नियमित ट्रेन के नंबर में सबसे पहले ‘जीरो’ लगा देने से वह स्पेशल ट्रेन बन जाती है और किराया नियमित से अधिक हो जाता है। रेलवे प्रशासन ने इस जीरो से नियमित ट्रेनों को स्पेशल बनाकर दस महीने में 280 करोड़ से अधिक की कमाई की है।
रेलवे का गणित: ‘जीरो’ जोड़कर नियमित ट्रेनों से कमाए 280 करोड़, पांच सौ रुपये तक ज्यादा खर्च कर रहे यात्री
रेल प्रशासन ने सिर्फ चारबाग स्टेशन से चलने व गुजरने वाली 125 ट्रेनों से 280 करोड़ रुपये की कमाई की है। इसके लिए यात्रियों को जनरल टिकटों पर भी रिजर्वेशन का चार्ज देना पड़ रहा है।
इतना है किराए का अंतर
लखनऊ से मुंबई
श्रेणी नियमित स्पेशल
स्लीपर 570 805
थर्ड एसी 1,490 2,015
सेकेंड एसी 2,135 2,385
लखनऊ से दिल्ली
श्रेणी नियमित स्पेशल
स्लीपर 219 415
एसी 835 1,100
लखनऊ से पटना
श्रेणी नियमित स्पेशल
स्लीपर 315 435
थर्ड एसी 845 1,135
सेकंड एसी 1,205 1,615
लखनऊ से वाराणसी
श्रेणी नियमित स्पेशल
स्लीपर 210 385
थर्ड एसी 560 1,050
सेकेंड एसी 710 1,490
यूटीएस बंद, जनरल टिकटों पर 15 रुपये रिजर्वेशन चार्ज
रेलवे ने अनारक्षित टिकट काउंटर (यूटीएस) बंद कर रखे हैं। जनरल टिकट भी रिजर्वेशन पर मिल रहे हैं, इससे यात्रियों को 15 रुपये अतिरिक्त भुगतान करने पड़ रहे हैं। लखनऊ से कानपुर जाने वाली गाड़ियों में सेकंड सीटिंग क्लास का टिकट बुक कराने पर 75 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है। इसमें 15 रुपये रिजर्वेशन चार्ज है। लखनऊ से वाराणसी की ट्रेन में सेकंड सीटिंग का किराया 120 रुपये, प्रयागराज के लिए 95 रुपये, बरेली का 105 रुपये, हरदोई का 65 रुपये और सहारनपुर का किराया 200 रुपये हो गया है। इनमें रिजर्वेशन चार्ज जुड़ा है।
रेल अफसरों की दलील
रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि जब ट्रेन का रैक नियमित वाला है तो स्पेशल की क्या जरूरत। महंगे किराए के पीछे वजह यह भी है कि रेलवे को 1,98,000 करोड़ रुपये की सालाना आय ट्रेनों से होती है। इसमें 35 हजार करोड़ रुपये यात्री गाड़ियों से आते हैं। कोविड के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह तरीका अपनाया गया है।
