सब्सक्राइब करें

Sindoor Khela: मुजफ्फरपुर में विजयादशमी पर बंगाली परंपरा का अनोखा निर्वहन, क्या है सिंदूर की होली, जानें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sat, 12 Oct 2024 03:00 PM IST
सार

Sindoor Khela: मुजफ्फरपुर में विजयादशमी पर बंगाली परंपरा का अनोखा निर्वहन, क्या है सिंदूर की होली, जानें
Sindoor Khela: Unique performance of Bengali tradition on Vijayadashami in Muzaffarpur, farewell to Maa Durga
 

विज्ञापन
Sindoor Khela: Unique performance of Bengali tradition on Vijayadashami in Muzaffarpur, farewell to Maa Durga
मां दुर्गा को सिंदूर लगातीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

विजयादशमी के अवसर पर मुजफ्फरपुर में बंगाली समाज की महिलाओं ने अपनी अनोखी परंपरा ‘सिंदूर खेला’ के साथ मां दुर्गा को भावपूर्ण विदाई दी। नवरात्रि के अंतिम दिन, दशहरा के मौके पर बंगाली समुदाय की महिलाएं देवी दुर्गा की पूजा के बाद सिंदूर खेला का आयोजन करती हैं। इस दौरान मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने के बाद महिलाएं आपस में सिंदूर की होली खेलती हैं। इसके साथ ही वे पति की लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं।


 

Trending Videos
Sindoor Khela: Unique performance of Bengali tradition on Vijayadashami in Muzaffarpur, farewell to Maa Durga
मां दुर्गा को सिंदूर लगातीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

बंगाली समाज की 122 साल पुरानी परंपरा
मुजफ्फरपुर में हरिसभा चौक स्थित मध्य विद्यालय के प्रांगण में हर वर्ष की तरह इस बार भी बंगाली समाज की महिलाओं ने सिंदूर खेला का आयोजन किया। यह परंपरा 1901 से चली आ रही है, जब से बंगाली समाज ने इस क्षेत्र में दुर्गा पूजा की शुरुआत की थी। आज इस परंपरा को निभाने के लिए महिलाओं ने देवी दुर्गा को मिष्ठान्न का भोग अर्पित किया और फिर एक-दूसरे के माथे पर सिंदूर लगाकर सिंदूर की होली खेली।
 

विज्ञापन
विज्ञापन
Sindoor Khela: Unique performance of Bengali tradition on Vijayadashami in Muzaffarpur, farewell to Maa Durga
मां दुर्गा को सिंदूर लगातीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

पति की लंबी उम्र और ससुराल की विदाई का संदेश
बंगाली परंपरा में सिंदूर खेला का एक विशेष महत्व है। इस अवसर पर सुहागन महिलाएं देवी दुर्गा से अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस रस्म के पीछे मान्यता है कि देवी दुर्गा मायके से विदा होकर ससुराल जाती हैं। इस समय महिलाएं देवी से आशीर्वाद प्राप्त करती हैं, ताकि उनके पति की उम्र लंबी हो और परिवार खुशहाल रहे। इस पूजा का उद्देश्य सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी संजोना है।
 

Sindoor Khela: Unique performance of Bengali tradition on Vijayadashami in Muzaffarpur, farewell to Maa Durga
एक दूसरे को सिंदूर लगातीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

सिंदूर खेला: 400 वर्षों से चली आ रही परंपरा
सिंदूर खेला या सिंदूर की होली की यह परंपरा बंगाली समाज में लगभग 400 वर्षों से चली आ रही है। महिलाओं के लिए यह विशेष अवसर होता है, जब वे एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर देवी दुर्गा से सुख, समृद्धि और परिवार की भलाई के लिए प्रार्थना करती हैं। इसके बाद महिलाएं देवी दुर्गा को पान के पत्ते से उनके गाल को छूकर विदाई देती हैं। फिर अगले वर्ष पुनः आने का निमंत्रण देती हैं। देवी दुर्गा के मुंह मीठा कराने के बाद उन्हें विदाई दी जाती है, जो इस परंपरा का मुख्य हिस्सा होता है।
 

विज्ञापन
Sindoor Khela: Unique performance of Bengali tradition on Vijayadashami in Muzaffarpur, farewell to Maa Durga
एक दूसरे को सिंदूर लगातीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

बंगाली समाज के लिए सांस्कृतिक धरोहर
इस परंपरा को जीवित रखने में बंगाली समाज का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। संध्या आरती और धुनुची नृत्य भी इसी उत्सव का हिस्सा होते हैं, जो विजयादशमी के दिन बंगाली समाज में विशेष महत्व रखते हैं। इस आयोजन में सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल होते हैं और मिलकर मां दुर्गा को विदाई देते हैं।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed