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UP Politics News: यूपी में सपा-भाजपा की जंग के बीच तीसरे मोर्चे की घुसपैठ, सियासतदान बिछाने लगे सियासी गोटियां

चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sun, 25 Jan 2026 08:59 AM IST
सार

यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों का नया मोर्चा बनेगा। सियासतदान सियासी गोटियां बिछाने लगे हैं। पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने इसके लिए अभियान शुरू किया है। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन का कांग्रेस से इस्तीफा अभियान को गति देगा। 

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UP Politics new front of obc Dalits and minorities will be formed in UP before 2027 assembly election
UP Politics News - फोटो : अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी शुरू हो गई है। इस बीच सियासी हवा के झोंके भी आने लगे हैं। सियासतदान गोटियां बिछा रहे हैं। नफा-नुकसान के हिसाब से गोलबंदी हो रही है। इसमें दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का नया मोर्चा तैयार होने लगा है।



बसपा से भाजपा होते हुए साइकिल पर सवार रहे पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य अब नई पार्टी बना चुके हैं। वह अपनी जनता पार्टी के झंडे तले पुराने बसपाइयों को इकट्ठा कर रहे हैं। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद चंद्रशेखर खुद को कांशीराम का सियासी वारिस साबित करने में जुटे हैं। वह महारैली के जरिए दलितों को बसपा छोड़ खुद के साथ जुड़ने की अपील कर रहे हैं।

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पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी - फोटो : अमर उजाला
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भी कांग्रेस का हाथ छोड़कर नए मोर्चे को ताकत देने के संकेत दिए हैं। कभी सपा के साथ रहे जनवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ. संजय चौहान भी बिरादरी के दम पर बांह बटोर रहे हैं। कांग्रेस ने महारैली शुरू कर दी है तो लोकसभा चुनाव परिणाम से उत्साहित सपा पीडीए पंचायत के जरिए जनता के बीच उतरी है।
 
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एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी - फोटो : ANI
आगामी चुनाव के मद्देनजर अभी तक भाजपा और सपा के बीच आमने-सामने की टक्कर मानी जा रही है, लेकिन प्रदेश की सियासत में तीसरा मोर्चा तैयार करने की बेताबी भी साफ दिख रही है। इसके पीछे पिछड़ों, दलितों एवं अल्पसंख्यकों का वोटबैंक हैं। तीसरे मोर्चे को भरोसा है कि वह इस वोटबैंक के दम पर सियासी वैतरणी पार कर लेगा। यह भी कहा जा रहा है कि तीसरे मोर्चे की खिचड़ी का स्वाद बढ़ाने के लिए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी बेचैन हैं।
 
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सांसद चंद्रशेखर आजाद। - फोटो : अमर उजाला।
सूत्रों का यह भी कहना है कि इस मोर्चे में विभिन्न सियासी दलों के वे कद्दावर नेता भी शामिल हो सकते हैं, जो अपनी पार्टी में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। अन्य नेता अभी खुले तौर पर नए मोर्चे पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, लेकिन अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ताल ठोंक रहे हैं। 
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पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य। - फोटो : amar ujala
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उत्तर प्रदेश की सियासत में तीसरे मोर्चे का ही भविष्य है। वह समान विचारधारा वाले दलों के नेताओं के लगातार संपर्क में हैं। अभी तो शुरुआत है जल्द ही इसके परिणाम भी दिखेंगे। वह दावा करते हैं कि खुद को बड़ा दल बताने वाली पार्टियों के दर्जनभर से ज्यादा नेता उनके संपर्क में हैं।
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