{"_id":"6a4b18d32e8af6a2080cdbb1","slug":"who-is-erling-haaland-the-story-behind-norway-goal-machine-who-ended-neymar-and-brazil-s-fifa-world-cup-dream-2026-07-06","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"कौन हैं एर्लिंग हालंद?: ब्राजील का सपना तोड़ने वाला गोल मशीन...जिसने पिता का अधूरा सपना पूरा किया; पढ़ें कहानी","category":{"title":"Football","title_hn":"फुटबॉल","slug":"football"}}
कौन हैं एर्लिंग हालंद?: ब्राजील का सपना तोड़ने वाला गोल मशीन...जिसने पिता का अधूरा सपना पूरा किया; पढ़ें कहानी
Mon, 06 Jul 2026 08:24 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मियामी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मियामी
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 06 Jul 2026 08:24 AM IST
सार
फीफा विश्व कप 2026 के प्री-क्वार्टर फाइनल में एर्लिंग हालंद ने दो गोल दागकर पांच बार की चैंपियन ब्राजील को 2-1 से हराया और नॉर्वे को इतिहास में पहली बार विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया। इस जीत के साथ हालंद के विश्व कप में चार मैचों में सात गोल हो गए हैं। छोटे से कस्बे ब्रायने से निकलकर विश्व फुटबॉल का सबसे बड़ा सितारा बनने वाले हालंद की कहानी संघर्ष, अनुशासन और पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने की मिसाल है।
विज्ञापन
हालंद
- फोटो : FIFA.com
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जब भी विश्व फुटबॉल में बड़े उलटफेरों की बात होगी तो फीफा विश्व कप 2026 में ब्राजील के खिलाफ एर्लिंग हालंद का प्रदर्शन जरूर याद किया जाएगा। पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील के सामने नॉर्वे को ज्यादा लोग दावेदार नहीं मान रहे थे, लेकिन हालंद ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मैच बड़े खिलाड़ी ही जीता दिलाते हैं।
हालंद
- फोटो : ANI
ब्राजील के खिलाफ मैच में किया कमाल
- मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ 16 मुकाबले में लंबे समय तक ब्राजील ने गेंद पर कब्जा बनाए रखा, लेकिन नॉर्वे का डिफेंस चट्टान बना रहा।
- फिर 79वें मिनट में एर्लिंग हालंद ने एंड्रियास शेल्डेरुप के क्रॉस पर जोरदार हेडर लगाकर गोल किया। ब्राजील संभल पाता, उससे पहले ही हालंद ने 90वें मिनट में दूसरा गोल दाग दिया।
- इंजरी टाइम में नेमार ने पेनल्टी से एक गोल जरूर किया, लेकिन तब तक मुकाबला नॉर्वे की झोली में जा चुका था।
- इसी जीत ने नॉर्वे को इतिहास में पहली बार विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया, जबकि ब्राजील का सपना टूट गया और नेमार ने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास का एलान कर दिया।
- हालंद का यह पहला विश्वकप है और वह किसी दिग्गज की तरह खेल रहे हैं।
हालंद और नॉर्वे टीम
- फोटो : FIFA.COM
एक कहानी जो हालंद दमखम का एहसास कराती है
छोटे कस्बे का लड़का, जिसने दुनिया जीत ली
आज दुनिया हालंद को गोल मशीन कहती है। डिफेंडर उनका नाम सुनकर घबरा जाते हैं, लेकिन एर्लिंग हालंद की कहानी किसी बड़े शहर या नामी फुटबॉल अकादमी से शुरू नहीं हुई थी। उनका बचपन नॉर्वे के छोटे से कस्बे ब्रायने में बीता, जहां फुटबॉल जुनून था, कारोबार नहीं।
