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एक दिन पहले ही इंदिरा गांधी को हो गया था मौत का अंदेशा, आखिरी भाषण में कही थी ये बात

Thu, 02 Nov 2017 02:55 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 02 Nov 2017 02:55 PM IST
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indira gandhi was might aware of her death one day earlier, her last speech shows that
indira gandhi assassination

भारत की आयरन लेडी और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा की आज (31 अक्टूबर) पुण्यतिथि है। इंदिरा को 31 अक्टूबर की सुबह उनके ही संतरियों ने एक के बाद एक 30 गोलियां मारी थीं। हालांकि माना जाता है कि इंदिरा को अपनी मौत का अंदाजा हो गया था जिसका जिक्र उन्होंने अपनी मौत से एक दिन पहले भुवनेश्वर में किया था।

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30 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में हुई एक चुनावी जनसभा में लीक से हटकर भाषण दिया था। इस भाषण को उनके सूचना सलाहकार एचवाई शारदा ने लिखा था। उस दिन अचानक ‌इंदिरा लिखा भाषण बीच में छोड़कर खुद से ही बोलने लगीं।

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पीएन हक्सर के साथ इंदिरा गांधी

उस दिन उन्होंने कहा था, 'मैं आज यहां हूं। कल शायद यहां न रहूं। मुझे चिंता नहीं मैं रहूं या न रहूं। मेरा लंबा जीवन रहा है और मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने अपना पूरा जीवन अपने लोगों की सेवा में बिताया है। मैं अपनी आखिरी सांस तक ऐसा करती रहूंगी और जब मैं मरूंगी तो मेरे ख़ून का एक-एक क़तरा भारत को मजबूत करने में लगेगा।'

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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी

उनकी इन बातों से वहां मौजूद सभी हैरान रह गए थे। यही नहीं उनकी पार्टी के नेता तक ये समझ नहीं पाए कि इंदिरा गांधी ने ऐसी बातें क्यों कहीं। आगे पढ़िए क्या हुआ 31 अक्टूबर 1984 की सुबह, कैसे की गई थी इंदिरा गांधी की हत्या...

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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी

30 अक्टूबर को तत्कालीन उड़ीसा में चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने के बाद इंदिरा गांधी उसी शाम दिल्ली पहुंच गई थीं। अगले दिन 31 अक्टूबर को वह सुबह करीब 9 बजे इंदिरा गांधी तेजी में 1 अकबर रोड की ओर बढ़ीं।

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