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बीहड़ के 'दशरथ मांझी': चंबल की बाढ़ में घिरे तो टीलों को काटकर बना डाला चार किमी का रास्ता

न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 07 Aug 2021 10:53 AM IST
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agra villagers made a way by cutting the mud dunes as dashrath manjhi
युवकों ने टीलों को काटकर बनाया रास्ता - फोटो : अमर उजाला

बिहार के 'माउंटेन मैन' दशरथ मांझी की कहानी तो जानते ही होंगे, जिन्होंने अपनी दृढ़ता और मेहनत से पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया। कुछ ऐसी ही कहानी आगरा जिले के पुराशिवलाल और पुराडाल गांव के ग्रामीणों की है, जिन्होंने बीहड़ के ऊंच-ऊंचे टीलों को काटकर रास्ता बनाया है। दरअसल, बीहड़ में बसे ये दोनों गांव चंबल नदी की बाढ़ से घिर गए थे। गांव से निकलने का कोई रास्ता नहीं था और कोई भी मदद ग्रामीणों तक नहीं पहुंच रही थी। ऐसे में दोनों गांवों के 35-40 युवक 'दशरथ मांझी' बन गए। उन्होंने कुदाल उठाई और बीहड़ के टीलों को काटकर करीब चार किलोमीटर का रास्ता बना लिया। अगली स्लाइड्स में पढ़िए इन ग्रामीणों के जोश, जज्बे और जुनून की कहानी.... 




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चंबल में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला
पिनाहट क्षेत्र में इन दिनों चंबल नदी उफान बह रही है, जिससे बाह तहसील के कई गांव बाढ़ से घिर हुए हैं। कई गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से घर और स्कूल डूब गए हैं। यहां के लोग परिवार सहित बीहड़ के टीलों पर रहने को मजबूर हैं। प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। 
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चंबल की बाढ़ में घिरा गांव - फोटो : अमर उजाला
गांव पुराशिवलाल और पुराडाल का संपर्क तहसील मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है। बीहड़ के ऊंचे-ऊंचे टीलों और रास्ता न होने के कारण इन गांवों तक कोई मदद नहीं पहुंच पा रही थी। न ही यहां के ग्रामीण निकल पा रहे थे। ऐसे में दोनों गांवों के युवकों ने रास्ता बनाने की ठानी और कुदाल उठाकर बीहड़ में पहुंच गए। 
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युवकों ने टीलों को काटकर बनाया रास्ता - फोटो : अमर उजाला
35-40 युवकों ने कुदाल से बीहड़ के टीलों का काटकर करीब चार किमी का रास्ता बना लिया है। इस पगडंडी के सहारे जरूरत को पूरा करने में मदद मिल रही है। गांव के अमर सिंह, कोक सिंह, हम्पी, उपेंद्र, दयाशंकर, रामदत्त, अमन, नीरज, मूलचंद, रामकिशोर, भारत आदि ने दो दिन पसीना बहाकर रास्ता बनाया है। उनकी मेहनत और प्रयास की आसपास के इलाकों में भी लोग चर्चा कर रहे हैं। 
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बाढ़ के कारण टीलों पर रहने को मजबूर ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
गांव भगवानपुरा, गुढ़ा, झरनापुरा, उमरैठापुरा, क्योरीपुरा आदि गांवों के लोगों ने बीहड़ में बस्ती बसा ली है। बीहड़ की बस्ती में खाने, पीने की जरूरतों के अलावा पशुओं के भूसा, दाने के लाले पड़ गए हैं। शुक्रवार को नदी का जलस्तर घटने पर इन गांवों के लोग भूसा, दाने आदि के लिए जान जोखिम में डालने को मजबूर हो गए हैं।      
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