उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे देवरिया जनपद के भी रणबांकुरों ने देश की आजादी के लिए हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में अहम भूमिका निभाई है। बिहार सीमा से सटे मझौलीराज में तो 1857 की क्रांति को असफल करने के लिए अंग्रेजों को अपनी छावनी तक बनानी पड़ी। सैकड़ों क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर सजा दी गई। मझौलीराज का किला आज भी उस ऐतिहासिकता की याद दिलाता है।
अंग्रेजों ने 1857 की क्रांति में यहां बनाई थी छावनी, सैकड़ों क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर दी थी मौत की सजा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उस दौरान देवरिया के मझौलीराज के राजा उदय नारायण मल्ल की मित्रता अंग्रेजों से थी। अंग्रेजी सेना ने 1857 की क्रांति को कुचलने के लिए यहां पर एक छावनी स्थापित कर दी। इसके बाद क्रांति विरोधी गतिविधियों को यहीं से संचालित किए जाने लगा। मझौलीराज के राजा उदय नारायण मल्ल ने क्रांति की सूचना अंग्रेजों को दे दी। इसके कारण यहां स्वतंत्रता सेनानियों की संख्या, बल तथा जोश की अधिकता के बावजूद पराजय का सामना करना पड़ा। लार के बाबू भवन सिंह के नेतृत्व में हजारों विद्रोही सिपाहियों ने सोहनपुर में अंग्रेजी सेना के साथ भयंकर युद्ध किया।
नवंबर 1857 के प्रारंभ में भवन सिंह ने धरमेर के विजय बहादुर मल्ल, भवन सिंह के पुत्र गोपाल सिंह, लार के रामनाथ कुशवाहा, बरडीहा के गोविंद सिंह, अमर सिंह, के साथ मिलकर मझौली किले पर चढ़ाई की योजना बनाई। इस योजना से गोरखपुर-देवरिया के नायब नाजिर मुशर्रफ खान, पटना के मौलवी करीम व कुंवर सिंह के भाई हरिकिशुन सिंह को भी अवगत कराया।
इस अभियान में भवन सिंह के साथ पैना के ठाकुर सिंह, शिवव्रत सिंह, पलटन सिंह, शिवजोर सिंह भी अपने साथियों के साथ सम्मिलित थे। मुशर्रफ खान के साथ बेनीमाधव सिंह के भाई संभर सिंह, करकाबार के धरम सिंह, भानपुर के जमींदार बाबू गोविंद बल्लभ सिंह व उनके सहयोगी, चिल्लपुर के राजा, शिवपुर परगना अमोढ़ा के जमींदार सूर्य सिंह, राजा किशन किशोर चंद्र, राजा रघुवीर सिंह, मुनवान सिंह, धरमेर के राजपूत, वाजिद मुहम्मद टिलजी, नवाब सिंह, गुलराम शाह, नवाब मुहम्मद टांसी, दौलत अली, शेर अली, रियासत अली, जाकिर हुसैन, विरजिस कदर, जफर अली, दोस्त अली, नारायण दयाल, संग्राम लाल, सरायमीर के मनसब अली, बल्ली सिंह, पृथ्वीपाल सिंह, अमोढ़ा की रानी भी मझौलीराज की इस लड़ाई में सम्मिलित हो गए थे।