दुनिया के तमाम देशों में कोरोना संक्रमण का खतरा एक बार फिर से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। हाल ही में सामने आए कोरोना के कुछ नए वैरिएंट्स ने वैज्ञानिकों की चिंता और भी बढ़ा दी है। अब तक के तमाम अध्ययनों में दावा किया जाता रहा है कि वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों को संक्रमण का जोखिम काफी कम होता है, हालांकि हालिया अध्ययन ने इस दावे पर सवालिया निशान लगा दिया है। बीएमजे मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन की दूसरी खुराक प्राप्त करने के 90 दिनों के बाद से लोगों में कोरोना संक्रमण का खतरा धीरे-धीरे बढ़ जाता है।
बड़ा सवाल: क्या वैक्सीन की दोनों डोज संक्रमण से सुरक्षा की गारंटी हैं? अध्ययन में सामने आई यह बात
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समय के साथ कम होता जाता है टीके का असर
इज़राइल स्थित रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ल्यूमिट हेल्थ सर्विसेज द्वारा किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि शरीर में वैक्सीनेशन से बनी कोरोना के खिलाफ सुरक्षा समय के साथ कम हो जाती है। ऐसे में वैज्ञानिकों का कहना है कि लोगों को बूस्टर डोज यानी कि वैक्सीन की तीसरी खुराक देने की आवश्यकता हो सकती है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि वैसे तो फाइजर वैक्सीन टीकाकरण के बाद शुरुआती हफ्तों में उत्कृष्ट सुरक्षा प्रदान करती है, लेकिन समय के साथ कुछ व्यक्तियों में इसका असर कम होता जाता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 44 साल की औसत आयु वाले 80057 लोगों के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड का अध्ययन किया। इन लोगों का फाइजर वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के तीन सप्ताह बाद पीसीआर टेस्ट कराया गया था। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि 80057 में से 7973 (करीब 9.6 फीसदी) लोगों का पीसीआर टेस्ट परिणाम सकारात्मक पाया गया। यानी कि वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के महज तीन सप्ताह के बाद ही इन लोगों को कोरोना से संक्रमित पाया गया।
बढ़ता जाता है संक्रमण का जोखिम
शोधकर्ताओं ने दूसरी खुराक के शुरुआती 90 दिनों की तुलना में, सभी आयु वर्ग के लोगों में संक्रमण के खतरे को जानने के लिए अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि दूसरी खुराक के 90-119 दिनों के बाद संक्रमण का खतरा 2.37 गुना, 120-149 दिनों के बाद 2.66 गुना, 150-179 दिनों के बाद 2.82 गुना अधिक हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि उनके निष्कर्षों की व्याख्या अवलोकन संबंधी डिजाइन द्वारा सीमित है, हालांकि इसे ध्यान में रखकर आगे के बारे में विचार जरूर किया जाना चाहिए।
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं का कहना है कि हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते हैं टीकाकरण के बाद संक्रमण के कई कारक हो सकते हैं, हालांकि इस बात को जरूर ध्यान में रखा जाना चाहिए कि वैक्सीनों की शक्ति समय के साथ कम होती जाती है। यह अध्ययन फाइजर वैक्सीन लेने वाले लोगों पर किया गया था, इसी तरह से अन्य कंपनियों के टीके लेने वाले लोगों पर भी अध्ययन करके परिणाम जानने आवश्यक हो जाते हैं। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के निष्कर्ष में वैक्सीन की तीसरी खुराक यानी बूस्टर डोज की जरूरतों पर एक बार फिर से जोर दिया है।
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स्रोत और संदर्भ
Elapsed time since BNT162b2 vaccine and risk of SARS-CoV-2 infection: test negative design study
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