उत्तर प्रदेश के बागपत में दोघट थानाक्षेत्र के भड़ल गांव में चल रही चर्मशोधन इकाइयों को जेसीबी लेकर ध्वस्त करने पहुंची पुलिस-प्रशासन की टीम पर पथराव कर दिया गया और तोड़फोड़ की गई। इस दौरान करीब दस पुलिस कर्मी चोटिल हुए तो वहां अन्य फोर्स पहुंचा। पुलिस ने लाठीचार्ज कर दस महिला-पुरुषों को हिरासत में लिया है। इसके बाद मामला शांत होने पर सभी 84 चर्मशोधन इकाइयों को ध्वस्त किया गया।
तस्वीरें: चर्मशोधन इकाइयों पर बुलडोजर चलते ही पुलिस से भिड़ीं महिलाएं, साढ़े तीन घंटे चला बवाल, दस पुलिसकर्मी हुए घायल
भडल गांव में काफी वर्षों से चल रही 84 चर्मशोधन इकाइयों से प्रदूषण फैलने की शिकायत एनजीटी में होने पर उनको बंद करने के आदेश जारी किए गए थे। सभी इकाइयों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बावजूद एक भी चर्मशोधन ईकाई बंद नहीं की गई। उन इकाइयों को ध्वस्त कराने के लिए शनिवार दोपहर को एसडीएम बड़ौत पूजा चौधरी, सीओ युवराज सिंह कई थानों की पुलिस व पीएसी के साथ जेसीबी लेकर वहां पहुंचे।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई तो चर्मशोधन इकाई संचालकों ने अपने परिवारों के साथ मिलकर विरोध शुरू कर दिया। वहां पुलिस पर पथराव कर दिया और जेसीबी में तोड़फोड़ कर दी। पथराव होते ही पुलिस कर्मी जान बचाने के लिए भागने लगे और अन्य पुलिस बल बुलाया गया। इसके बाद पुलिस ने विरोध करने वालों पर लाठीचार्ज कर दिया और उनको हिरासत में लिया गया। इसके बाद ही सभी 84 इकाइयों को ध्वस्त किया गया। इस तरह वहां करीब साढ़े तीन घंटे तक हंगामा चलता रहा।
भड़ल गांव में चर्मशोधन इकाइयों को ध्वस्त कराने के लिए शनिवार दोपहर करीब ढाई बजे बड़ौत एसडीएम पूजा, सीओ युवराज सिंह, प्रदूषण नियंत्रण विभाग मेरठ के अवर अभियंता एनपी सिंह भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे थे। अधिकारियों को अंदेशा था कि महिलाएं हंगामा कर सकती है, इसलिए ही महिला थाना पुलिस को साथ लेकर गए थे।
जब आबादी के बीच मौजूद चर्मशोधन इकाइयों का ध्वस्तीकरण शुरू हुआ तो लोगों में हड़कंप मच गया। यहां कोई एक नहीं, बल्कि 84 चर्मशोधन इकाइयां थी। भारी पुलिसबल देख इकाई संचालकों ने ध्वस्तीकरण रुकवाने के लिए महिलाओं को आगे भेज दिया। इसके बाद पथराव शुरू हो गया। पुलिसकर्मी इधर-उधर भागकर जान बचाते दिखे। साढ़े तीन घंटे तक हंगामा चलता रहा। ढाई बजे शुरू हुई कार्रवाई छह बजे ध्वस्तीकरण के साथ पूरी हुई।
