हिंदी आत्मा की आवाज है। साथ ही आपसी संवाद का सबसे सरल जरिया। इसे अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी आत्मसात कर रहे हैं। ऐसे विद्यालय जहां ज्यादातर विषयों की पढ़ाई अंग्रेजी में ही होती है, वहां हिंदी ने अपने अस्तित्व को मजबूती से बनाए रखा है। हाल ही में घोषित सीबीएसई और सीआईएससीई के परीक्षा परिणामों में शहर के मेधावियों को हिंदी विषय में 100 में से 100 तो कई विद्यार्थियों को 97 अंक तक मिले हैं। इन विद्यार्थियों ने हिंदी की पढ़ाई में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती है। अमर उजाला संवाददाता ने हिंदी में बढ़िया अंक हासिल करने वाले ऐसे ही मेधावियों से बात की। हिंदी की उन्नति पर विद्यार्थियों ने बेबाकी से राय रखी।
#हिंदीहैंहमः अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने किया कमाल, जानिए कैसे बढ़ाया हिंदी का मान
- सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड के विद्यार्थियों ने किया था कमाल
- दसवीं, बारहवीं में 100-100 व 97-97 अंक प्राप्त करके हिंदी का मान बढ़ाया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदी में भी बढ़ रहीं रोजगार की संभावनाएं
शहर में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली जीएन नेशनल पब्लिक स्कूल की छात्रा दिव्यांगी त्रिपाठी ने बताया कि ऐसा नहीं कि केवल अंग्रेजी भाषा के जानकारों को ही रोजगार मिल रहे हैं। हिंदी में भी रोजगार की संभावनाएं बढ़ रहीं हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियां नौकरी के अवसर मुहैया करा रहीं हैं। विद्यार्थियों का आकर्षण फिर हिंदी की ओर बढ़ रहा है। बारहवीं कक्षा का नतीजा आया तो एक बार चौंक गई। हिंदी में 100-100 में अंक मिले थे। फिर सोचा, हमारी मातृभाषा है। इतने अंक तो मिलने ही चाहिए थे। खुद पर गर्व होता है।
तकनीक ने हिंदी को आगे बढ़ाया
खोराबार के सेंट जोसफ स्कूल की कक्षा 10 की छात्रा कशिश श्रीवास्तव ने बताया कि हिंदी का अतीत गौरवशाली रहा है। तकनीकी ने हिंदी को आगे बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गूगल पर जाइये और ब्लॉग लिखकर परिणाम खोजिए। हिंदी के ब्लॉग भरे पड़े हैं। हिंदी से भागने की जरूरत नहीं है। इसे अपनाकर देखिए। आपको आनंद मिलेगा। हिंदी में 100 अंक पाकर खुद को गौरवान्वित महसूस करती हूं। हिंदी को आगे बढ़ाने की मुहिम भी अच्छी है।
मातृभाषा के विकास के बगैर समाज की उन्नति मुश्किल
आरपीएम एकेडमी गोरखपुर की कक्षा 10 की छात्रा सौम्या उपाध्याय ने बताया कि हिंदी में 97 अंक मिले तो अच्छा लगा। आखिर हमारी मातृभाषा जो है। मातृभाषा के विकास के बगैर किसी समाज की उन्नति नहीं हो सकती है। वर्तमान परिदृश्य में हिंदी पूरे विश्व के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है। इंटरनेट माध्यमों में भी हिंदी का इस्तेमाल बढ़ा है। जो लोग हिंदी का की-बोर्ड नहीं इस्तेमाल करते हैं, वह हिंग्लिश का इस्तेमाल करके हिंदी लिखते हैं। फेसबुक, ट्विटर हिंदी की लिखावट से भरे रहते हैं। दुनिया के 140 विश्वविद्यालयों में हिंदी का पठन-पाठन होना शुभ संकेत है।
हमारी संस्कृति से है हिंदी का जुड़ाव
धरमपुर के एलएफएस की छात्रा कात्यायनी शुक्ला ने बताया कि हिंदी भाषा का जुड़ाव हमारी सभ्यता और संस्कृति से है। जब तक इंसान इससे जुड़ा है, अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा। हिंदी में बात करने से किसी की सामाजिक प्रतिष्ठा कम नहीं होती है। यह मान-सम्मान बढ़ाती है। हिंदी भाषा सरल है। इसके जरिये अपनी बात प्रभावी ढंग से रखी जा सकती है। मातृभाषा को बच्चे जैसा प्यार, सम्मान देने की जरूरत है। हिंदी हमारी मातृभाषा है। लिहाजा, बारहवीं कक्षा में 97 अंक हासिल कर अच्छा लगता है।