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Shardiya Navratri : मां शारदा धाम मैहर; यहां आज भी पहले आल्हा-उदल करते हैं पूजा, नवरात्रि पर देखें ये तस्वीरें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैहर
Published by: तरुणेंद्र चतुर्वेदी
Updated Mon, 22 Sep 2025 07:42 AM IST
सार
Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व को लेकर मां के साधकों और भक्तों में एक अलग ही उत्साह है। इस खास मौके पर चलिए हम आपको बता रहे हैं मध्य प्रदेश के मैहर में स्थित मां के 52 शक्तिपीठों में से एक मां शारदा धाम से जुड़ी कहानी। साथ ही यहां आने वाले भक्तों के लिए स्थानीय प्रशासन ने क्या इंतजाम किए हैं।
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Maa Sharda Dham Maihar : मां शारदा धाम मैहर
- फोटो : अमर उजाला
Maa Sharda Dham Maihar : शारदीय नवरात्रि का आज पहला दिन है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व को लेकर देशभर में एक भक्तिमय माहौल है। सोमवार को नवरात्रि का पहला दिन है। मां के सभी उपासक शक्ति की आराधना में लगे हुए हैं। नौ दिनों तक सभी भक्त इसी रंग में रंगे दिखेंगे। इस विशेष पावन पर्व पर आपको मध्य प्रदेश के मैहर जिले में स्थित शक्तिपीठ की कहानी बता रहे हैं। स्थानीय किंवदंतियों की मानें तो देवी सती का हार यहां गिरा था, इसलिए इसका नाम 'मैहर' पड़ा, जिसका अर्थ 'मां का हार' है।
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नवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेला लगता है
- फोटो : अमर उजाला
मां शारदा का इतिहास और महत्व
मैहर का अर्थ है “मां का हार”। यह पावन धाम सतना मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। समुद्र तल से करीब 600 मीटर ऊंचाई पर विराजमान यह मंदिर देशभर में मां शारदा का एकमात्र मंदिर माना जाता है। मां शारदा देवी के साथ ही पर्वत की चोटी पर श्री काल भैरवी, भगवान हनुमान, देवी काली, दुर्गा, गौरी शंकर, शेष नाग, फूलमती माता, ब्रह्मदेव और जलापा देवी की भी पूजा होती है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर का अस्तित्व 6वीं शताब्दी से है। 1951 में 1080 सीढ़ियों का निर्माण हुआ, जिससे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर तक पहुंचना आसान हो गया। नवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेला लगता है।
मैहर का अर्थ है “मां का हार”। यह पावन धाम सतना मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। समुद्र तल से करीब 600 मीटर ऊंचाई पर विराजमान यह मंदिर देशभर में मां शारदा का एकमात्र मंदिर माना जाता है। मां शारदा देवी के साथ ही पर्वत की चोटी पर श्री काल भैरवी, भगवान हनुमान, देवी काली, दुर्गा, गौरी शंकर, शेष नाग, फूलमती माता, ब्रह्मदेव और जलापा देवी की भी पूजा होती है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर का अस्तित्व 6वीं शताब्दी से है। 1951 में 1080 सीढ़ियों का निर्माण हुआ, जिससे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर तक पहुंचना आसान हो गया। नवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेला लगता है।
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ShaktiPuja : मां शारदा का मनमोहक रूप।
- फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालुओं की आस्था और परंपरा
भक्त अपनी भावनाओं और आस्था के प्रतीक स्वरूप नारियल, चुनरी, सिंदूर, पान-सुपारी, कपूर और श्रृंगार सामग्री अर्पित करते हैं। मान्यता है कि मां शारदा अपने दरबार में आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
भक्त अपनी भावनाओं और आस्था के प्रतीक स्वरूप नारियल, चुनरी, सिंदूर, पान-सुपारी, कपूर और श्रृंगार सामग्री अर्पित करते हैं। मान्यता है कि मां शारदा अपने दरबार में आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
Maa Sharda Dham Maihar : त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा, मनमोहक दृश्य।
- फोटो : अमर उजाला
खास है आल्हा की कहानी
लोककथाओं के अनुसार मां शारदा के परम भक्त आल्हा सबसे पहले दर्शन करते हैं और प्रतिदिन ताजे कमल के फूल अर्पित करते हैं। मंदिर के नीचे कछ दूरी पर आल्हा तालाब भी है, ऐसा कहा जाता है कि यहां स्नान करने के बाद आल्हा और उदल मां की आराधना करने जाते थे। दोनों मां शारदा के परम भक्त थे।
लोककथाओं के अनुसार मां शारदा के परम भक्त आल्हा सबसे पहले दर्शन करते हैं और प्रतिदिन ताजे कमल के फूल अर्पित करते हैं। मंदिर के नीचे कछ दूरी पर आल्हा तालाब भी है, ऐसा कहा जाता है कि यहां स्नान करने के बाद आल्हा और उदल मां की आराधना करने जाते थे। दोनों मां शारदा के परम भक्त थे।
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Navrati 2025 : मैहर स्थित मां शारदा धाम के दर्शन के लिए कतारों में खड़े भक्तगण।
- फोटो : अमर उजाला
मुस्तैद प्रशासन
लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कई विशेष कदम उठाए हैं।
लगभग 600 से अधिक पुलिस बल की तैनाती
वरिष्ठ अधिकारियों की ड्यूटी मंदिर और मेला क्षेत्र में
मार्ग और गर्भगृह तक सैकड़ों CCTV कैमरों से निगरानी
VIP दर्शन पर रोक, सभी भक्त सामान्य लाइन से दर्शन करेंगे
मेला क्षेत्र में वाहनों की एंट्री बंद, केवल ई-रिक्शा की सुविधा
लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कई विशेष कदम उठाए हैं।
लगभग 600 से अधिक पुलिस बल की तैनाती
वरिष्ठ अधिकारियों की ड्यूटी मंदिर और मेला क्षेत्र में
मार्ग और गर्भगृह तक सैकड़ों CCTV कैमरों से निगरानी
VIP दर्शन पर रोक, सभी भक्त सामान्य लाइन से दर्शन करेंगे
मेला क्षेत्र में वाहनों की एंट्री बंद, केवल ई-रिक्शा की सुविधा

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