हत्या की वारदात दर वारदात से जिले में सनसनी फैल गई है। हाल यह है कि 72 घंटे यानी तीन दिन के भीतर ही हत्या की छह वारदातें सामने आ चुकी हैं। जिनमें कुल सात लोगों को मार डाला गया। इनमें से तीन को तो नृशंस तरीके से धारदार हथियार से वार कर मौत के घाट उतारा गया। इससे कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जिले के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ दिनों में आपराधिक घटनाओं की बाढ़ सी आ गई है। गंगापार व यमुनापार में हत्या के प्रयास, लूट, छेड़छाड़ के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। मेजा में पिछले दिनों छेड़छाड़ केविरोध पर पिता की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक से मौत का हवाला देकर मामला संभालने की कोशिश की थी लेकिन सच यही है कि बेरहमी से पिटाई के बाद ही उसकी हालत बिगड़ी थी।
17 जुलाई को सरायइनायत में राजू नामक युवक की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। तीन जुलाई की रात सरायइनायत में 11 वर्षीय बालिका की हत्या कर लाश गड्ढे में फेंक दी गई। छह जुलाई को लाश मिलने पर वारदात की जानकारी हुई। पुलिस ने खुलासा करते हुए बताया था कि बालिका की मां केप्रेमी ने वारदात को अंजाम दिया। लेकिन घरवालों ने इस खुलासे पर सवाल उठाए थे। इससे पहले 17 मई को सरायइनायत केयरना गांव में आईटीआई के छात्र 17 वर्षीय अरुण उर्फ गोलू की हत्या कर दी गई थी।
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सात स्पेशल टीमें, फिर भी क्राइम कंट्रोल नहीं
ऐसा नहीं है कि क्राइम कंट्रोल के लिए पुलिस अफसरों की ओर से कवायद नहीं की जा रही है। लेकिन फिलहाल सारी कवायदें नाकाफी साबित हो रही हैं। गौरतलब है कि जिले में अपराधियों पर लगाम व खुलासे केलिए सात स्पेशल टीमें भी बनाई गई हैं। इनमें गंगापार, यमुनापार, शहर उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी एसओजी के साथ ही नारकोटिक्स व सर्विलांस टीम शामिल है। इन टीमों में 70 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं। सूत्रों का कहना है कि इनमें से ज्यादातर जुगाड़ से लंबे समय से एसओजी में जमे हैं। इसके अलावा एसओजी टीमों की कमान अनुभवहीन हाथों में सौंपे जाने से भी काम प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
