संजना संघी आठवीं में पढ़ रही थी जब उन्हें इम्तियाज अली की फिल्म 'रॉकस्टार' में काम करने का मौका मिला, कॉलेज पहुंची तो 'फुकरे रिटर्न्स' और 'हिंदी मीडियम' में सपोर्टिंग रोल में दिखीं। और, कॉलेज पूरा करने के बाद 2020 में फिल्म 'दिल बेचारा' से बतौर हीरोइन उनका सफर शुरु हुआ। ये सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म थी। अब संजना की नई फिल्म 'ओम- द बैटल विदिन' रिलीज होने वाली है, जिसमें वह आदित्य रॉय कपूर के साथ एक्शन अवतार में नजर आने वाली हैं। लेकिन संजना खुद कहती हैं कि वह फिल्मों में अपने करियर को लेकर कभी सीरियस नहीं रहीं।
Sanjana Sanghi Interview: संजना ने चांदनी चौक के मोती सिनेमा में यूं सीखा सिनेमा, ‘दिल बेचारा’ ने दिलाई ‘ओम’
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पत्रकारिता में बनाया करियर
संजना बताती हैं कि उन्हें बचपन से पढ़ाई का बहुत शौक रहा। हर नई चीज को सीखने की जिज्ञासा थी, जो भी काम मिला कर लिया। पिता मार्शल आर्ट्स चैंपियन थे तो वह भी सीख लिया। ग्यारह डांस और कथक सीख लिया, थिएटर से जुडी रही और जर्नलिज्म में ऑनर्स करने के बाद बीबीसी और हिंदुस्तान टाइम्स में पत्रकारिता का काम भी किया। लेकिन इतना सब करने के बाद भी संजना को पता ही नहीं था कि उन्हें किस क्षेत्र में करियर बनाना है। बस जो सामने मिला और समझ में आया वह करती रहीं।
करियर को लेकर कन्फ्यूजन
संजना संघी दिल्ली की एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। बड़े भाई गूगल में नौकरी करते हैं और दादा साउथ दिल्ली में डॉक्टर हैं। नाना का चांदनी चौक में मोती सिनेमा के नाम से थियेटर है और माता पिता कारोबारी हैं। संजना कहती हैं, ‘नाना जी हर शनिवार को मुझे फिल्में दिखाने ले जाते थे, उन दिनों मैने राज कपूर और नरगिस की फिल्में खूब देखी। थोड़ा होश संभाला तो ‘कयामत से कयामत तक’, ‘रंग दे बसंती’, ‘दिल चाहता है’ जैसी फिल्में खूब देखती थी। 'दिल चाहता है' देखकर मैं बहुत प्रभावित हुई। 'सोल्जर' जब रिलीज हुई तो हमेशा उसके गाने गुनगुनाती थी। कहीं न कहीं मेरे अंदर एक कलाकार जन्म ले चुका था लेकिन समझ में नहीं आ रहा था कि आगे क्या करना है?’
'दिल बेचारा' के लिए दस ऑडिशन
संजना संघी बताती हैं, ‘जब मैं आठवीं क्लास में थी तो स्कूल के वार्षिक कार्यक्रम में मैंने भाग लिया था। वहां मुझे कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने देखा और मेरी क्लिपिंग इम्तियाज खान को भेजी और मुझे ' रॉकस्टार' में काम करने का मौका मिला। इत्तेफाक देखिये जब मुकेश छाबरा जब निर्देशक के रूप में करियर की शुरुआत कर रहे थे तो उन्होंने मुझे 'दिल बेचारा' में सुशांत सिंह राजपूत के साथ कास्ट किया लेकिन इस में काम करना मेरे लिए इतना आसान नहीं था। इस फिल्म के लिए मैंने छह महीनों में दस ऑडिशन दिए थे तब जाकर मुझे यह फिल्म मिली थी।’
‘दिल बेचारा’ से मिली 'ओम- द बैटल विदिन'
'ओम- द बैटल विदिन' बनाने वाले अहमद खान ने फिल्म 'दिल बेचारा' देखकर ही संजना को अपनी फिल्म में लिया। संजना के मुताबिक, ‘शायद उन्हें 'दिल बेचारा' में देखकर लगा होगा कि मैं काव्या शर्मा का किरदार निभा सकती हूं। जब लोग आपके बारे में इतना विश्वास कर लेते हैं तो आपको खूब मेहनत करके काम करना ही पड़ता है। इस फिल्म में मेरे बहुत सारे एक्शन सीन है, जिसके लिए मैंने तीन महीने एक्शन की ट्रेनिंग ली। एक बात मेरी समझ में आ गई की जीवन में आप जो भी सीखते हैं, वो कहीं न कहीं काम जरूर आता है।’