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इस लोकसभा सीट से शुरू हुई थी उपाध्याय परिवार की 'बगावत', कभी मायावती के बेहद खास थे रामवीर
Tue, 21 May 2019 04:57 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 21 May 2019 04:57 PM IST
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रामवीर उपाध्याय और मायावती (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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मायावती ने पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय को पार्टी से निलंबित कर दिया। ये प्रक्रिया चुनाव बाद हुई। लेकिन, इसकी पटकथा लोकसभा चुनाव से पहले फतेहपुरसीकरी सीट से रख गई थी। इस सीट पर मायावती ने पूर्व मंत्री की पत्नी सीमा उपाध्याय को प्रत्याशी बनाया था। लेकिन, नामांकन प्रक्रिया के दौरान सीमा के सुर 'बागी' हो गए और उन्होंने सीट छोड़ दी। इसके बाद भाजपा प्रत्याशी के लिए उन्होंने अलीगढ़ में खुले मंच से जीत की अपील कर दी।
रामवीर उपाध्याय और सीमा उपाध्याय (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
रामवीर उपाध्याय पर निलंबन की कार्रवाई हुई। लेकिन, पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय और उनकी पत्नी अभी भी बसपा में हैं। सीमा उपाध्याय ने बसपा की टिकट से फतेहपुरसीकरी से लोकसभा चुनाव जीता था। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को हार की पटखनी देकर सीमा उपाध्याय संसद पहुंचीं।
रामवीर उपाध्याय
- फोटो : अमर उजाला
2009 के चुनाव में सीमा उपाध्याय ने 2,09,466 मत प्राप्त किए। वहीं कांग्रेस से राजबब्बर को 1,99,530 मत मिले। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी तीसरे स्थान पर रही। भाजपा से राजा महेंद्र अरिदमन सिंह ने 1,54,373 मत हासिल किए। समाजवादी पार्टी से रघुराज सिंह शाक्य 1,09,240 मत लेकर चौथे स्थान पर रहे।
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रामवीर उपाध्याय
- फोटो : अमर उजाला
रामवीर उपाध्याय बसपा में रसूखदार नेता के तौर पर जाने जाते थे। पार्टी के फैसलों में उनकी रायशुमारी की जाती थी। मायावती ने उन्हें शासनकाल में ऊर्जा मंत्री का महत्वपूर्ण पद सौंपा था। रामवीर उपाध्याय ने आगरा, फतेहपुरसीकरी और आसपास के क्षेत्रों में नीले खेमे का वर्चस्व कई साल तक कायम रखा।
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रामवीर उपाध्याय (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
रामवीर उपाध्याय के निलंबन के बाद आगरा स्थित शास्त्रीपुरम पर उनके समर्थकों का जमावड़ा लगा। लेकिन, यहां पूर्व मंत्री मौजूद नहीं थे। सूत्र बताते हैं कि बुधवार को रामवीर उपाध्याय प्रेसवार्ता कर कई अहम राज का खुलासा करेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले उनके भाई मुकुल उपाध्याय पर बसपा ने निलंबन की कार्रवाई की थी। जिसके बाद मुकुल ने बसपा छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था।