गोपालगंज जिले के सभी 14 प्रखंडों में इस वर्ष होली का पर्व दो अलग-अलग तिथियों में मनाया गया, जिससे लोगों के बीच असमंजस की स्थिति रही। कुछ स्थानों पर 14 मार्च को होली मनाई गई, तो अधिकांश जगहों पर 15 मार्च को रंगोत्सव धूमधाम से खेला गया। दरअसल, होली की तिथि को लेकर धार्मिक गणना में मतभेद के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।
Holi: गोपालगंज-बक्सर में दो तारीखों पर चला रंग, कहीं शास्त्रों की गणना तो कहीं उमंग से सराबोर कुर्ता फाड़ होली
Bihar Holi News: गोपालगंज और बक्सर में दो तारीखों पर होली मनाई जा रही है, शास्त्रों की गणना की वजह से ऐसा हुआ है। हालांकि इस दौरान युवा, बच्चे और अन्य सभी की होली खेलने की मोहक तस्वीरें सामने आई हैं।
जिले के प्रमुख आचार्यों द्वारा पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि होली 15 मार्च को ही मनाई जाएगी, लेकिन फाल्गुन पूर्णिमा की शुरुआत 13 मार्च को सुबह 10:02 बजे से और समाप्ति 14 मार्च को सुबह 11:11 बजे तक होने के कारण होलिका दहन का आयोजन 13 मार्च की रात को ही किया गया।
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पंडित राजेश कुमार उपाध्याय के अनुसार, रंग खेलने का विधान चैत्र कृष्ण प्रतिपदा में होता है, जो इस बार 15 मार्च को दोपहर 12:45 बजे तक उदयातिथि में रही। इसीलिए अधिकांश स्थानों पर 15 मार्च को ही होली का रंग खेला गया। हालांकि कुछ गांवों व मोहल्लों में लोगों ने परंपरानुसार 14 मार्च को ही रंग डालकर पर्व की शुरुआत कर दी थी।
बक्सर में उमंग और उल्लास के साथ मनी 'कुर्ता फाड़ होली'
उधर, बक्सर जिले में होली का उत्साह अपने चरम पर रहा। जिले के सभी 11 प्रखंडों में शनिवार को धूमधाम और उमंग से होली मनाई गई। सुबह से ही बच्चे, युवा और बुजुर्ग रंगों में सराबोर नजर आए। बच्चे रंग-अबीर उड़ाते नजर आए, वहीं युवाओं ने कुर्ता फाड़ कर परंपरागत अंदाज में होली का जश्न मनाया।
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बक्सर की 'कुर्ता फाड़ होली' यहां की एक पुरानी परंपरा है, जिसमें युवक एक-दूसरे का कुर्ता फाड़कर आपसी प्रेम और खुशी का इजहार करते हैं। रंग-गुलाल के साथ कीचड़ में भी लोगों ने एक-दूसरे को धकेलकर त्योहार को पूरे जोश के साथ मनाया। फाग गीतों की गूंज, ढोलक की थाप और होली गीतों पर थिरकते युवा शहर और गांवों को एक सुर में रंगते रहे।