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Dussehra 2022: भारत में इस जगह रावण का पुतला जलाना है पाप, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Wed, 05 Oct 2022 10:35 AM IST
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Dussehra 2022:  kangra baijnath people dont burn ravana on dussehra vijayadashami 2022 know the reason
इस जगह रावण का पुतला जलाना है पाप - फोटो : iStock

Dussehra 2022: शारदीय नवरात्रि का आज यानी तीन अक्तूबर को आठवां दिन है। कल यानी चार अक्तूबर को महानवमी है और इसके बाद पांच अक्तूबर को देशभर में असत्य पर सत्य की जीत का त्योहार दशहरा मनाया जाएगा। भगवान राम ने रावण का इस दिन वध किया था और माता सीता को मुक्त कराया था। इस दिन को पूरे देश में विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। इसके साथ ही जगह-जगह रावण दहन किया जाता है। 



अहंकारी रावण के कई रूप थे जिसकी वजह से उसने महान भी बताया गया था। दशानन एक विद्धान पंडित था जो कई कलाओं में माहिर था। इसके अलावा वह भगवान शिव का परम भक्त था। इसकी वजह से देश में कई ऐसी जगहे हैं जहां पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है जबकि कुछ स्थानों पर लोग उसकी पूजा भी करते हैं। इन जगहों में हिमाचल प्रदेश की एक जगह भी शामिल है, जहां पर दशहरा नहीं मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि इस जगह दशहरा क्यों नहीं मनाया जाता है?

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Dussehra 2022:  kangra baijnath people dont burn ravana on dussehra vijayadashami 2022 know the reason
इस जगह रावण का पुतला जलाना है पाप - फोटो : iStock

हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ में दशहरा नहीं मनया जाता है। मान्यता है कि दशहरा के दिन रावण दहन करने वालों के साथ बुरा होता है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला में बैजनाथ स्थित है। इस जगह एक भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। माना जाता है कि रावण जिस शिवलिंग को लेकर लंका जा रहा था वही शिवलिंग यहां पर स्थापित है। 

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इस जगह रावण का पुतला जलाना है पाप - फोटो : iStock

त्रेता युग में रावण ने शिवजी से अमरता का वरदान पाने के लिए घोर तपस्या की थी। इसके बाद भगवान शिव प्रसन्न होकर रावण को शिवलिंग दिया था जिसे आत्मलिंग बताया जाता है। इस शिवलिंग को देते हुए भगवान शंकर ने रावण से कहा था कि इसको लंका में स्थापित करना, लेकिन इस आत्मलिंग को जहां पर रख दोगे, वहीं स्थापित हो जाएगा। 

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इस जगह रावण का पुतला जलाना है पाप - फोटो : iStock

भगवान शिव ने कहा कि अगर तुम्हें अमर होना है, तो इसको लंका में ले जाकर स्थापित करना। इसके बाद रावण शिवलिंग को लेकर चल दिया, लेकिन देवता चाहते थे कि रावण अमर न हो। लेकिन भगवान विष्णु ने अपनी माया से शिवलिंक को रास्ते में रखवा दिया। दरअसल रावण को लघुशंका लगी और उसने शिवलिंग को एक गड़ेरिए को पकड़ा दिया, लेकिन गड़ेरिए ने शिवलिंग को नीचे रख दिया। इसके बाद रावण ने यहीं पर भगवान शिव की तपस्या से मोक्ष का वरदान प्राप्त किया था। 

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इस जगह रावण का पुतला जलाना है पाप - फोटो : iStock

मान्यता है कि रावण ने इसी स्थान पर अपने दस सिरों की हवन कुंड में डाला था। भगवान शिव का रावण परम भक्त था जिसकी वजह से यहां पर दशहरा नहीं मानाया जाता था। कहा जाता है कि एक बार कुछ लोगों ने शिव मंदिर के सामने दशहरा मनाना शुरू और रावण के पुतले को जलाया गया। ऐसा पांच साल तक चला, लेकिन रावण के रावण का पुतला जलाने वालों के साथ अनहोनी शुरू हो गई। कुछ लोगों की अगले दशहरे तक मौत हो गई। 

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