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रीयल एस्टेट सेक्टर गुलजार, दो दिन में 1900 से अधिक रजिस्ट्री, कारोबारी बोले...
Thu, 22 Oct 2020 01:07 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 22 Oct 2020 01:07 PM IST
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पार्थ इंफ्रा बिल्ट की इमारतें
- फोटो : अमर उजाला
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क्या आप अपना घर खरीदने की सोच रहे हैं...। अब सोचना बंद कीजिए और अपना घर लेने का फैसला कर लीजिए। जी हां, फ्लैटों के दाम में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव न होना और सबसे बड़ी बात, होम लोन की इतनी कम दर और शहर में तैयार फ्लैटों की बड़ी संख्या नवरात्र के अच्छे दिनों के साथ मिलकर सर्वोत्तम संयोग बना रहे हैं। कस्टमर के आने, लगातार बढ़ती जा रही विजिट और बुकिंग से रीयल एस्टेट सेक्टर गुलजार है। वहीं, लगातार बढ़ती भू-संपत्तियों की रजिस्ट्री की संख्या बता रही है कि कोविड से पैदा हुई अनिश्चितता के माहौल से बाजार बाहर आ रहा है। कई बड़े बिल्डर नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं तो कुछ ने नवरात्र के साथ ही प्रोजेक्ट लॉन्च कर भी दिए हैं।
एल्डिको हाउसिंग के ऑफिस में जारी है ग्राहकों के आने का सिलसिला
- फोटो : अमर उजाला
बदली सोच : किराया नहीं किस्त देना बेहतर
एल्डिको हाउसिंग के सीओओ एसके जग्गी कहते हैं कि नई पीढ़ी किस्त देना बेहतर समझती है किराया देने से। कोविड के बाद ये ट्रेंड ज्यादा बढ़ा है, इसलिए लोगों को रेडी टू मूव घर चाहिए। 35 से 70 लाख तक की कीमत वाले फ्लैट लेने कस्टमर आ रहे हैं। लोगों की पसंद विकसित इलाके हैं, डवलपिंग साइट में लोगों का रुझान कम है और यही वजह है कि डवलपर्स भी इसके लिए तैयार हैं।
उम्मीद से ज्यादा: 5 दिन में 45 विजिट, 20 बुकिंग...
शालीमार कॉर्प के जीएम गौरव सक्सेना कहते हैं कि हमने अभी मन्नत प्रोजेक्ट लॉन्च किया है, जहां तक सवाल कस्टमर के रुझान का है तो 38-50 लाख रुपये की कीमत वाले फ्लैटों की जबरदस्त मांग आई है। नवरात्र की शुरुआत से अब तक 40-45 विजिट हमने करवाई हैं और 20 बुकिंग हम ले चुके हैं। ये रुझान बताता है कि कोरोना के कारण कल क्या होगा... जैसी सोच पैदा हुई थी, जो खत्म हो चुकी है और मार्केट फिर से अपनी रफ्तार पकड़ चुका है।
एल्डिको हाउसिंग के सीओओ एसके जग्गी कहते हैं कि नई पीढ़ी किस्त देना बेहतर समझती है किराया देने से। कोविड के बाद ये ट्रेंड ज्यादा बढ़ा है, इसलिए लोगों को रेडी टू मूव घर चाहिए। 35 से 70 लाख तक की कीमत वाले फ्लैट लेने कस्टमर आ रहे हैं। लोगों की पसंद विकसित इलाके हैं, डवलपिंग साइट में लोगों का रुझान कम है और यही वजह है कि डवलपर्स भी इसके लिए तैयार हैं।
उम्मीद से ज्यादा: 5 दिन में 45 विजिट, 20 बुकिंग...
