रेल महकमे ने ट्रेन में चलने के लिए अभी कोरोना प्रोटोकॉल लागू कर रखा है। इसके तहत आरक्षित कोच में सिर्फ कंफर्म टिकट वाले ही सफर करेंगे। लेकिन, इसका उल्टा होने लगा। राजस्व बढ़ाने की खातिर जिम्मेदारों ने खामोशी से नियम को तोड़ दिए हैं। चेकिंग स्टॉफ जुर्माना व किराया लेकर एक्सेसस फेयर टिकट (ईएफटी) बनाकर यात्रा की अनुमति दे रहे हैं। जबकि, जुर्माने की चोट के साथ सांसत मुसाफिर झेलने को मजबूर हैं।
अमर उजाला लाइव: खामोशी से तोड़ दिया नियम, जुर्माना की चोट व सांसत झेल रहे मुसाफिर
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ट्रेनों में इन दिनों में जबरदस्त भीड़ है। स्लीपर और एसी थ्री कोच में वेटिंग टिकट वाले यात्री भी सफर कर रहे हैं। इन्हें रोकने की बजाय रेलवे के जिम्मेदार ही यात्रा की अनुमति दे रहे हैं। चेकिंग स्टॉफ में शामिल टीटीई को ईएफटी बनाने का लक्ष्य दे दिया गया है। यानी कि अगर यात्री बेटिकट है तो भी ईएफटी बनवाकर सफर कर लेगा। यात्रा को इसके बदले में किराया और 200 रुपये जुर्माना भरना होगा।
कंफर्म टिकट वाले यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
वेटिंग टिकट वाले यात्रियों के सफर करने से कंफर्म टिकट वालों की मुश्किलें बढ़ गई है। गर्मी जबरदस्त है। स्लीपर कोच में इस कदर भीड़ हो रही है कि यात्रियों को अपनी सीट से चलकर शौचालय तक जाने में काफी दिक्कतें हो रही है। बच्चे बिलबिला रहे हैं।
गोरखपुर जंक्शन से कुशीनगर एक्सप्रेस में चढ़े संतोष ने बताया कि उन्होंने वेटिंग टिकट लिया था, कंफर्म नहीं हो पाया। अब जाना है तो बैठ गए। किसी ने रोका नहीं। सीट मिली नहीं है, फर्श पर बैठकर यात्रा कर लेंगे। वहीं, कुशीनगर एक्सप्रेस के एसी थ्री कोच में बैठे संपूर्णानंद शुक्ला रेलवे की व्यवस्था से नाराज थे। उन्होंने कहा कि वेटिंग टिकट वालों के आ जाने से जिनकी बर्थ कंफर्म है, उन्हें दिक्कतें उठानी पड़ रही है।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि कोरोना संबंधी प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए रेलवे स्टेशनों पर उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से यात्रियों को जागरूक किया जाता है। ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ी है, जिसे ध्यान में रखते हुए रेलवे द्वारा विशेष गाड़ियों का संचालन किया जा रहा है। जिन ट्रेनों में संभव है, उनमें अतिरिक्त कोच भी लगाए जा रहे हैं।