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बड़ा सवाल: क्या वैक्सीन की दोनों डोज संक्रमण से सुरक्षा की गारंटी हैं? अध्ययन में सामने आई यह बात

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 26 Nov 2021 02:40 PM IST
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Study warns, covid infection risk increases from three months after full vaccination
टीकाकरण के बाद संक्रमण का खतरा - फोटो : पीटीआई

दुनिया के तमाम देशों में कोरोना संक्रमण का खतरा एक बार फिर से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। हाल ही में सामने आए कोरोना के कुछ नए वैरिएंट्स ने वैज्ञानिकों की चिंता और भी बढ़ा दी है। अब तक के तमाम अध्ययनों में दावा किया जाता रहा है कि वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों को संक्रमण का जोखिम काफी कम होता है, हालांकि हालिया अध्ययन ने इस दावे पर सवालिया निशान लगा दिया है। बीएमजे मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन की दूसरी खुराक प्राप्त करने के 90 दिनों के बाद से लोगों में कोरोना संक्रमण का खतरा धीरे-धीरे बढ़ जाता है।



हाल ही में कोरोना के सामने आए नए वैरिएंट्स में कई ऐसे म्यूटेशनों के बारे में पता चला है जो वैक्सीन से शरीर में बनी एंटीबॉडीज को आसानी से चकमा देने में सफल हो सकते हैं। इस बीच इस अध्ययन में सामने आए परिणाम ने वैज्ञानिकों को बड़ी चिंता में डाल दिया है। अब सवाल खड़े होने लगे हैं कि क्या वास्तव में वैक्सीनेटेड लोगों को कोरोना से सुरक्षित माना जा सकता है? आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं। 

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Study warns, covid infection risk increases from three months after full vaccination
वैक्सीनेशन के बाद संक्रमण का जोखिम - फोटो : Pixabay

समय के साथ कम होता जाता है टीके का असर
इज़राइल स्थित रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ल्यूमिट हेल्थ सर्विसेज द्वारा किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि शरीर में वैक्सीनेशन से बनी कोरोना के खिलाफ सुरक्षा समय के साथ कम हो जाती है। ऐसे में वैज्ञानिकों का कहना है कि लोगों को बूस्टर डोज यानी कि वैक्सीन की तीसरी खुराक देने की आवश्यकता हो सकती है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि वैसे तो फाइजर वैक्सीन टीकाकरण के बाद शुरुआती हफ्तों में उत्कृष्ट सुरक्षा प्रदान करती है, लेकिन समय के साथ कुछ व्यक्तियों में इसका असर कम होता जाता है।

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Study warns, covid infection risk increases from three months after full vaccination
वैक्सीनेशन के बाद भी हो रहा है संक्रमण - फोटो : iStock

अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 44 साल की औसत आयु वाले 80057 लोगों के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड का अध्ययन किया। इन लोगों का फाइजर वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के तीन सप्ताह बाद पीसीआर टेस्ट कराया गया था। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि 80057 में से 7973 (करीब 9.6 फीसदी) लोगों का पीसीआर टेस्ट परिणाम सकारात्मक पाया गया। यानी कि वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के महज तीन सप्ताह के बाद ही इन लोगों को कोरोना से संक्रमित पाया गया।

Study warns, covid infection risk increases from three months after full vaccination
कोविड-19 का खतरा - फोटो : Pixabay

बढ़ता जाता है संक्रमण का जोखिम
शोधकर्ताओं ने दूसरी खुराक के शुरुआती 90 दिनों की तुलना में, सभी आयु वर्ग के लोगों में संक्रमण के खतरे को जानने के लिए अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि दूसरी खुराक के 90-119 दिनों के बाद संक्रमण का खतरा 2.37 गुना, 120-149 दिनों के बाद 2.66 गुना, 150-179 दिनों के बाद 2.82 गुना अधिक हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि उनके निष्कर्षों की व्याख्या अवलोकन संबंधी डिजाइन द्वारा सीमित है, हालांकि इसे ध्यान में रखकर आगे के बारे में विचार जरूर किया जाना चाहिए।

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बूस्टर डोज की पड़ सकती है जरूरत - फोटो : Pixabay

क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं का कहना है कि हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते हैं टीकाकरण के बाद संक्रमण के कई कारक हो सकते हैं, हालांकि इस बात को जरूर ध्यान में रखा जाना चाहिए कि वैक्सीनों की शक्ति समय के साथ कम होती जाती है। यह अध्ययन फाइजर वैक्सीन लेने वाले लोगों पर किया गया था, इसी तरह से अन्य कंपनियों के टीके लेने वाले लोगों पर भी अध्ययन करके परिणाम जानने आवश्यक हो जाते हैं। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के निष्कर्ष में वैक्सीन की तीसरी खुराक यानी बूस्टर डोज की जरूरतों पर एक बार फिर से जोर दिया है।


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स्रोत और संदर्भ
Elapsed time since BNT162b2 vaccine and risk of SARS-CoV-2 infection: test negative design study

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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