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Joshimath: चीन के साथ पींगे तुम बढ़ाओ...और एजेंट हम कहलाएं...भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर पलटवार, उठे ये सवाल

Wed, 01 Feb 2023 01:37 PM IST
रेनू सकलानी विनय बहुगुणा, संवाद न्यूज एजेंसी, जोशीमठ (चमोली)
विनय बहुगुणा, संवाद न्यूज एजेंसी, जोशीमठ (चमोली) Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 01 Feb 2023 01:37 PM IST
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Joshimath future Concerned Atul Sati convenor of Joshimath Bachao Sangharsh Samiti raised questions
अतुल सती - फोटो : अमर उजाला

चीन सीमा से लगा देश का सीमांत नगर जोशीमठ भू-धंसाव की जद में है। सरकार ने यहां अधिकारियों का लावा-लश्कर तैनात किया हुुआ है। प्रभावित 900 से अधिक लोग राहत शिविरों में दिन काट रहे हें। लेकिन, अभी तक कागजी पैमाना ही तय नहीं हो पाया है कि जोशीमठ का भविष्य क्या होगा।



जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती का दो टूक कहना है कि नगर को इस हाल में पहुंचाने के लिए सरकारें ही सबसे बड़ी जिम्मेदार हैं। आपदा प्रभावित जोशीमठ को लेकर उनसे हमने विस्तृत बातचीत की गई। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश...

प्रश्नः आप पर आरोप लग रहे हैं, आप जोशीमठ के मुद्दे पर लोगों को भड़का रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी कहा वामपंथी लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
उत्तरः चीन के साथ पींगे तुम बढ़ाओ, व्यापार तुम बढ़ाओ, चीन को बड़े बड़े ठेके देकर पुल तुम बनवाओ और एजेंट हम कहलाएं, ये कहां का इंसाफ है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष का बयान सरकार के नकारेपर का उदाहरण है। पिछले दिनों वह (महेंद्र भट्ट) जोशीमठ के मुद्दे पर हमें मुख्यमंत्री से मिलवाने ले गए थे, उन्हें स्पष्ट करना चाहिए, उस दिन हम देशी थे या चीनी एजेंट। जोशीमठ की प्रभावित जनता बेहद दर्द में है और सरकार और भाजपा संगठन के लोग ऊलजलूल बयानबाजी कर रहे हैं।
 

Joshimath future Concerned Atul Sati convenor of Joshimath Bachao Sangharsh Samiti raised questions
घरों में पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला

प्रश्नः सरकार ने पुनर्वास और विस्थापन के लिए तीन विकल्प रखे हैं, आप इनसे कितना सहमत हैं?
उत्तरः जोशीमठ आपदा के इतने दिनों बाद सरकार का कोई प्लान बाहर आया, वह भी आधा-अधूरा। सरकार कह रही है भवनों का मुआवजा सीपीडब्ल्यूडी के मानकों के हिसाब से देगी, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में यह मानक अलग होने चाहिए। इसके लिए हमने मांग की थी कि यहां राष्ट्रीय विस्थापन एवं पुनर्वास नीति 2007 को लागू किया जाए। इस नीति के अनुसार जोशीमठ में विस्थापन पुनर्वास को व्यवहार में लाया जा सकता है। इसमें जोशीमठ की विशेष भौगोलिक एवं व्यावसायिक स्थितियों के मद्देनजर कुछ बदलाव किए जा सकते हैं या जोड़े जा सकते हैं। इस पर सभी पक्ष सहमत हो सकते हैं। इसका जिक्र हमने जिलाधिकारी से वार्ता के दौरान भी किया है।
 

Joshimath future Concerned Atul Sati convenor of Joshimath Bachao Sangharsh Samiti raised questions
जोशीमठ भू-धंसाव: महिलाओं में आक्रोश - फोटो : अमर उजाला
प्रश्नः इन हालातों में त्वरित इंतजाम क्या होने चाहिए?
उत्तरः राज्य आंदोलन के दौरान एक परिकल्पना की गई थी कि हमारे पहाड़ों का विकास कैसा होगा? तब, जोशीमठ में सेब, आलू, राजमा उत्पादन के साथ चाय के बगीचों के बारे में सोचा गया था। लेकिन सरकार की बड़ी पूंजी, बड़ा निर्माण और बड़े मुनाफे ने जोशीमठ को हाशिए पर ला दिया है। प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर रखते हुए सबसे पहले प्रभावित भूमि को स्थिर करना होगा।
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Joshimath future Concerned Atul Sati convenor of Joshimath Bachao Sangharsh Samiti raised questions
जोशीमठ - फोटो : अमर उजाला

प्रश्नः जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति किस तरह का पुनर्वास चाहती है?
उत्तरः सामारिक, सामाजिक, ऐतिहासिक व धार्मिक रूप से जोशीमठ का महत्व अंतरराष्ट्रीय स्तर से जुड़ा है। इस नगर के प्रति गंभीर होकर सोचने और कार्य करने की जरूरत है। यहां से चीन सीमा बहुत दूर नहीं है। ऐसे में यहां जनमानस की अस्थिरता नहीं होनी चाहिए। अन्यत्र विस्थापन के बजाय आसपास के क्षेत्रों पुनर्वास होना चाहिए।

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Joshimath future Concerned Atul Sati convenor of Joshimath Bachao Sangharsh Samiti raised questions
जोशीमठ - फोटो : अमर उजाला

प्रश्नः जोशीमठ बहुत पहले से धंस रहा है, तब लोगों ने आवाज क्यों नहीं उठाई?
उत्तरः यह बात सही है, जोशीमठ में भू-धंसाव की समस्या पुरानी है। हम कुछ लोग लगातार आवाज उठा रहे थे, लेकिन लोगों को हमारी बात तब समझ में आई, जब 17 नवंबर 2021 को जोशीमठ में दरारें आने का सिलसिला शुरू हो गया। तब से शासन-प्रशासन को अवगत कराते आ रहे हैं। अगर, सरकार समय रहते चेत जाती तो ऐसे हालात नहीं होते।

ये भी पढ़ें...Joshimath: वन टाइम सेटलमेंट के लिए राजी नहीं लोग, सरकार के सुझाए तीन विकल्पों पर प्रभावितों ने दी प्रतिक्रिया

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