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आगरा में दरोगा की हत्या: घर में इकलौते बेटे थे प्रशांत यादव, पत्नी और मां का चीत्कार सुनकर पुलिसकर्मियों के निकले आंसू
Thu, 25 Mar 2021 08:10 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 25 Mar 2021 08:10 AM IST
सार
- पत्नी और मां का फट पड़ा कलेजा
- पुलिसकर्मियों के भी निकले आंसू
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आगरा में विलाप करता दरोगा का परिवार और प्रशांत का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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दरोगा प्रशांत यादव की मौत की जानकारी पर पत्नी रेनू और मां गायत्री सीएचसी खंदौली पहुंच गईं। पति की लाश देखकर पत्नी बेहोश होकर गिर गईं। वहीं मां बेसुध हो गईं। पत्नी होश में आने पर फूट-फूटकर रो रही थीं। चार साल का बेटा मासूम पार्थ कभी मां की तरफ जाता तो कभी दादी की तरफ। वह समझ नहीं पा रहा था आखिर पिता कहां चले गए? यह दृश्य देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के भी आंसू निकल गए।
घटनास्थल पर पुलिस के आला अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि खंदौली के गांव नहर्रा में बुधवार शाम को थाना के दरोगा प्रशांत कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दरोगा प्रशांत कुमार दो भाई विश्वनाथ और शिवनाथ के बीच खेत से आलू खोदाई को लेकर विवाद चल रहा था। झगड़े की सूचना पर दरोगा सिपाही चंद्रसेन के साथ आए थे। तभी विश्वनाथ को पकड़ने लगे। उसने तमंचे से गोली मार दी।। घटना के बाद आरोपी भाग निकला। पुलिस ने बताया कि गांव नहर्रा निवासी विजय सिंह पहलवान के दो बेटो विश्वनाथ और शिवनाथ के बीच खेत को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा है। विजय सिंह ने पत्नी को छोड़ रखा है। बड़ा बेटा शिवनाथ पिता के साथ रहता है। वहीं छोटा विश्वनाथ मां के साथ रहता है। विजय के खेत के तीन हिस्से हुए हैं। एक हिस्सा विजय के पास है। इस पर शिवनाथ ने खेत में आलू की फसल की थी।
प्रशांत का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
मूलरूप से बुलंदशहर के रहने वाले प्रशांत यादव के पिता रमेश यादव का ट्रांसपोर्ट का काम था। प्रशांत जब आठ साल के थे, तब पिता की मौत हो गई। मां गायत्री और बहन अलका की जिम्मेदारी उन पर ही थी। दरोगा बनने के बाद वह सभी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी शादी रेनू से हुई थी। उनका बेटा चार साल का पार्थ है। आगरा में तैनाती मिलने के बाद वह आवास विकास कालोनी में किराये पर रह रहे थे। शाम को पुलिस ने परिवार के लोगों को बताया। तभी मां, पत्नी बेटे के साथ पहुंची। पत्नी रेनू बेहोश हो गई और मां गायत्री बेसुध हो गईं। मां रोये जा रही थीं। वह बार-बार एक ही बात कह रही थीं बेटे तुम कहां चले गए, तुम ही तो मेरा सहारा थे। अब किसे बेटा कहकर पुकारूंगी। वहीं पत्नी रेनू जब भी होश में आती, रोने लगती। उन्हें महिला पुलिसकर्मी किसी तरह संभाल रही थीं। बेटा पार्थ समझ नहीं पा रहा था आखिर पिता कहां चले गए हैं। वह मां और दादी के पास जाकर खुद भी रोने लगता। यह देखकर सीएचसी पर मौजूद पुलिसकर्मियों की आंखें भी नम हो गईं। परिजनों ने बताया कि प्रशांत ने दोपहर में ही पत्नी और मां से बात की थी। रात में समय पर आने के लिए कहा था। बेटा पिता को याद करे जा रहा था।
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आगरा में विलाप करता दरोगा का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
बुलंंदशहर के छतारी के रहने वाले प्रशांत कुमार यादव वर्ष 2011 बैच के सिपाही थे। वर्ष 2015 में दरोगा की सीधी भर्ती निकलने पर प्रशांत परीक्षा में बैठ गए थे। प्रशांत भर्ती परीक्षा में सफल होने के बाद वह सीधे दरोगा बने थे। प्रशिक्षण के दौरान भर्ती पर स्टे लग गया था। इस कारण उन्हें आठ महीने तक घर पर रहना पड़ा। वह साथियों के संपर्क में रहते थे। उन्होंने सभी को प्रतीक्षा रखने के लिए कहा था। अगस्त 2017 में प्रशांत यादव और उनके बैच के 150 दरोगा को पहली तैनाती आगरा में मिली थी। कुछ समय पहले थाना हरीपर्वत में तैनात थे। उनको पालीवाल चौकी प्रभारी बनाया गया था। उनका तबादला खंदौली हो गया था। उनके साथियों ने बताया कि दरोगा प्रशांत अपने बैच के सभी साथियों में अलग स्वभाव के थे। हमेशा शांत रहते थे। वह लोगों के बीच घुलमिलकर समस्या का समाधान करते थे।
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आगरा पुलिस (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
...तो नहीं दी थी शहादत की जानकारी
प्रशांत की शहादत की जानकारी परिजनों को देने की हिम्मत कोई पुलिसकर्मी नहीं कर पा रहा था। सब यही सोच रहे थे कि पत्नी और मां को क्या बताएंगे। उन्हें कौन संभालेगा। बच्चा क्या करेगा। यही सोच में पुलिसकर्मी काफी देर तक डूबे रहे।
कोराेना काल में की थी मदद
दरोगा प्रशांत यादव कोरोना काल में सदर और हरीपर्वत थाना में तैनात थे। तब वह लोगों की मदद के लिए आगे आए थे। जरूरतमंद लोगों तक खाना पहुंचाने में आगे रहते थे।
प्रशांत की शहादत की जानकारी परिजनों को देने की हिम्मत कोई पुलिसकर्मी नहीं कर पा रहा था। सब यही सोच रहे थे कि पत्नी और मां को क्या बताएंगे। उन्हें कौन संभालेगा। बच्चा क्या करेगा। यही सोच में पुलिसकर्मी काफी देर तक डूबे रहे।
कोराेना काल में की थी मदद
दरोगा प्रशांत यादव कोरोना काल में सदर और हरीपर्वत थाना में तैनात थे। तब वह लोगों की मदद के लिए आगे आए थे। जरूरतमंद लोगों तक खाना पहुंचाने में आगे रहते थे।