पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत करने को कहा है।
अब प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई पर नजर रहेगी। खास तौर पर यह देखना होगा कि नदियों में प्रदूषण की शिकायत की जांच किस स्तर पर होती है और प्रभावित बैगा परिवारों के स्वास्थ्य एवं आजीविका की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं
