देश के ज्यादातर हिस्से इन दिनों भीषण ठंड और शीतलहर का प्रकोप झेल रहे हैं। कोहरा और लगातार गिरते तापमान के कारण जनजीवन काफी प्रभावित हुआ है। उत्तर भारत में ठंड का असर ज्यादा देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्दियों का ये मौसम आपकी सेहत के लिए कई प्रकार की दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है। बढ़ते तापमान के कारण ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल बढ़ने का भी जोखिम रहता है, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधान रहने की सलाह दी जाती है।
Winter Health Tips: सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है निमोनिया होने का खतरा? ये उपाय रखेंगे आपको सुरक्षित
- निमोनिया फेफड़ों का एक संक्रमण है, जिसमें फेफड़ों की एयर सैक्स में सूजन आ जाती है और उनमें पानी या मवाद भर सकता है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। बच्चों और बुजुर्गों में इम्यून सिस्टम कमजोर होने के कारण यह संक्रमण तेजी से फैल सकता है
ठंड के दिनों में बढ़ जाती हैं सांस की समस्याएं
श्वसन रोग विशेषज्ञ बताते हैं, ठंड का मौसम आते ही सांस से जुड़ी समस्याएं भी तेजी से बढ़ने लगती हैं। ठंडी हवा, बढ़ता प्रदूषण, बंद कमरों में ज्यादा समय बिताना आपके श्वसन तंत्र और फेफड़ों पर नकारात्मक असर डालने वाला हो सकता है, यही कारण है कि ठंड के दिनों में निमोनिया संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं।
सर्दियों में बैक्टीरिया और वायरस भी ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं, जो कमजोर इम्युनिटी पाते ही आपके फेफड़ों पर अटैक करके उन्हें संक्रमित कर देते हैं और निमोनिया का कारण बन सकते हैं। निमोनिया पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए और इसका इलाज न हो पाए तो इससे जान जाने का भी खतरा बढ़ जाता है।
निमोनिया के बारे में जान लीजिए
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, निमोनिया फेफड़ों का एक संक्रमण है, जिसमें फेफड़ों की वायु थैलियों (एल्वियोली) में तरल या मवाद भर जाता है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने में कठिनाई होने लगती है। निमोनिया के कारण तेज बुखार, लगातार खांसी आने, सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, ठंड लगने, कमजोरी जैसे लक्षण दिख सकते हैं। गंभीर मामलों में ऑक्सीजन की कमी के कारण होंठ या नाखून नीले पड़ने लगते हैं।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों और 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में निमोनिया से मृत्यु का खतरा ज्यादा रहता है।
- सर्दियों में ठंडी हवा सीधे फेफड़ों तक पहुंचकर उनकी सुरक्षा परत को कमजोर कर देती है। इससे बैक्टीरिया और वायरस आसानी से फेफड़ों में संक्रमण फैला देते हैं।
- इसके अलावा, लोग ठंड से बचने के लिए बंद कमरों में रहते हैं, जहां हवा का संचार कम होता है और संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों क्यों होते हैं ज्यादा शिकार?
अक्सर देखा गया है कि निमोनिया के ज्यादातर मामले बच्चे और बुजुर्गों में होते हैं।
- बच्चों का इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता जिससे कोई भी संक्रमण उन्हें आसानी से अपनी चपेट में ले सकता है।
- बुजुर्गों में उम्र के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिसके चलते उनके बीमार पड़ने का खतरा भी अधिक हो सकता है।
- इतना ही नहीं पहले से ही कुछ तरह की बीमारियों जैसे डायबिटीज, अस्थमा, हृदय रोग या सीओपीडी के शिकार लोगों में भी निमोनिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
निमोनिया से बचाव के लिए क्या करें?
आप कुछ सावधानियां बरतकर आसानी से निमोनिया से बचाव कर सकते हैं।
- निमोनिया से बचाव के लिए बच्चों और बुजुर्गों को समय पर निमोनिया और फ्लू का टीका लगवाने की सलाह दी जाती है।
- ठंड के दिनों में शरीर को गर्म रखें, संतुलित आहार लें और विटामिन-प्रोटीन युक्त भोजन शामिल करें।
- हाथों की नियमित सफाई करें। भीड़भाड़ से बचाव और धूम्रपान से दूरी जरूरी है।
- सांस से जुड़ी कोई भी समस्या अगर लंबे समय तक बनी रहे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, ताकि समय रहते गंभीर स्थिति से बचा जा सके।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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