अगले करीब 30 साल यानी 2050 तक की जरूरतों और बदलाव को ध्यान में रखकर शहर के सुनियोजित विकास के लिए गोरक्षनगरी की नगर विकास योजना (सीडीपी) को तैयार किया जा रहा है। इसमें विकास से लेकर यातायात, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा को और बेहतर बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। अगले महीने के आखिरी सप्ताह तक प्रस्ताव पूरा हो जाने की उम्मीद है, जिसके बाद इसे शासन को भेज दिया जाएगा।
खुशखबर: शहर की 2050 तक की जरूरतों का ध्यान रखेगी विकास योजना, ऐसे खींचा जा रहा नए गोरखपुर का खाका
इस सिलसिले में 19 अगस्त को हुई बैठक में कमिश्नर रवि कुमार एनजी ने योजना बनाने का काम तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया। शहर के विकास के लिए तैयार की जा रही इस कार्ययोजना में सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ सुझाव देने और बाद में इसे मूर्तरूप देने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
सीडीपी के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) को नोडल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। सीडीपी में पुराने शहर को नए सिरे से विकसित करने की कार्ययोजना शामिल होगी। इसके साथ ही फलमंडी, ट्रांसपोर्टनगर, वेयर हाउस के शहर से बाहर ले जाने का भी जिक्र होगा।
ऐसे खींचा जा रहा है नए गोरखपुर का खाका
नया गोरखपुर की कार्ययोजना में आध्यात्मिक शिक्षा, ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट (टीडीपी), पार्किंग को लेकर नीति, मीटर के जरिए जलापूर्ति, सोलर ऊर्जा का प्रयोजन, शून्य उत्सर्जन, सभी विभागों के बीच सूचना साझा करने के लिए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, नगर दिवस समारोह, जोनल प्लान, पीपीपी माडल नीति, सीवर व्यवस्था, ठोस अपशिष्ट रिसाइकिलिंग के उपचार के नए तरीके, पर्यटन विकास को भी सीडीपी में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही गीडा में फूड प्रोससिंग पार्क की संभावनाएं एवं 2050 तक शहर के स्वावलंबन की संभावनाओं जैसे अनेक बिन्दुओं को इस कार्ययोजना में समाहित किया जाएगा।
