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बाढ़ लाइव: प्लास्टिक के एक ही टुकड़े में छिप रहे इंसान और मवेशी, लोग बोले- हमारा तो जीवन ही संघर्ष गाथा है
उदयभान त्रिपाठी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 07 Sep 2021 01:21 PM IST
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में बाढ़ के बीच प्लास्टिक के एक ही टुकड़े में इंसान और मवेशी छिप रहे हैं। एक तरफ राप्ती और दूसरी तरफ रोहिन नदी से घिरे सदर ब्लॉक के कोलिया उत्तरी गांव के लोगों का जीवन इस वक्त बेहद कष्टों से गुजर रहा है। गांव के अधिकांश घरों में बाढ़ का पानी भरा है लिहाजा लोग जरूरी सामान समेत बांध पर शरण लिए हुए हैं। यहां किसी तरह जुगाड़ से प्लास्टिक तानकर सामान समेत खुद को तो छिपाए ही हैं, अपने गाय-भैंसों को भी उसमें ही शरण दी है। हालांकि करीब 15 दिनों से यहां रह रहे लोगों को इस बात का संतोष है कि सरकार ने राशन व दो लीटर मिट्टी का तेल दे दिया है, जिससे वक्त कट जा रहा है। अगस्त के अंतिम सप्ताह में राप्ती और रोहिन नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया था। इसके चलते नदी क्षेत्र के अगल-बगल के गांवों में जलभराव हो गया।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
सदर ब्लॉक का डोमिनगढ़ व कोलिया उत्तरी गांव रोहिन व राप्ती के संगम के किनारे है। दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ का पानी कोलिया उत्तरी के अधिकांश घरों में भर गया। गांव के निचले इलाकों में तो कहीं-कहीं 10 से 15 फुट तक पानी भर गया। मजबूरी में लोगों को गांव के किनारे बने रिंग बांध पर शरण लेनी पड़ी। बिस्तर, कपड़ा, चूल्हा-बर्तन के साथ-साथ गाय-भैंस, बकरी को भी वे साथ ले आए। गांव के बिरझन निषाद बताते हैं कि हालत देखकर सभी ने शहर से प्लास्टिक खरीदा और बांस-रस्सी के सहारे टेंट जैसा बनाकर उसी में सामान, इंसान और मवेशियों को रखा गया है। हालांकि अब नदी का पानी घटने लगा है लेकिन अभी भी हालत पूरी तरह से सामान्य होने में कम से कम एक सप्ताह का वक्त लगेगा।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
घर में बचे सामान की भी सता रही चिंता
अधिकांश परिवारों ने भले ही बांध पर शरण ले रखी है, लेकिन गांव के मकान में बचे सामान की सुरक्षा को लेकर भी वे फिक्रमंद हैं। लिहाजा इतने खराब हालात में भी एक आदमी गांव के मकान पर रह रहा है। 55 वर्षीया शकुंतला देवी कहती हैं कि ‘घर खाली रही तो केहू बचल समान भी निकाल ले जाई, का कइल जाई। सामान व घर के रखवाली खातिर एक आदमी क घर में रखल भी जरूरी बा’। बांध पर शरण लिए लोगों का कहना है कि जब पानी घटने लगता है तो सामान की चोरी बढ़ जाती है। लिहाजा जैसे ही पानी घटना शुरू होता है, एक सदस्य को नियमित रूप से घर में रखा जाता है।
अधिकांश परिवारों ने भले ही बांध पर शरण ले रखी है, लेकिन गांव के मकान में बचे सामान की सुरक्षा को लेकर भी वे फिक्रमंद हैं। लिहाजा इतने खराब हालात में भी एक आदमी गांव के मकान पर रह रहा है। 55 वर्षीया शकुंतला देवी कहती हैं कि ‘घर खाली रही तो केहू बचल समान भी निकाल ले जाई, का कइल जाई। सामान व घर के रखवाली खातिर एक आदमी क घर में रखल भी जरूरी बा’। बांध पर शरण लिए लोगों का कहना है कि जब पानी घटने लगता है तो सामान की चोरी बढ़ जाती है। लिहाजा जैसे ही पानी घटना शुरू होता है, एक सदस्य को नियमित रूप से घर में रखा जाता है।
