अमेरिका में अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद दुनियाभर में रंगभेद का मुद्दा छाया हुआ है। इस बीच भारत में भी गोरे और सांवले रंग को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है। हाल ही में लंबी लड़ाई के बाद कथित तौर पर गोरा बनाने वाली क्रीम फेयर एंड लवली को भी अपने नाम में बदलाव करना पड़ा। लेकिन रंगभेद की जड़ें समाज में इतने अंदर तक फैली हुई हैं कि ये किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को मापने का पहला पैमाना बन गई हैं। इस बीच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल करने वालीं अभिनेत्री उषा जाधव ने बताया कि उनको भी सिर्फ सांवला होने की वजह से कई फिल्मों से निकाल दिया गया था।
रंगभेद के चलते रिजेक्शन झेला, नेशनल अवॉर्ड विजेता अभिनेत्री उषा जाधव बोलीं- 'धारावाहिकों में गोरे को बनाते हैं सांवला'
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हाल ही में उषा जाधव ने अमर उजाला से खास बातचीत करते हुए बताया कि समाज की तरह फिल्म इंडस्ट्री में भी रंगभेद का बोलबाला है। यहां निर्देशक और निर्माता गोरे रंग वालों को प्राथमिकता देते हैं। उषा ने कहा, 'सिनेमा हमारे समाज का एक हिस्सा है और इसमें भी लोगों को रंगभेद का सामना करना पड़ता है। यहां हर तबके और विचारधारा के लोग आते हैं। ऐसा कई सालों से चलता चला आ रहा है।'
रंगभेद को लेकर लोगों की सोच में बदलाव पर उषा ने कहा, 'समाज की जो विचारधारा है कि तुम्हें खूबसूरत दिखने के लिए गोरा होना चाहिए। या फिर तुम्हें काम चाहिए, समाज में एक सम्मान चाहिए, शादी के लिए अच्छा वर या वधू चाहिए तो गोरा होना चाहिए, इस तरह की विचारधारा को बदलना पड़ेगा।'
सांवले होने की वजह से फिल्म इंडस्ट्री में रिजेक्ट होने के सवाल पर उषा जाधव ने कहा, 'शुरुआत में मुझसे निर्माता-निर्देशक कहते थे कि नहीं हमें सिर्फ गोरे और खूबसूरत लोग ही चाहिए। इस वजह से मुझे बहुत बार रिजेक्ट किया गया। अगर किसी के घर में एक सांवली लड़की पैदा हो तो जन्म से ही घरवाले परेशान हो जाते हैं। उसे बचपन से ही गोरा बनाने के नुस्खे अपनाए जाते हैं। फिल्मों से रिजेक्ट होने के बाद भी मैं कभी नहीं टूटी।'
उषा ने बताया, 'रंगभेद होने के वजह से सांवले लोगों का फिल्म इंडस्ट्री में आत्मविश्वस कमजोर हो जाता है। बाजार में बिकने वाली फेयरनेस क्रीम सांवले लोगों की मजबूती को तोड़ देती हैं। हमें पहले खुद को स्वीकार करना चाहिए। कई बार धारावाहिकों में गोरो लोगों को कास्ट कर उन्हें सांवला कर दिया जाता है। मैं जानना चाहती हूं कि क्या आपको सांवले लोग नहीं मिलते।'
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