गोरखपुर में चौड़ी सड़कें, शानदार लाइट और रामगढ़ ताल की रौनक से जहां शहर की खूबसूरती बढ़ी है, वहीं जलभराव ने शहर की पहचान बिगाड़ दी है। यह शहर की एक ऐसी समस्या बन गई है, जिससे हर कोई परेशान है। शहर के अंदरूनी हिस्से से लेकर बाहरी इलाके तक रोग एक जैसा ही है। त्रासदी झेल रहे लोग शहर के मालिक से गुहार लगा रहे हैं कि प्रभु शहर में आई इस बाढ़ से मुक्ति दिलाइए।
रामजानकी नगर मोहल्ला निवासी दीपक कुमार चौरसिया बैंक मैनेजर हैं। आसपास के इलाके में पहले इस मोहल्ले की खास पहचान थी लेकिन महीने भर से जलभराव ने मुश्किल बढ़ा दी है। दोस्त इनके घर आने से कतराने लगे हैं। वजह यह कि नालियों के गंदे पानी से होकर ही मैनेजर साहब के घर तक पहुंचना पड़ेगा। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...
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गोरखपुर में जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला।
बक्सीपुर निवासी शैलेष पांडेय जलभराव पर कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि जब बीच शहर में स्थित कलेक्ट्रेट व जिला अस्पताल बारिश में पानी-पानी हो रहा है तो हमारा घर कौन सा टीले पर बना है।
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गोरखपुर में जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला।
मोहद्दीपुर निवासी अनूप कुमार कहते हैं कि जिस दिन बारिश होती है, यह सोचकर चलना पड़ता है कि कौन सी सड़क ऐसी मिलेगी जिस पर नाली का पानी नहीं बह रहा होगा। सबसे अधिक दिक्कत तो बच्चों को है। गंदे पानी के बीच से होकर उन्हें स्कूल जाना पड़ रहा हैं।
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गोरखपुर में जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला।
तारामंडल रोड निवासी अजय मल्ल कहते हैं कि बीते चार साल में शहर का तेजी से विकास हुआ है लेकिन जलभराव की समस्या भी उसी रफ्तार से बढ़ती ही जा रही है। किनारे के कई मोहल्लों में डेढ़ महीने से पानी लगा है। हास्यास्पद यह है कि अब तो खुद नगर निगम भी जलभराव वाले मोहल्ले में नाव देने लगा है।
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गोरखपुर में जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला।
सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि हमारा मोहल्ला शहर के बीच में है। नाली-सड़क बनी होने के चलते कभी बरसात में ऐसी दिक्कत नहीं होती थी। लेकिन इस बार बरसात का पानी दरवाजे तक चढ़ा हुआ है। गंदे पानी के बीच से होकर आना-जाना पड़ रहा है। जल्दी उपाय किया जाना जरूरी है ।
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