शालीमार कॉर्प के जीएम गौरव सक्सेना कहते हैं कि हमने अभी मन्नत प्रोजेक्ट लॉन्च किया है, जहां तक सवाल कस्टमर के रुझान का है तो 38-50 लाख रुपये की कीमत वाले फ्लैटों की जबरदस्त मांग आई है। नवरात्र की शुरुआत से अब तक 40-45 विजिट हमने करवाई हैं और 20 बुकिंग हम ले चुके हैं। ये रुझान बताता है कि कोरोना के कारण कल क्या होगा... जैसी सोच पैदा हुई थी, जो खत्म हो चुकी है और मार्केट फिर से अपनी रफ्तार पकड़ चुका है।
वृंदावन योजना स्थित कासा ग्रीन
- फोटो : अमर उजाला
अब ऑफर नहीं देखता ग्राहक, उसे सुरक्षित घर का भरोसा चाहिए
कासा ग्रीन के एमडी नवीन गोयल कहते हैं कि ग्राहक छूट या ऑफर की बात करता ही नहीं है। खास कर कोविड के बाद जो लोग खरीदारी करने निकले हैं, उन्हें सिर्फ तैयार घर चाहिए। वृंदावन योजना में कासा ग्रीन्स एग्जाटिका में जिस तरह से लोग रुचि दिखा रहे हैं, वह उम्मीद से कहीं ज्यादा है। हमारे पास मध्यम वर्ग के लिए 40-60 लाख रुपये के फ्लैट हैं। बाजार में एक अंतर देखने में आया है कि लोगों को रेडीटू मूव फ्लैट चाहिए, ज्यादा दिन इंतजार करना कोई नहीं चाहता है।
पिछले नवरात्र के ग्राहक भी बाजार में
अंसल एपीआई के प्रेसीडेंट अरुण मिश्रा कहते हैं कि शुरुआती दौर में मांग धीमी थी। हम एक-दो रजिस्ट्री करवा रहे थे, नवरात्र आते ही ये संख्या 5 से 10 प्रतिदिन के हिसाब से पहुंच गई है। मार्च-अप्रैल के नवरात्र का ग्राहक भी घर खरीदने निकला है। दोगुनी मांग है इस बार। ये रुझान रीयल एस्टेट के लिए वरदान है।
कासा ग्रीन के एमडी नवीन गोयल कहते हैं कि ग्राहक छूट या ऑफर की बात करता ही नहीं है। खास कर कोविड के बाद जो लोग खरीदारी करने निकले हैं, उन्हें सिर्फ तैयार घर चाहिए। वृंदावन योजना में कासा ग्रीन्स एग्जाटिका में जिस तरह से लोग रुचि दिखा रहे हैं, वह उम्मीद से कहीं ज्यादा है। हमारे पास मध्यम वर्ग के लिए 40-60 लाख रुपये के फ्लैट हैं। बाजार में एक अंतर देखने में आया है कि लोगों को रेडीटू मूव फ्लैट चाहिए, ज्यादा दिन इंतजार करना कोई नहीं चाहता है।
पिछले नवरात्र के ग्राहक भी बाजार में
अंसल एपीआई के प्रेसीडेंट अरुण मिश्रा कहते हैं कि शुरुआती दौर में मांग धीमी थी। हम एक-दो रजिस्ट्री करवा रहे थे, नवरात्र आते ही ये संख्या 5 से 10 प्रतिदिन के हिसाब से पहुंच गई है। मार्च-अप्रैल के नवरात्र का ग्राहक भी घर खरीदने निकला है। दोगुनी मांग है इस बार। ये रुझान रीयल एस्टेट के लिए वरदान है।
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तैयार फ्लैट्स
- फोटो : अमर उजाला
30,000 फ्लैट तैयार, 6 महीने में मिल सकता है कब्जा
एलडीए के लिए सर्वे करने वाली एक बड़ी रीयल एस्टेट सलाहकार फर्म के रिकॉर्ड के मुताबिक राजधानी में करीब 30 हजार तैयार मकान हैं, जो बिके नहीं हैं। इनमें से अधिकतर रहने के लिए तैयार हैं। यदि लोग इन्हें खरीदें तो 6 महीने में कब्जा मिल सकता है। इस बीच एलडीए ने फ्लैट निर्माण को प्राथमिकता देना छोड़ कर भूखंड बेचना शुरू किया है। आवास विकास ने भी भूखंड के लिए आवेदन मंगाने शुरू किए हैं।
कारोबारियों से जानिए, क्यों है ये वक्त सबसे अच्छा
इस वक्त लोन पर ब्याज की दर सात फीसदी से भी कम है, इतनी कम दर कभी रही नहीं।
