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कुंभ में धर्म की राजनीति में दलित संतों का नया चेहरा, भेदभाव और उपेक्षा रोकने को बनाया अलग अखाड़ा
अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 14 Feb 2019 11:06 PM IST
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सामाजिक गैर बराबरी, भेदभाव का मुद्दा धर्म क्षेत्र में भी संतों के बीच खींचतान का कारण बन गया है। कुंभ में दलित संतों ने इसके लिए अलग अखाड़ा परिषद का गठन कर गैर बराबरी के खिलाफ आवाज बुलंद की है। अखिल भारतीय महर्षि वाल्मीकि साधु अखाड़ा परिषद दलित संतों के सम्मान की लड़ाई लड़ेगा।
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इस अखाड़े ने कुंभ में पांच नए महामंडलेश्वरों की घोषणा भी की है, लेकिन सुविधा न मिलने से नाराज होकर दलित संतों ने दिल्ली में पट्टाभिषेक कराने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि अगले हरिद्वार के कुंभ में वह अखाड़ों की तरह की पेशवाई निकालेंगे और महंत, पीठाधीश्वर, मंडलेश्वर, महामंडलेश्वर बनाएंगे, ताकि दलित संतों को भी सम्मान और बराबरी का दर्जा दिलाया जा सके।
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के समानांतर दलित संतों की एकजुटता धर्म जगत के लिए नया संदेश है। वाल्मीकि साधु अखाड़ा परिषद धर्म क्षेत्र में दलित संतों की उपेक्षा के खिलाफ मुहिम चला रहा है। फिलहाल इस अखाड़े में देश भर से तीन सौ से अधिक दलित संत जुड़ चुके हैं। इसमें अलग -अलग पंथों में गए दलित संतों की वापसी का भी अभियान चलाया जा रहा है। वाल्मीकि साधु अखाड़ा परिषद के महामंत्री सुनील राजदान बताते हैं कि नानक पंथ, कबीर पंथ, नाथ पंथ और शाह पंथ में बड़ी संख्या में दलित संत लंबे समय से घुटन महसूस कर रहे हैं। उनके साथ पंक्ति विभेद होता है। बराबरी का दर्जा नहीं दिया जाता। उन्हें दोयम दर्जे का संत समझकर उपेक्षा की जाती है, लेकिन अब यह सब नहीं चलेगा। दलित संत समाज एकजुट हो रहा है।
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इन पंथों से निकलकर लोग अपने अखाड़े में शामिल हो रहे हैं। सुनील राजदान बताते हैं कि इस कुभ में भी दलित संतों की जमकर उपेक्षा की गई। न जमीन मिली न सुविधा। अपने खर्चे से परिषद ने टेंट लगवाए। कुंभ में वाल्मीकि अखाड़े ने पांच महामंडलेश्वर बनाए, लेकिन जगह न होने की वजह से पट्टाभिषेक नहीं हो सका।
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अब दिल्ली में मुहूर्त देखकर कुंभ बाद पट्टाभिषेक किया जाएगा। जिन संतों को महामंडलेश्वर के रूप में चुना गया है, उनमें कुरुक्षेत्र के रविशाह महाराज, दिल्ली के शाहिल नाथ महाराज, मोदीनगर गाजियाबाद के जनम शाह महाराज, दिल्ली के ही मसरीक शाह और संगम नाथ महाराज के नाम शामिल हैं।
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