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एमपी का सोमनाथ: महाशिवरात्रि पर भोजपुर में लगी श्रद्धालुओं की कतार, फूलों से सजा देश का सबसे बड़ा शिवलिंग

Tue, 01 Mar 2022 02:12 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायसेन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायसेन Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Tue, 01 Mar 2022 02:12 PM IST
सार

एमपी का सोमनाथ: महाशिवरात्रि पर भोजपुर में लगी श्रद्धालुओं की कतार, फूलों से सजा देश का सबसे बड़ा शिवलिंग

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MP's Somnath: Devotees queue up in Bhojpur on Mahashivratri, country's largest Shivling decorated with flowers
महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजपुर पहुंचे - फोटो : अमर उजाला

मध्य प्रदेश के सोमनाथ के रूप में प्रसिद्ध रायसेन जिले के भोजपुर शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर एक अलग ही रौनक नजर आ रही है। मंदिर में महाशिवरात्रि की भव्य तैयारियां की गई हैं। तड़के 4 बजे से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के चलते लगे प्रतिबंधों के हटने से महाशिवरात्रि के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। 

फूलों से की गई आकर्षक साज सज्जा 
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में विशेष साज-सज्जा की गई है। शिवलिंग को फूलों से सजाया गया। है। 10 वीं सदी के इस प्राचीन शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर मेले का आयोजन किया गया है। बड़ी संख्या में भक्त भगवान शिव की पूजा और अभिषेक करने के लिए भोजपुर पहुंच रहे हैं। 

 
MP's Somnath: Devotees queue up in Bhojpur on Mahashivratri, country's largest Shivling decorated with flowers
महाशिवरात्रि के मौके पर शिवलिंग को फूलों से आकर्षक सजाया गया - फोटो : अमर उजाला

दो साल बाद बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
बीते दो सालों से कोरोना का साया हर पर्व और त्यौहार पर था, लेकिन इस साल प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामलों में गिरावट आने के बाद सीएम शिवराज ने सभी तरह के प्रतिबंध हटा दिए हैं। दो साल बाद महाशिवरात्रि के मौके पर भोजपुर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा है। 

तीन दिवसीय महोत्सव का आयोजन
मंदिर में तीन दिवसीय भोजपुर महोत्सव का आयोजन किया गया है। जो कि 3 मार्च तक चलेगा। आज शिवरात्रि के मौके पर महोत्सव का आगाज किया जाएगा। महोत्सव में लोक संगीत, नृत्य का आयोजन किया जाएगा। 


 
MP's Somnath: Devotees queue up in Bhojpur on Mahashivratri, country's largest Shivling decorated with flowers
महाशिवरात्रि के मौके पर पूजा करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

दूर-दूर से भोजपुर पहुंचते हैं श्रद्धालु
रायसेन जिले में बना ये शिव मंदिर देश के सबसे बड़े शिव मंदिर के रूप में जाना जाता है। इस मंदिर को देखने के लिए सिर्फ मध्य प्रदेश के ही नहीं बल्कि देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। 

मंदिर आने वाले पर्यटक मंदिर के भव्य स्वरूप और वास्तुकला को देखकर हतप्रभ रह जाते हैं। मंदिर का हर कोना खूबसूरत नक्काशियों से सजा है। गुम्बद और खंभों पर की गई जटिल संरचनाएं, नक्काशीदार झरोखे इसकी सुंदरता को बढ़ा देते हैं। करीने और उत्कृष्टता से गढ़ी गई आकृतियां देखने वालों का मन मोह लेती हैं। 

 
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MP's Somnath: Devotees queue up in Bhojpur on Mahashivratri, country's largest Shivling decorated with flowers
10 वीं सदी में हुआ था भोजपुर शिव मंदिर का निर्माण - फोटो : अमर उजाला

एक पहेली है मंदिर का निर्माण
भोजपुर मंदिर की भव्यता को देखकर यहां पहुंचने वाले लोगों के मन में एक ही सवाल आता है। वह सवाल है कि हजारों सालों पहले बिना मशीनों के इस मंदिर का निर्माण कैसे किया गया होगा। मंदिर की वास्तुकला बेहद अद्भुत है। बालकनियों को विशाल कोष्ठक और खंभों का सहारा दिया गया है। मंदिर की बाहरी दीवारों और ढांचे को बनाया नहीं गया। मंदिर को गुंबद के स्तर तक बढ़ाने के लिए उस दौर में मिट्टी के रैम्प का इस्तेमाल किया गया था, जो कि अभी तक दिखाई पड़ता है। इस मंदिर के निर्माण में पुरातन बुद्धिमत्ता दिखाई देती है। 

बलुआ पत्थर से बना है मंदिर
भोजपुर शिव मंदिर का निर्माण बलुआ पत्थरों की रिज से किया गया है, जो कि मध्य भारत की विशेषता है। 11 वीं सदी का यह मंदिर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। बेतवा नदी के किनारे बने इस मंदिर में पुरातन आकर्षण के कई अवशेष देखने को मिलते हैं। 

 
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MP's Somnath: Devotees queue up in Bhojpur on Mahashivratri, country's largest Shivling decorated with flowers
भोजपुर को मप्र का सोमनाथ भी कहा जाता है - फोटो : अमर उजाला

प्रशासन और पुरातत्व  विभाग करता है देखभाल
राजा भोज द्वारा निर्मित 10 वीं सदी के इस मंदिर की देखभाल प्रशासन और पुरातत्व विभाग के द्वारा की जाती है। मंदिर के निर्माण को लेकर ये किंवदंती भी प्रचलित है कि इसका निर्माण पांडवों ने एक रात में किया था। मंदिर में 11वीं से 13 वीं सदी के बीच की नक्काशी और वास्तुकला देखने को मिलती है। हालांकि इस मंदिर का निर्माण अधूरा है। 

 
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