रविवार को अष्टमी के दिन कन्याओं का पूजन किया जाएगा। अष्टमी को महागौरी का रूप माना जाता है। इसलिए इस दिन विधि-विधान से कन्याओं का पूजन किया जाना शुभ होता है। इसके लिए महिलाओं ने खास तैयारियां भी की है।
अष्टमी पूजा 2019: इन दो शुभ मुहूर्त में करें कन्या पूजन, इन बातों का जरूर रखें ध्यान
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पूजा पाठ में किसी तरह की कोताई न हो इसका भी विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है। दुर्गा अष्टमी का शुभ मुहूर्त रविवार को सुबह 9:15 बजे से दोपहर 12:09 बजे तक तक रहेगा। इसके बाद दूसरा शुभ मुहूर्त शाम 05:58 बजे से रात 09:04 बजे तक रहेगा।
कितनी हो कन्याओं की उम्र
कन्याओं की आयु 2 वर्ष से ऊपर तथा 10 वर्ष तक होनी चाहिए। इनकी संख्या कम से कम सात या नौ होनी ही चाहिए। कन्याएं कम हों तो दो कन्याओं को भी भोजन कराया जा सकता है। इनके साथ एक बालक को बैठाने का भी प्रावधान है। इस बालक को भैरो बाबा के रूप में कन्याओं के बीच बैठाया जाता है।
कन्या पूजन की विधि
- गृह प्रवेश पर कन्याओं का पूरे परिवार के साथ पुष्प वर्षा से स्वागत करें और नव दुर्गा के सभी नौ नामों के जयकारे लगाएं।
- अब इन कन्याओं को आरामदायक और स्वच्छ जगह बैठाएं।
- सभी के पैरों को दूध से भरे थाल या थाली में रखकर अपने हाथों से उनके पैर स्वच्छ पानी से धोएं।
- उसके बाद कन्याओं के माथे पर अक्षत, फूल या कुमकुम लगाएं।
- फिर मां भगवती का ध्यान करके इन देवी रूपी कन्याओं को इच्छा अनुसार भोजन कराएं।
- भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थय के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें।
नवरात्रि केवल व्रत और उपवास का पर्व नहीं है। यह नारी शक्ति और कन्याओं के सम्मान का भी पर्व है। नवरात्रि के नौ व्रत पूरे हो जानेे के बाद कन्या पूजन और कन्या को भोजन कराने की परंपरा भी है। हालांकि नवरात्रि में हर दिन कन्याओं के पूजा की परंपरा है, लेकिन अष्टमी और नवमी को पूजा जरूर की जाती है