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डकैतों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए थे पिता, अब बेटा ले रहा बदला

Sat, 22 Aug 2020 03:57 PM IST
vivek shukla संजीव कुमार मिश्र, रामकोला।
संजीव कुमार मिश्र, रामकोला। Published by: vivek shukla Updated Sat, 22 Aug 2020 03:57 PM IST
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Policeman Ravish father martyred in encounter special story
Kushinagar encounter - फोटो : अमर उजाला।

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गुरुवार को पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई थी। इस मुठभेड़ में दो बदमाशों के पैर में गोली लग गई थी और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस मुठभेड़ में एक खास शख्स मौजूद था, जिसके पिता डकैतों से मुठभेड़ करते हुए शहीद हो गए थे। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए पूरी कहानी...

Policeman Ravish father martyred in encounter special story
शहीद कांस्टेबल विश्वनाथ यादव। - फोटो : अमर उजाला।

वह एक वर्ष का ही था जब उसके पिता जंगल पार्टी के डकैतों से मुठभेड़ करते हुए शहीद हो गए थे। बड़ा होने पर पिता की वीरगाथा सुनी तो उसने भी पुलिस में भर्ती होने की ठान ली। तीन साल पहले यूपी पुलिस में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुआ और अब कुशीनगर जिले के रामकोला थाने में तैनाती है।

Policeman Ravish father martyred in encounter special story
शहीद कांस्टेबल की याद में पडरौना कोतवाली में बना शहीद द्वार। - फोटो : अमर उजाला।

गुरुवार को हुई मुठभेड़ में शामिल इस कांस्टेबल के लिए यह दिन यादगार हो गया। कुशीनगर जिला बनने के कुछ ही महीने बाद 30 अगस्त 1994 की रात में कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के पचरुखिया के पास बांसी नदी में पुलिस और जंगल डकैतों के बीच मुठभेड़ हुई थी। उस मुठभेड़ में जिले के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट दारोगा अनिल कुमार पांडेय समेत छह पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।

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सिपाही रविश यादव। - फोटो : अमर उजाला।

उन पुलिस कर्मियों में एक नाम विश्वनाथ यादव का भी था। विश्वनाथ यादव का बेटा रवीश भी यूपी पुलिस का सिपाही है। गुरुवार को रामकोला थाना क्षेत्र के परगन छपरा गांव के सामने अपराधियों के साथ हुए मुठभेड़ में अन्य पुलिस कर्मियों के साथ रवीश यादव भी शामिल था।

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घटनास्थल पर पुलिस टीम व ग्रामीणों की जुटी भीड़। - फोटो : अमर उजाला।

गुरुवार दिन को अपने लिए बेहद खास बताते हुए रवीश ने कहा कि जब उसके पिता शहीद हुए थे उसकी उम्र महज एक वर्ष की थी। स्कूल जाने की उम्र में उसे पता लगा कि बदमाशों ने उससे पिता का प्रेम छीन लिया है तभी से उसके मन में यह प्रबल इच्छा रही कि वह भी पुलिस में भर्ती होकर अपराधियों का सफाया करेगा। वर्ष 2017 में पुलिस की वर्दी पहनने के बाद गुरुवार को वह पहला मौका था जब उसने अपराधियों से मुठभेड़ में हिस्सा लिया और सफलता पूर्वक दो बदमाश पकड़े भी गए।

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