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गणेश चतुर्थी पर भूल कर भी न करें ये दो काम, वरना गरीबी झेलेंगे...शुभ मुहूर्त और पूजा का समय
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 10 Sep 2018 03:36 PM IST
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गणेश चतुर्थी की तैयारियां अंतिम दौर में
- फोटो : अमर उजाला
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13 सितंबर को गणेश चतुर्थी है, तो ज्योतिषियों के अनुसार इस दिन भक्तों को दो काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए, वरना दरिद्रता झेलनी पड़ सकती हैं। जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा का समय...
Ganesh Chaturthi
भाद्र पद शुक्ल चतुर्थी तिथि को गणेशोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश जी का जन्म हुआ था। पंचदेवताओं में गणेश जी का प्रथम स्थान है। भगवान गणेश की पूजा दोपहर में की जाती है। यह बात सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताई। चतुर्थी तिथि को स्वाती नक्षत के साथ रवि योग है। इसके कारण मारूत नामक योग भी बन रहा है।
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मारूत योग 12 सितंबर रात दो बजकर 4 मिनट से प्रारंभ होकर 13 सितंबर को रात एक बजकर सात मिनट तक चलेगा। इसलिए इस वर्ष भगवान गणेश जी जन्मोत्सव मारूत योग में होने के कारण विद्या बुद्धि, सुख शांति और समृद्धि बनी रहेगी। चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 12 सितंबर को दिन बुधवार को शाम चार बजकर सात मिनट पर हो रहा है। यह 13 सितंबर दिन वीरवार को दोपहर बाद 2 बजकर 52 मिनट पर समाप्त हो रहा है।
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बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि भगवान गणेश का जन्म दोपहर में हुआ है, इसलिए इनकी पूजा दोपहर को ही होगी। उन्होंने बताया कि पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:27 से दोपहर बाद 12:27 बजे तक सबसे बेहतर है। उसके बाद भी पूजा की जा सकती है। इसके बाद डेढ़ बजे तक का समय मध्यम है। दो बजकर 52 मिनट पर चतुर्थी की समाप्ति के कारण पूजा नहीं हो सकती।
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देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्रीराधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डा लाल बहादुर दुबे का कहना है कि इस मुहूर्त में पूजा करने का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि गणेश की पूजा से बुद्धि, विद्या और ऋद्धि सिद्धि की प्राप्ति होती है। सभी विघ्नों का नाश होता है। गणेश जी को द्रूर्वा बहुत ही प्रिय है। उनके अनुसार दूर्वा से गणेशजी का अभिषेक किया जाए तो सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।