बचपन में हालंद न तो इतने लंबे थे और न ही शारीरिक रूप से इतने मजबूत। उन्होंने सबसे पहले अपनी तकनीक, स्पीड और गेंद पर नियंत्रण को बेहतर बनाया। किशोरावस्था में अचानक लंबाई और ताकत बढ़ी तो वही खिलाड़ी दुनिया के सबसे खतरनाक स्ट्राइकरों में बदल गया।
- तारीख थी 30 मई, 2019। पोलैंड का लुब्लिन स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था। फीफा अंडर-20 विश्वकप ग्रुप स्टेज के एक करो या मरो फुटबॉल मुकाबले में नॉर्वे का सामना होंडुरास से था।
- नॉर्वे को एक बड़ी जीत की दरकार थी। इसी दबाव के बीच, टीम के साथ एक करीब 18 साल का लंबा, गठीले बदन वाला स्ट्राइकर मैदान में उतरा। खेल के सातवें मिनट में ही उसने गोल दाग दिया।
- विरोधी डिफेंडर्स हर बार उसे रोकने की नई तरकीबें अपनाते, लेकिन वह अपनी रफ्तार और बेमिसाल फिनिशिंग के दम पर हर कोशिश नाकाम कर देता।
- पहले हाफ तक मिली चार पेनल्टी को गोल में बदलकर उसने नॉर्वे को 5-0 की एकतरफा बढ़त दिला दी। जब दूसरा हाफ शुरू हुआ, तो विरोधी टीम की मुश्किलें और बढ़ गईं।
- वह एक के बाद एक बेहतरीन गोल करता गया। जब खेल खत्म हुआ, तब तक नॉर्वे ने 12-0 की अजेय बढ़त बना ली थी। इनमें से अकेले नौ गोल उसी खिलाड़ी के नाम थे।
- दिलचस्प यह है कि फीफा अंडर-20 विश्वकप के इतिहास में यह कारनामा आज तक कोई और नहीं दोहरा सका है। आज वही लड़का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नॉर्वे की राष्ट्रीय टीम के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाला खिलाड़ी बन चुका है। उसका नाम है- एर्लिंग हालंद।
छोटे कस्बे का लड़का, जिसने दुनिया जीत ली
आज दुनिया हालंद को गोल मशीन कहती है। डिफेंडर उनका नाम सुनकर घबरा जाते हैं, लेकिन एर्लिंग हालंद की कहानी किसी बड़े शहर या नामी फुटबॉल अकादमी से शुरू नहीं हुई थी। उनका बचपन नॉर्वे के छोटे से कस्बे ब्रायने में बीता, जहां फुटबॉल जुनून था, कारोबार नहीं।
बचपन में हालंद न तो इतने लंबे थे और न ही शारीरिक रूप से इतने मजबूत। उन्होंने सबसे पहले अपनी तकनीक, स्पीड और गेंद पर नियंत्रण को बेहतर बनाया। किशोरावस्था में अचानक लंबाई और ताकत बढ़ी तो वही खिलाड़ी दुनिया के सबसे खतरनाक स्ट्राइकरों में बदल गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
एर्लिंग हालंद और उनके पिता
- फोटो : FIFA.COM
परिवार और बच्चे
इसी 21 तारीख को 26 साल के होने जा रहे हालंद का जन्म लीड्स, इंग्लैंड में हुआ था। जब वह तीन साल के थे, तब उनका परिवार नॉर्वे के शहर ब्राइन में जाकर बस गया था। उनके पिता अल्फ-इंगे हालंद पूर्व पेशेवर फुटबॉलर रहे हैं। उनकी मां ग्री मारिटा ब्रॉट एक एथलीट थीं और नॉर्वे की हेप्टाथलॉन (सात स्पर्धाओं वाली एथलेटिक्स प्रतियोगिता) चैंपियन रह चुकी हैं, जबकि दादा मशहूर धावक थे। हालंद ने पांच साल की उम्र में ब्राइन एफके की अकादमी से फुटबॉल की शुरुआत की और बाद में इसी क्लब से अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। वह इसाबेल हौगसंग जोहानसेन के साथ रिश्ते में हैं और दिसंबर 2024 में दोनों एक बेटे के माता-पिता बने।
