देश की बीमा कंपनियों के पास हजारों करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं। वित्त मंत्री की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार बीमा कंपनियों के पास बीमाधारकों के 16887.66 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं। ऐसा भी हो सकता है कि इसमें से कुछ पैसा आपका भी हो, लेकिन आपको इस बात की जानकारी ही न हो।
बीमा कंपनियों के पास 'लावारिस' तो नहीं पड़े हैं आपके पैसे, घर बैठे ऐसे कर सकते हैं क्लेम
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भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के निर्देश के बाद सभी बैंकों ने ऐसी रकम को संबंधित व्यक्ति के आश्रितों तक पहुंचाने की पहल शुरू की है। दरअसल हर बीमा कंपनी में पॉलिसीधारक की सुरक्षा के लिए बनाई गई निदेशक स्तरीय समिति को जिम्मेदारी दी गई है कि वह बीमाधारकों के सभी बकायों का समय से भुगतान करें।
ऐसे पता करें अपनी रकम
इरडा की ओर से जारी निर्देश के अनुसार बीमा कंपनियों ने अपनी वेबसाइट पर सर्च की सुविधा मुहैया कराई है। इसकी मदद से पॉलिसीधारक या आश्रित इस बात का पता लगा सकते हैं कि क्या उनके नाम पर इन कंपनियों के पास कोई बिना दावे वाली रकम तो नहीं है।
एलआईसी के लिए दिए गए लिंक https://customer.onlinelic.in/LICEPS/portlets/visitor/unclaimedPolicyDues/UnclaimedPolicyDuesController.jpf पर जाकर जानकारी हासिल कर सकते हैं।
क्यों नहीं होता है दावा
ताहिर अली ने बताया कि अक्सर इस तरह की इंश्योरेंस पॉलिसी के बारे में नॉमिनी को पता ही नहीं होता है। या फिर पॉलिसी डॉक्यूमेंट नहीं मिलते हैं। इस तरह पॉलिसीधारक की मौत होने पर आश्रित इस रकम पर दावा करने की स्थिति में नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए नॉमिनी को न केवल पॉलिसी के बारे में पता होना चाहिए, बल्कि उसे यह जानकारी भी होनी चाहिए कि पॉलिसी से जुड़े दस्तावेज कहां रखे हैं।
पॉलिसी में नॉमिनेशन को अपडेट कराना भी नहीं भूलना चाहिए। चेक के पेमेंट के साथ तय समय जुड़ा होता है। इसके गलत रखरखाव से भुगतान में देरी हो सकती है। ज्यादातर बीमा कंपनियों ने क्लेम के भुगतान के लिए इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था शुरू कर दी है। 2014 के बाद जारी पॉलिसी में बीमा कंपनियां फंडों के इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर पर जोर देती हैं। ऐसे में इसके लिए आवेदन के समय ही ब्लैंक कैंसिल चेक ले लेती हैं।