शीला व केशव
- फोटो : अमर उजाला।
कोलिया उत्तरी की शीला ने बताया कि जब घर और खेती यहीं है तो निकलकर कहां जाएं ? बाढ़ तो अब आदत सी बन गई है। सरकारें आती-जाती हैं, बाढ़ की हालत एक जैसी ही रहती है। कुछ दिन तक लोग दुख जताते हैं और बाद में भूल जाते हैं। हम अपनी लड़ाई खुद ही लड़ते हैं, इसलिए अब किसी नेता या सरकार से कोई ऐसी उम्मीद भी नहीं है।
कोलिया उत्तरी के केशव ने बताया कि इस बार वर्ष 2017 से अधिक पानी आ गया है। बीते 10 दिन का अनुभव बेहद खराब रहा है। चारों तरफ पानी भरा होने के चलते बड़ा कष्ट उठाना पड़ा। कई दिन व रात रेलवे लाइन के किनारे कटी। अब पानी घटना शुरू तो हुआ है लेकिन हालात सामान्य होने में एक पखवारा लगेगा। गड्ढों में जो पानी भरा है वह खत्म होने में काफी वक्त लगेगा। बाढ़ खत्म होने के बाद भी मवेशियों के लिए चारे का संकट बना रहेगा।
कोलिया उत्तरी के केशव ने बताया कि इस बार वर्ष 2017 से अधिक पानी आ गया है। बीते 10 दिन का अनुभव बेहद खराब रहा है। चारों तरफ पानी भरा होने के चलते बड़ा कष्ट उठाना पड़ा। कई दिन व रात रेलवे लाइन के किनारे कटी। अब पानी घटना शुरू तो हुआ है लेकिन हालात सामान्य होने में एक पखवारा लगेगा। गड्ढों में जो पानी भरा है वह खत्म होने में काफी वक्त लगेगा। बाढ़ खत्म होने के बाद भी मवेशियों के लिए चारे का संकट बना रहेगा।
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सच्चिदानंद व अक्षय कुमार।
- फोटो : अमर उजाला।
उत्तरी कोलिया के सच्चिदानंद ने बताया कि बाढ़ हर साल हमारे गांव में मुसीबत बनकर आती है। कई रिंग बांध भी बने हैं लेकिन इससे बाढ़ का कहर कम नहीं हो रहा है। इस साल काफी पानी चढ़ा है। खेत-खलिहान तो डूबकर बर्बाद हो ही चुके हैं, मवेशियों के लिए चारा मिलना भी मुश्किल है। कोरोना का संकट झेलने के बाद अब बाढ़ की मुसीबत से निपटना है। हमारा तो जीवन ही संघर्ष गाथा है।
उत्तरी कोलिया के अक्षय कुमार ने बताया कि इस बार की बाढ़ ने बड़ा नुकसान किया है। पहले यह अंदाजा था कि पानी दरवाजे तक पहुंचेगा लेकिन दो दिन में ही घर में चार से पांच फुट तक पानी भर गया। इसके चलते केवल जरूरी सामान ही निकाल पाए। सबसे बड़ी मुसीबत तो यह हो गई कि जहां ट्रांसफार्मर लगा था उसके नीचे ही पानी भर गया। बिजली निगम को सूचना देकर आपूर्ति बंद कराई गई। 10 दिन हो गए, मोबाइल चार्ज करने भी दूसरी जगह जाना पड़ता है।
उत्तरी कोलिया के अक्षय कुमार ने बताया कि इस बार की बाढ़ ने बड़ा नुकसान किया है। पहले यह अंदाजा था कि पानी दरवाजे तक पहुंचेगा लेकिन दो दिन में ही घर में चार से पांच फुट तक पानी भर गया। इसके चलते केवल जरूरी सामान ही निकाल पाए। सबसे बड़ी मुसीबत तो यह हो गई कि जहां ट्रांसफार्मर लगा था उसके नीचे ही पानी भर गया। बिजली निगम को सूचना देकर आपूर्ति बंद कराई गई। 10 दिन हो गए, मोबाइल चार्ज करने भी दूसरी जगह जाना पड़ता है।