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एएमयू घटनाः लाठीचार्ज के दोषी पुलिस कर्मियों पर एनएचआरसी ने की कार्रवाई की सिफारिश

Mon, 24 Feb 2020 07:42 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 24 Feb 2020 07:42 PM IST
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AMU incident: Recommendation of action on police personnel guilty of lathicharge
एएमयू - फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो

 सीएए के विरोध में प्रदर्शन करने वाले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों पर अनावश्यक लाठी चार्ज करने वाले पुलिस और पीएसी के जवानों पर मानवाधिकार आयोग ने कार्रवाई की संस्तुति की है। आयोग ने घटना में घायल हुए छह छात्रों को मानवीय आधार पर मुआवजा पाना का हकदार मानते हुए मुख्य सचिव से मुआवजा देने के लिए कहा है। मानवाधिकार आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रस्तुत की।

AMU incident: Recommendation of action on police personnel guilty of lathicharge
court - फोटो : prayagraj

कोर्ट ने रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए  प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि लाठीचार्ज की घटना के संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा की गई संस्तुतियों का पालन करें तथा इसकी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए । मामले की सुनवाई 25 मार्च को होगी। एएमयू के पूर्व छात्र अमन खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने दिया है।

AMU incident: Recommendation of action on police personnel guilty of lathicharge
NHRC

सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा की गई जांच और उसकी संस्तुतियों की रिपोर्ट न्यायालय में पेश की गई। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में डीजीपी यूपी पुलिस से कहा है कि वह घटना की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन पुलिस और पीएसी के जवानों की पहचान करें जो अनावश्यक लाठीचार्ज में शामिल थे। उनके खिलाफ विभागीय नियमों के तहत उपयुक्त कार्रवाई की जाए।

आयोग ने घटना में घायल हुए छह छात्रों को मानवीय आधार पर मुआवजा देने का मुख्य सचिव को निर्देश दिया है । आयोग ने डीजीपी से कहा है कि इस प्रकार की परिस्थितियों से निपटने के लिए पुलिस, पीएसी और सीआरपीएफ तथा आरएएफ  जैसी फोर्स को जागरूक किया जाए। उनको  ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। इन सुरक्षाबलों को और अधिक प्रोफेशनल बनाया जाए ताकि वह ऐसी घटनाओं के समय आम नागरिकों के मानवाधिकार का सम्मान कर सके।

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AMU incident: Recommendation of action on police personnel guilty of lathicharge
सीएए एनआरसी एनपीआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन - फोटो : PTI
आयोग ने डीजीपी द्वारा छह जनवरी 2020 को गठित एसआईटी से कहा है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उस वक्त हुई सभी घटनाओं को अपनी जांच में शामिल करें और तय समय में जांच पूरी करे। आयोग ने  अदालत से भी अनुरोध किया है कि वह जांच के लिए समय सीमा तय करें तथा समय.समय पर इसकी समीक्षा करें ।आयोग ने उन्नत इंटलीजेंस सिस्टम विकसित करने के लिए कहा है ताकि ऐसे मौकों पर अफवाहों को फैलने से रोका जा सके। विशेषकर सोशल मीडिया पर इस प्रकार की अफवाहें फैलती है, उनसे निपटने के लिए एजेंसियों को प्रशिक्षित किए जाने की जरूरत है। आयोग ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति से भी कहा है कि वह   छात्रों से संवाद का बेहतर तरीका विकसित करें ताकि वह बाहरी तत्वों से प्रभावित ना हों। अराजक छात्रों को निष्कासित किया जाए और विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों का भरोसा जीतने वाला कदम उठाए।

 कोर्ट ने मुख्य सचिव, डीजीपी यूपी पुलिस, डीजीपी सीआरपीएफ तथा एएमयू के कुलपति को आदेश का पालन करने और अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने का निर्देश दिया है। मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट को कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। 
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