अभिनेत्री भाग्यश्री के बेटे अभिमन्यु दसानी की फिल्म 'निकम्मा' आने वाले शुक्रवार को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म को लेकर अभिमन्यु दसानी काफी उत्साहित हैं। यह उनकी तीसरी फिल्म है। इससे पहले वह वासन बाला के निर्देशन में बनी फिल्म 'मर्द को दर्द नहीं होता' और धर्मा प्रोडक्शन की नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म 'मीनाक्षी सुंदरेश्वर' में नजर आ चुके हैं। हिंदी सिनेमा में कदम रखने से पहले अभिमन्यु की यात्रा काफी रोचक रही है। फिल्मों में काम करने के बारे में उनका ख्याल भी नहीं था। फिर मशहूर लेखक सलीम खान से एक मुलाकात ने कैसे उन्हें एक्टर बनने की प्रेरणा दी और सलमान खान के सुझाव पर कैसे उन्होंने फिल्म 'निकम्मा' साइन की, आइए जानते हैं उनसे इस खास मुलाकात में।
Interview Abhimanyu Dassani: सलमान खान को सबके बारे में सब पता होता है, बहुत याद आती हैं कल्पना मैम: अभिमन्यु
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सलीम खान से आप की मुलाकात कब हुई और उन्हें ऐसा क्यों लगा कि आप को एक्टिंग में करियर बनाना चाहिए ?
बात उन दिनों की है जब मैं रोहन सिप्पी के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम कर रहा था। 'दम मारो दम' और 'नौटंकी साला' में जब मैं सहायक निर्देशक था, तो इसी दौरान मैंने 'शोले' पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म 'शोले -द इफेक्ट ऑफ रमेश सिप्पी' बनाई जो अभी रिलीज नहीं हुई है। इस डाक्यूमेंट्री को बनाने के दौरान सिनेमा के कई दिग्गजों से मिलने का मौका मिला। उन लोगों से मिलकर बहुत कुछ सीखने को मिला। इसी दौरान सलीम खान साहब से मिला तो उन्होंने कहा कि तुम कैमरे के पीछे क्यों रहना चाहते हो? मैंने कहा कि अभी तक मैंने डिसाइड नहीं किया है कि मुझे क्या करना लेकिन इस इंडस्ट्री में रहना चाहता हूं। तो उन्होंने कहा कि मुझे दो चीज आती है, एक लिखना और दूसरा प्रतिभा को परखना, ‘तू कैमरे के पीछे नहीं, कैमरे के सामने चमकेगा।’
जब आप की पहली फिल्म 'मर्द को दर्द नहीं होता है' रिलीज हुई और आप दोबारा सलीम खान से मिले होंगे तो उनकी तब क्या प्रतिक्रिया थी ?
जब मेरी फिल्म 'मर्द को दर्द नहीं होता है' रिलीज हुई तो मैं खुद सलीम खान साहब से मिलने के लिए काफी उत्साहित था। क्योंकि उनकी ही प्रेरणा से मैंने एक्टिंग को गंभीरता से लिया था। मुझे याद है कि पहली बार मैं सलीम खान साहब से 2013 में मिला था। उसके कई साल के बाद जब मेरी पहली फिल्म रिलीज हुई तो उनसे जाकर मिला तो उनको याद दिलाया कि आपने मुझसे यह कहा था कि तुम कैमरे के आगे चमकोगे। उन्हें वह बात अच्छी तरह से याद थी। उन्होंने फिल्म तो नहीं देखी नहीं थी लेकिन मुझे खूब सारा आशीर्वाद दिया।
और कौन कौन से लोग आपके प्रेरणास्त्रोत रहे हैं ?
जब मैं जमनाबाई नरसी स्कूल में सातवीं में पढ़ रहा था तो मेरी टीचर मिस कल्पना श्रीमाली ने एक बार कहा कि तुम ड्रामा में कोशिश करो। पता नहीं उस समय उनको मेरे अंदर ऐसा क्या नजर आया? मुझे उस समय एक्टिंग के बारे में कुछ पता नहीं था। लेकिन अपने टीचर के कहने पर मैं ड्रामा टीम में आ गया। पता नहीं ये सब कैसे हुआ लेकिन जहां तक मैं समझता हूं मेरे अंदर के एक्टर का जन्म तभी हुआ और इसका श्रेय मैं अपनी टीचर मिस कल्पना श्रीमाली को देना चाहता हूं। जब मेरी फिल्मों में शुरुआत हो गई और मुझे पता चला कि कल्पना मैम बहुत बीमार हैं तो मैं उनसे मिलने गया था। जब मेरी फिल्म रिलीज हुई तो उन्हें दिखा नहीं पाया इस बात का बहुत मुझे अफसोस है। वह मुझे आज भी बहुत याद आती हैं।
भाग्यश्री का बेटा होने का बॉलीवुड में कितना फायदा मिला ?
मैंने कभी भी अपने मां बाप के नाम का सहारा लेकर किसी से काम नहीं मांगा। बचपन से ही मैं आत्मनिर्भर हूं। जब मैं दसवीं में पढ़ रहा था तभी मैंने अपनी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी की शुरुआत कर दी थी। मुझे नए नए काम करने और सीखने में बड़ी दिलचस्पी रहती थी। मैंने एक्पोर्ट इम्पोर्ट का भी बिजनेस किया। टफ फुटबॉल के नाम से एक क्लब भी खोला, जिन स्कूल में बच्चों के खेलने के लिए ग्राउंड नहीं थे उनको खेलने के लिए अपने क्लब का ग्राउंड दे देता था। मैंने मार्शल आर्ट सेंटर भी खोला और इसकी फीस कम रखी ताकि अधिक से अधिक लोग मार्शल आर्ट सीख सके। मेरी पहली फिल्म रिलीज से पहले किसी को नहीं पता था कि मैं भाग्यश्री का बेटा हूं। मेरी फिल्म टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में शामिल हुई थी जहां मेरी फिल्म को बेस्ट फिल्म का अवार्ड मिला। इसके आलावा भी हमारी फिल्म 12-12 और इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में शामिल हुई। मकाउ और चीन में तो मुझे बेस्ट डेब्यू का अवॉर्ड भी मिला। लेकिन, इस बारे में न कोई पूछता है और ना ही कोई लिखता है। सीधा लोग यही पूछते है कि किस बैकग्राउंड से आते हो?