50-60 के दशक के दिग्गज अभिनेताओं में से एक देव आनंद का बोलने का अंदाज सबसे निराला था। उस समय देव साहब इंडस्ट्री के सबसे हैंडसम अभिनेताओं में थे जिनके लिए अभिनेत्रियां भी उनकी दीवानी थीं। देव साहब को चाहने वाली अदाकाराओं की लिस्ट काफी लंबी है। वहीं, अदाकारा जाहिदा हुसैन भी देव साहब को पसंद करती थीं।
देव आनंद की दीवानी थी यह दिग्गज अदाकारा, रिश्ते में संजय दत्त की लगती हैं बहन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जाहिदा के पिता अख्तर हुसैन नरगिस के भाई थे। इस तरह देखा जाए तो वो संजय दत्त की कजिन बहन लगती हैं। नरगिस की मां जद्दनबाई ने तीन शादियां की थीं। जद्दनबाई ने पहली शादी नरोत्तम दास खत्री से की थी जिन्होंने इस्लाम धर्म कबूल कर अपना नाम बच्ची बाबू रखा था।
उनके बेटे अख्तर हुसैन थे। इन्हीं अख्तर हुसैन की बेटी जाहिदा हुईं और जद्दनबाई की दूसरी शादी उस्ताद राशिद मीर खान से हुई। वहीं, उन्होंने तीसरी शादी मोहन बाबू से की। मोहन बाबू ने भी इस्लाम धर्म कबूल कर लिया था। जद्दनबाई की तीसरी शादी से बेटी नरगिस थीं। जाहिदा हुसैन की पहली मुख्य फिल्म साल 1968 में आई 'अनोखी रात' थी। इसके बाद जाहिदा ने साल 1970 में रिलीज हुई 'प्रेम पुजारी' की।
देव आनंद के साथ आईं जाहिदा की ये फिल्म सुपरहिट रही। इसके बाद साल 1971 में जाहिदा की एक और फिल्म 'गैम्बलर' रिलीज हुई। इसमें भी देव आनंद मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में उन पर फिल्माया गया गाना 'चूड़ी नहीं है ये मेरा दिल है' काफी मशहूर हुआ था। खबरों की मानें तो साल 1972 में देव आनंद ने फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' के लिए जाहिदा को उनकी बहन का रोल ऑफर किया था लेकिन जाहिदा ने ये रोल करने से मना कर दिया। वो पर्दे पर देव आनंद की बहन का किरदार नहीं करना चाहती थीं। बाद में ये रोल अभिनेत्री जीनत अमान ने निभाया। फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया था।
लेकिन वह अपने करियर में तीन फिल्में करने के बाद फिल्मी दुनिया से दूर हो गईं। उन्होंने बिजनेसमैन केसरी नंदन सहाय से शादी कर ली और फिल्मों को अलविदा कह दिया। जाहिदा के दो बेटे हुए जिनमें से एक बेटे निलेश सहाय हैं जो बड़े पर्दे पर दिख चुके हैं। निलेश ने साल 2011 में रिलीज हुई गणेश आचार्य की फिल्म 'एंजेल' से डेब्यू किया था।