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पिता के पिंडदान के बाद वृद्घाश्रम छोड़ा, अब बेटा फोन पर पूछ रहा 'मां कैसे करें श्राद्घ'
Fri, 27 Sep 2019 01:36 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 27 Sep 2019 01:36 PM IST
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नीलम भाटिया
- फोटो : अमर उजाला
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पितृपक्ष में पूर्वजों का तर्पण करने से पहले ही बेटों ने मां-बाप का त्याग कर दिया। उन्हें वृद्घाश्रम में धकेल दिया। आगरा के रामलाल वृद्घाश्रम में ऐसे कई मां-बाप हैं जो आज पूर्वजों को जल देने के लिए तरस रहे हैं। ऐसी ही एक महिला है दिल्ली निवासी नीलम भाटिया। उनके बेटों ने पितृपक्ष पर फोन पर पूछा कि मां पिता का श्राद्घ कैसे करें। जिसे सुनकर वे बहुत भावुक हुईं।
नीलम भाटिया
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली निवासी नीलम भाटिया ने बताया कि बेटे ने पिता की मृत्यु के बाद उन्हें आश्रम में छोड़ दिया था। पितृ पक्ष में याद आया कि पिता का श्राद्ध करना चाहिए उसके लिए भी बेटा मां को लेने नहीं आया। फोन पर ही मां से पूछ लिया कैसे करें पिता का श्राद्ध। उनका कहना था कि कभी सोचा भी नहीं था कि पति के श्राद्ध पर भी बेटा नहीं लेने आएगा।
रामलाल वृद्धाश्रम में रहने वाले वृद्ध
- फोटो : अमर उजाला
बल्केश्वर के दंपति मीरा देवी (60) और ओमप्रकाश (62) ने बताया कि हाल में बेटा आश्रम आया था, यहां साड़ियां और मिठाइयां बांटकर चला गया। उसने हमसे बात तक नहीं की। मैं तो पिता हूं मगर उसकी मां पूरी रात सो नहीं सकी। कहती रही कि जिस बेटे के लिए इतना कुछ किया आज उसी बेटे ने माता-पिता से मिलने की भी जरूरत महसूस नहीं की। कमला नगर निवासी अतुल शर्मा, माउंट आबू की रहने वाली लता कपूर के घरवाले भी पितृपक्ष में आश्रम में आकर बुजुर्गों को कपड़े व फल वितरित करके चले गए मगर उन्हें घर लेकर नहीं गए।
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रामलाल वृद्धाश्रम आगरा
- फोटो : अमर उजाला
श्राद्ध पक्ष में भी बेटे अपने माता पिता को वृद्धाश्रम छोड़ने पहुंच रहे बेटे हैं। मंगलवार को रामलाल वृद्धाश्रम में तीन बुजुर्गों समेत चार लोगों ने आश्रय लिया। दुर्गा प्रसाद (68) निवासी सीतानगर रामबाग, भगवान दास (77) लक्ष्मी नगर जगदीशपुरा, राधा रमन, दुर्गा प्रसाद (66) कानपुर के रहने वाले बुजुर्गों को बेटों ने घर से निकाल दिया। जिसकी वजह से जबूरी में उन्हें आश्रम में आश्रय लेना पड़ा। देवरी रोड, सदर की निवासी सुमन सोनी (37) को उसके पति और देवर ने उत्पीड़न करके निकाल दिया।
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नीलम भाटिया (पति मुकेश भाटिया का फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
नीलम भाटिया कहती हैं कि पति की मौत के बाद अब तो बस मुझे भी मौत का ही इंतजार है। मुकेश भाटिया ने प्रबंधन पर 12 किताबें लिखी थीं और 20 से ज्यादा रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए थे। मुकेश भाटिया ने दुबई में भी प्रबंधन का ज्ञान बांटा था। दिल्ली के मुकेश भाटिया को पत्नी नीलम भाटिया के साथ बेटे ने घर से निकाल दिया। उनकी पत्नी नीलम भी एमबीए हैं।