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Obesity: बढ़ते वजन के साथ घटती जाती है जिंदगी, जानिए मोटापा कैसे बन रहा है मौत का कारण?

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 01 Mar 2026 07:35 PM IST
सार

World Obesity Day 2026: मोटापा केवल शरीर पर चर्बी बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों की जड़ भी है। खराब जीवनशैली, जंक फूड का अधिक सेवन और शारीरिक गतिविधियों में कमी को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।

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बढ़ता मोटापा जानलेवा बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com

अधिक वजन-मोटापे की समस्या दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे बड़े खतरे और तेजी से बढ़ती महामारी के रूप में देख रहे हैं। मोटापा असल में सिर्फ शरीर के बनावट की गड़बड़ी की समस्या नहीं है, ये कई तरह की क्रॉनिक और जानलेवा बीमारियों की जड़ भी है।



विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के विशेषज्ञ कहते हैं, दुनियाभर में मोटापे की दर पिछले कुछ दशकों में लगभग तीन गुना बढ़ी है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत में बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक सभी में मोटापे का संकट देखा जा रहा है। मोटापे के कारण होने वाली क्रॉनिक बीमारियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर साल-दर-साल अतिरिक्त दबाव भी बढ़ता जा रहा है, जो काफी चिंताजनक स्थिति है।

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि किस तरह से 'ओबेसिटी जीन' पर ही अटैक करके मोटापे के खतरे को कम किया जा सकता है। डॉक्टरों ने भारतीय आबादी में मोटापे के जेनेटिक  खतरा अधिक होने को लेकर भी अलर्ट किया है।

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मोटापा के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe stock photos

मोटापा और इसका सेहत पर गंभीर असर

दुनियाभर में मोटापे की समस्या से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाने और उपयोगी समाधानों के बारे में लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से हर 4 मार्च को वर्ल्ड ओबेसिटी डे मनाया जाता है।
 

  • डॉक्टर कहते हैं, तमाम मेडिकल रिपोर्ट्स से ये तो लोगों को स्पष्ट हो गया है कि मोटापा केवल लुक खराब होने की समस्या नहीं है। इससे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जो गंभीर स्थितियों में जानलेवा भी हो सकते हैं।
  • यदि समय रहते वजन को नियंत्रित करने के तरीके न अपनाए गए तो ये स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरों को बढ़ाने वाला हो सकता है। बचपन में मोटापे से जूझ रहे बच्चों में आगे चलकर मेटाबोलिक सिंड्रोम विकसित होने की आशंका अधिक होती है।
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हार्ट अटैक और इससे मौत का खतरा - फोटो : Adobe Stock Photo

हृदय रोग और हार्ट अटैक का जोखिम

मोटापे की बात होती है तो सबसे पहले इससे दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक के खतरे को लेकर चिंता बढ़ जाती है।
 

  • शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी, खासकर बेली फैट कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स दोनों को बढ़ाने वाला पाया गया है।  
  • इससे धमनियों में प्लाक जमा होने लगता है और दिल तक खून का संचार कम या बाधित हो जाता है जो हार्ट अटैक का प्रमुख कारण है। 
  • अध्ययनों के अनुसार जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 30 या उससे अधिक होता है, उनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा अधिक होता है।
  • सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के कारण हर साल लाखों लोगों की जान जा रही है। साल 2022 में इनकी वजह से लगभग 19.8 मिलियन (1.98 करोड़ मौतें हुईं।
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डायबिटीज और इससे होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock

टाइप-2 डायबिटीज और इसके कारण होने वाली दिक्कतें

मोटापा के कारण डायबिटीज और इससे होने वाली समस्याओं का जोखिम भी बढ़ जाता है।
 

  • शरीर में जमा अतिरिक्त फैट इंसुलिन हार्मोन के काम करने की क्षमता को कम कर देती है, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। 
  • इंटरनेशनल डायबिटीज फाउंडेशन के अनुसार दुनिया में अधिकांश टाइप-2 डायबिटीज के मामले अधिक वजन या मोटापे से जुड़े होते हैं। 
  • जब शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता, तो खून में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है। 
  • लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर के कारण हृदय रोग, किडनी फेलियर, अंधापन-बहेरपन और नसों, याददाश्त और हाथों की ताकत भी कम होने लग जाती है।


लिवर फेल होने का भी रहता है जोखिम

मोटापा के शिकार लोगों में लिवर और किडनी दोनों से संबंधित बीमारियों को जोखिम रहता है।
  • नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज का खतरा डायबिटीज के मरीजों में ज्यादा देखा जाता रहा है।
  • यदि समय पर फैटी लिवर का इलाज न हो, तो यह स्थिति सिरोसिस और लिवर फेलियर का जोखिम बढ़ाने वाली हो सकती है। इससे जान जाने का भी खतरा रहता है।
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कैंसर का खतरा - फोटो : Adobe Stock Photos

कैंसर का हो सकते हैं शिकार

मोटापा के शिकार लोगों में कैंसर होने का भी जोखिम अधिक होता है जो हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण है। 

  • मोटापा वाले लोगों में स्तन, कोलन, लिवर और पेट के कैंसर का खतरा अधिक होता है।
  • मोटापे से होने वाली क्रॉनिक इंफ्लेमेशन कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त करके कैंसर कोशिकाओं को बढ़ाने वाली हो सकती है।
  • वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फाउंडेशन के अनुसार अधिक वजन कम से कम 13 प्रकार के कैंसर का खतरा हो सकता है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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