पिता का अधूरा सपना, बेटे की सबसे बड़ी प्रेरणा
एर्लिंग के पिता अल्फी हालंद भी नॉर्वे के लिए फुटबॉल खेल चुके हैं और 1994 विश्व कप टीम का हिस्सा रहे थे। बचपन से एर्लिंग ने पिता से विश्व कप की कहानियां सुनीं। यही वजह रही कि जब उन्हें पहली बार विश्व कप खेलने का मौका मिला तो वह सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए मैदान में उतरे।
इसी 21 तारीख को 26 साल के होने जा रहे हालंद का जन्म लीड्स, इंग्लैंड में हुआ था। जब वह तीन साल के थे, तब उनका परिवार नॉर्वे के शहर ब्राइन में जाकर बस गया था। उनके पिता अल्फ-इंगे हालंद पूर्व पेशेवर फुटबॉलर रहे हैं। उनकी मां ग्री मारिटा ब्रॉट एक एथलीट थीं और नॉर्वे की हेप्टाथलॉन (सात स्पर्धाओं वाली एथलेटिक्स प्रतियोगिता) चैंपियन रह चुकी हैं, जबकि दादा मशहूर धावक थे। हालंद ने पांच साल की उम्र में ब्राइन एफके की अकादमी से फुटबॉल की शुरुआत की और बाद में इसी क्लब से अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। वह इसाबेल हौगसंग जोहानसेन के साथ रिश्ते में हैं और दिसंबर 2024 में दोनों एक बेटे के माता-पिता बने।
पिता का अधूरा सपना, बेटे की सबसे बड़ी प्रेरणा
एर्लिंग के पिता अल्फी हालंद भी नॉर्वे के लिए फुटबॉल खेल चुके हैं और 1994 विश्व कप टीम का हिस्सा रहे थे। बचपन से एर्लिंग ने पिता से विश्व कप की कहानियां सुनीं। यही वजह रही कि जब उन्हें पहली बार विश्व कप खेलने का मौका मिला तो वह सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए मैदान में उतरे।
विज्ञापन
हालंद और नॉर्वे टीम
- फोटो : FIFA.COM
रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे हैं हालंद
ब्राजील के खिलाफ दो गोल करने के बाद एर्लिंग हालंद का रिकॉर्ड और भी शानदार हो गया है। उन्होंने विश्व कप 2026 में अब तक सिर्फ चार मैचों में सात गोल दागे हैं और गोल्डन बूट की दौड़ में संयुक्त बढ़त पर पहुंच गए हैं। इतना ही नहीं, वह लगातार 14 प्रतिस्पर्धी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में गोल करने का कारनामा कर चुके हैं, जिसमें उनके नाम 27 गोल दर्ज हैं।
नॉर्वे के लिए अब तक 54 मैचों में उनके 62 गोल हो चुके हैं। एक और दिलचस्प आंकड़ा यह है कि जब-जब हालंद गोल करते हैं, नॉर्वे की जीत लगभग तय हो जाती है। उनके गोल वाले मुकाबलों में टीम लगातार 17 मैच जीत चुकी है और इस दौरान उन्होंने अकेले 31 गोल किए हैं।
ब्राजील के खिलाफ दो गोल करने के बाद एर्लिंग हालंद का रिकॉर्ड और भी शानदार हो गया है। उन्होंने विश्व कप 2026 में अब तक सिर्फ चार मैचों में सात गोल दागे हैं और गोल्डन बूट की दौड़ में संयुक्त बढ़त पर पहुंच गए हैं। इतना ही नहीं, वह लगातार 14 प्रतिस्पर्धी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में गोल करने का कारनामा कर चुके हैं, जिसमें उनके नाम 27 गोल दर्ज हैं।
नॉर्वे के लिए अब तक 54 मैचों में उनके 62 गोल हो चुके हैं। एक और दिलचस्प आंकड़ा यह है कि जब-जब हालंद गोल करते हैं, नॉर्वे की जीत लगभग तय हो जाती है। उनके गोल वाले मुकाबलों में टीम लगातार 17 मैच जीत चुकी है और इस दौरान उन्होंने अकेले 31 गोल किए हैं।