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बीमा कंपनियों के पास 'लावारिस' तो नहीं पड़े हैं आपके पैसे, घर बैठे ऐसे कर सकते हैं क्लेम

Fri, 24 Jul 2020 08:57 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 24 Jul 2020 08:57 AM IST
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Know how to Claim for Rupees in Bank
insurence - फोटो : सोशल मीडिया।

देश की बीमा कंपनियों के पास हजारों करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं। वित्त मंत्री की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार बीमा कंपनियों के पास बीमाधारकों के 16887.66 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं। ऐसा भी हो सकता है कि इसमें से कुछ पैसा आपका भी हो, लेकिन आपको इस बात की जानकारी ही न हो।

Know how to Claim for Rupees in Bank

भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के निर्देश के बाद सभी बैंकों ने ऐसी रकम को संबंधित व्यक्ति के आश्रितों तक पहुंचाने की पहल शुरू की है। दरअसल हर बीमा कंपनी में पॉलिसीधारक की सुरक्षा के लिए बनाई गई निदेशक स्तरीय समिति को जिम्मेदारी दी गई है कि वह बीमाधारकों के सभी बकायों का समय से भुगतान करें।
 

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term-insurence

ऐसे पता करें अपनी रकम
इरडा की ओर से जारी निर्देश के अनुसार बीमा कंपनियों ने अपनी वेबसाइट पर सर्च की सुविधा मुहैया कराई है। इसकी मदद से पॉलिसीधारक या आश्रित इस बात का पता लगा सकते हैं कि क्या उनके नाम पर इन कंपनियों के पास कोई बिना दावे वाली रकम तो नहीं है।
 

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LIC
गोरखपुर डिवीजन इंश्योरेंस इंप्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष ताहिर अली ने बताया कि पॉलिसीधारक/लाभार्थी को बिना दावे वाली रकम का पता लगाने के लिए पॉलिसी नंबर, पॉलिसीधारक का पैन, उसका नाम, आधार नंबर जैसे ब्योरे डालने पड़ते हैं। नाम और जन्मतिथि बताकर भी पॉलिसी संबंधी जानकारी हासिल की जा सकती है।

एलआईसी के लिए दिए गए लिंक  https://customer.onlinelic.in/LICEPS/portlets/visitor/unclaimedPolicyDues/UnclaimedPolicyDuesController.jpf पर जाकर जानकारी हासिल कर सकते हैं।
 
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एलआईसी

क्यों नहीं होता है दावा
ताहिर अली ने बताया कि अक्सर इस तरह की इंश्योरेंस पॉलिसी के बारे में नॉमिनी को पता ही नहीं होता है। या फिर पॉलिसी डॉक्यूमेंट नहीं मिलते हैं। इस तरह पॉलिसीधारक की मौत होने पर आश्रित इस रकम पर दावा करने की स्थिति में नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए नॉमिनी को न केवल पॉलिसी के बारे में पता होना चाहिए, बल्कि उसे यह जानकारी भी होनी चाहिए कि पॉलिसी से जुड़े दस्तावेज कहां रखे हैं।

पॉलिसी में नॉमिनेशन को अपडेट कराना भी नहीं भूलना चाहिए। चेक के पेमेंट के साथ तय समय जुड़ा होता है। इसके गलत रखरखाव से भुगतान में देरी हो सकती है। ज्यादातर बीमा कंपनियों ने क्लेम के भुगतान के लिए इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था शुरू कर दी है। 2014 के बाद जारी पॉलिसी में बीमा कंपनियां फंडों के इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर पर जोर देती हैं। ऐसे में इसके लिए आवेदन के समय ही ब्लैंक कैंसिल चेक ले लेती हैं।
 

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