कोविड इंपैक्ट के कारण कीमतें अभी स्थिर हैं, लेकिन इसके बाद अचानक से कीमतों में तेजी आएगी।
छोटे बिल्डरों ने कीमतों में 25 फीसदी तक कमी की है। बड़े बिल्डर पुरानी दरों पर कीमतें लेने का दावा कर रहे हैं।
दो दिन में 1900 से अधिक रजिस्ट्री
राजधानी में 19 और 20 अक्तूबर के आंकड़े देखें तो 1945 भू-संपत्तियों की रजिस्ट्री हुई है। नौ सब रजिस्ट्रार कार्यालयों के आंकड़ों के मुताबिक, बीते मंगलवार को 957 रजिस्ट्री से 14 करोड़ की आय हुई है, जबकि बुधवार को 988 भू-संपत्तियों की रजिस्ट्री से 8.73 करोड़ रुपये का राजस्व आया है।
एलडीए के लिए सर्वे करने वाली एक बड़ी रीयल एस्टेट सलाहकार फर्म के रिकॉर्ड के मुताबिक राजधानी में करीब 30 हजार तैयार मकान हैं, जो बिके नहीं हैं। इनमें से अधिकतर रहने के लिए तैयार हैं। यदि लोग इन्हें खरीदें तो 6 महीने में कब्जा मिल सकता है। इस बीच एलडीए ने फ्लैट निर्माण को प्राथमिकता देना छोड़ कर भूखंड बेचना शुरू किया है। आवास विकास ने भी भूखंड के लिए आवेदन मंगाने शुरू किए हैं।
कारोबारियों से जानिए, क्यों है ये वक्त सबसे अच्छा
इस वक्त लोन पर ब्याज की दर सात फीसदी से भी कम है, इतनी कम दर कभी रही नहीं।
कोविड इंपैक्ट के कारण कीमतें अभी स्थिर हैं, लेकिन इसके बाद अचानक से कीमतों में तेजी आएगी।
छोटे बिल्डरों ने कीमतों में 25 फीसदी तक कमी की है। बड़े बिल्डर पुरानी दरों पर कीमतें लेने का दावा कर रहे हैं।
दो दिन में 1900 से अधिक रजिस्ट्री
राजधानी में 19 और 20 अक्तूबर के आंकड़े देखें तो 1945 भू-संपत्तियों की रजिस्ट्री हुई है। नौ सब रजिस्ट्रार कार्यालयों के आंकड़ों के मुताबिक, बीते मंगलवार को 957 रजिस्ट्री से 14 करोड़ की आय हुई है, जबकि बुधवार को 988 भू-संपत्तियों की रजिस्ट्री से 8.73 करोड़ रुपये का राजस्व आया है।
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अरुण मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
एक-दूसरे की फिक्र करके ही जीतेंगे कोरोना से जंग
कोविड का खतरा टला नहीं है, इसे पूरी तरह से हराने के लिए हम सबको साथ आना होगा। देखने में आ रहा है कि लोग निडर होकर बाहर निकल रहे हैं यह गलत है। रीयल एस्टेट कंपनियों के अधिकारी, कारोबारी राजधानी के लोगों से कोविड प्रोटोकॉल के पालन की अपील कर रहे हैं। अंसल एपीआई के अध्यक्ष अरुण मिश्रा कहते हैं कि ऑफिस से लेकर साइट तक में हम कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। हम अपने हर क्लाइंट की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर प्रयासरत हैं।
कोविड का खतरा टला नहीं है, इसे पूरी तरह से हराने के लिए हम सबको साथ आना होगा। देखने में आ रहा है कि लोग निडर होकर बाहर निकल रहे हैं यह गलत है। रीयल एस्टेट कंपनियों के अधिकारी, कारोबारी राजधानी के लोगों से कोविड प्रोटोकॉल के पालन की अपील कर रहे हैं। अंसल एपीआई के अध्यक्ष अरुण मिश्रा कहते हैं कि ऑफिस से लेकर साइट तक में हम कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। हम अपने हर क्लाइंट की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर प्रयासरत हैं।