बागपत जनपद के रटौल थानाक्षेत्र में हुए दोहरे हत्याकांड में नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच पड़ताल में सामने आया कि लहचौड़ा गांव के श्रीगणेश मंदिर परिसर में 25 जुलाई को उज्ज्वल ने चाय बनाई, जिसमें साधु नरेशनाथ ने नशीली गोलियां मिला दीं। उज्ज्वल ने अंकित प्रजापति व उसकेदोस्त इसरार को चाय पिलाकर बेहोश कर दिया और नरेशनाथ ने दोनों को जहर के इंजेक्शन लगाए। सफाई करने के बहाने लहचौड़ा गांव के व्यक्ति से फावड़ा मंगवाया। नरेशनाथ, उज्ज्वल और कृष्ण यादव ने मिलकर गड्ढे की खोदाई कर दोनों को जिंदा दबा दिया, जबकि नाबालिग बाहर पहरेदारी करता रहा।
Baghpat Double Murder: शादी के झांसे में उज्ज्वल बना हत्याकांड का साथी, फरार महंत को लेकर नया खुलासा
बागपत के लहचौड़ा गांव में हुए दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार साधु नरेशनाथ ने साजिश रचकर अंकित प्रजापति और उसके दोस्त इसरार को चाय में नशीली गोलियां मिलाकर बेहोश किया, फिर दोनों को जहर के इंजेक्शन लगाए और साथियों के साथ मंदिर परिसर में गड्ढा खोदकर दबा दिया। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार उज्ज्वल ने घटना की पूरी कड़ी बताई।
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दोहरे हत्याकांड की घटना को पूरी तरह से योजना बनाकर अंजाम दिया गया। इसमें गिरफ्तार किए गए आरोपी उज्ज्वल निवासी पूरनपुर नवादा ने पूछताछ में पुलिस के सामने घटना की एक-एक कड़ी बताई। एसपी सूरज कुमार राय के अनुसार उज्ज्वल ने बताया कि बहन के साथ अनैतिक संबंधों के बारे में पता चलने पर अंकित प्रजापति साधु नरेशनाथ से खफा रहता था।
सट्टे के नंबर लेने के लिए अंकित और इसरार लगातार साधु के पास आते रहते थे। अंकित दो तीन हजार रुपये का सट्टा लगाता था, जबकि साधु नरेशनाथ उससे लाखों रुपये का सट्टा लगाने की बात कहता था, जिसको लेकर दोनों में विवाद भी हुआ था।
इसके बाद भी सट्टे के नंबरों को लेकर अंकित आता रहता था। यह जरूर था कि अंकित अपनी बहन को साधु के यहां जाते हुए देखता था तो वह विरोध करते हुए झगड़ा करता था। इस तरह घर में विरोध व झगड़े के बारे में नरेशनाथ को तुरंत सूचना मिल जाती थी। उसने रोजाना झगड़े के कारण अंकित को मारने की योजना बनाई।
इसके लिए पहले ही नशीली दवाई, जहर के इंजेक्शन लाकर रख लिए थे, इसलिए ही 25 जुलाई को साधु नरेशनाथ ने फोन करके अंकित को बुलाया। अंकित दिव्यांग होने के कारण मदद के लिए इसरार को साथ रखता था और उसे खर्च के लिए रुपये देता था, इसलिए अंकित के साथ इसरार भी आया।
उस समय सिंगौली तगा गांव का एक व्यक्ति भी मंदिर में बैठा हुआ था। उस व्यक्ति के मंदिर से जाने के बाद साधु नरेशनाथ के कहने पर उज्ज्वल चाय बनाने गया। नरेशनाथ ने अपनी जेब से निकालकर नशे की 15 गोलियां दोनों की चाय में मिला दी। नशे की गोलियों का पत्ता भी मंदिर परिसर से पुलिस को मिल गया है। इसके बाद उसने दोनों को चाय पिला दी।
चाय पीते ही अंकित और इसरार बेहोश हो गए। उनको बेहोश होते ही नरेशनाथ ने कार में रखे जहर के इंजेक्शन लगाए। पहले उनको नहर में फेंकने की योजना थी, मगर यह डर हुआ कि उनको लेकर जाते हुए कोई देख लेगा, इसलिए मंदिर परिसर में दबाने की योजना बनाई।
लहचौड़ा गांव के एक व्यक्ति को फोन करके मंदिर परिसर में सफाई करने के लिए फावड़ा मंगवाया। इसके बाद मंदिर का गेट बंद कर ताला लगाकर उसके सामने साधु ने अपनी कार खड़ी कर दी और बाहर से आने वाले लोगों की निगरानी करने के लिए नाबालिग को खड़ा कर दिया। फिर तीनों ने बारी-बारी से मिलकर गड्ढे की खोदाई शुरू कर दी।
एक घंटे की मशक्कत के बाद तीनों ने करीब चार फीट गहरा, दस फीट लंबा और तीन फीट चौड़े गड्ढे की खोदाई की। उज्ज्वल ने पुलिस को बताया कि जिस समय अंकित और इसरार को गड्ढे में डाला गया, तब तक दोनों की सांस चल रही थी।