दो दिन तक हुई बारिश और उसके बाद नदियों में आई बाढ़ ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। सबसे ज्यादा धान, अगेते बोये गए आलू, दलहनी फसलों और सब्जियों की फसल बर्बाद हो गई है। लगातार पानी में डूबे रहने से गन्ने की फसल को भी नुकसान पहुंचेगा। कृषि विभाग ने फसलों के नुकसान का आकलन करना शुरू कर दिया है।
ग्राउंड रिपोर्ट: बारिश और बाढ़ ने मचाई तबाही, जिले में हुआ भारी नुकसान, लोगों ने छतों पर बनाया ठिकाना, देखिए तस्वीरें
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अभी भी खेतों में भरा है पानी, फसल सड़ने की आशंका
गांव सलेमपुर, मीरापुर सीकरी, रायपुर खादर, जलालपुर खादर, नारनौर, दत्तियाना, जमालुद्दीनपुर, सुजातपुर खादर, स्याली, मुजफ्फरपुर खादर, गांव कोटजवाना, गोपीवाला, हरवंशवाला, सिक्कावाला, रायपुर गढ़ी, टांडा साहूवाला, मुकंदपुर, रामजीवाला, सादातपुर गढ़ी, चिलकिया, नूरपुर अरब, भाऊवाला, सारंगवाला, जमालपुर ढीकली सहित कई गांवों में बारिश की वजह से फसलें बर्बाद हुई हैं।सैकड़ों किसानों की धान, गन्ना आदि की फसलों में पानी भरा है। बढ़ापुर क्षेत्र के किसान ठाकुर रामपाल सिंह, मनोज कुमार, सतनाम सिंह, सुखवीर सिंह, वीर सिंह, रघुवीर सिंह, मदन, बलविंदर सिंह, मोहन सिंह सहित कई किसानों की धान, मूंगफली, तिलहन व उड़द की फसलें पानी से बर्बाद हो गई हैं। क्षेत्र में अधिकांश किसानों का यही हाल है। फसल क्षति का आकलन कर पाना भी मुश्किल है।
फसलों का रकबा
धान 55431
उड़द 2378
आलू 4000
प्याज 138
टमाटर 85
गाजर 15
मूली 35
नोट : फसलों का रकबा हेक्टेयर में है।
परिवारों ने छतों पर बनाया ठिकाना
रामगंगा नदी के तट पर बसे गांव मनोहरवाली में घरों तक में पानी भरा हुआ है। इससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण नसीम खां, नईम अहमद, फईम, मुस्ताक खां, शेर मोहम्मद ने बताया कि उनके घरों में रामगंगा नदी का तीन से चार फीट पानी भरा हुआ है। इसके अलावा रास्ते पर भी पानी है।
जलीलपुर क्षेत्र में गंगा में उफान के चलते पानी की धार सड़क पर बह रही है। अनेक ग्रामीणों के मकानों में पानी भर गया है। कुछ परिवारों ने मकानों की छतों पर ठिकाना बनाया है। जलीलपुर सलेमपुर, जलीलपुर रायपुर खादर, जलीलपुर दत्तियाना, दत्तियाना सुजातपुर, दत्तियाना स्याली, दत्तियाना मुजफ्फरपुर खादर आदि सड़कों पर दूसरे दिन भी गंगा की धार चलती रही। सड़कों पर गंगा का पानी चलने से दो पहिया व छोटे वाहनों से आवागमन बंद हो गया है। कई ग्रामीणों के मकानों में पानी भर जाने के कारण मकानों की छतों पर ठिकाना बनाए हुए हैं।
गांव फतेहपुर सभाचंद के स्कूल तक पहुंची गंगा
मंडावर में गुरुवार को गंगा का जलस्तर घटकर करीब 96 हजार क्यूसेक ही रह गया। पानी तो घटा, लेकिन अब गंगा की तेज धारा ने कटान शुरू कर दिया है। गंगा की धारा गांव फतेहपुर सभाचंद के स्कूल की चहारदीवारी को पहले ही बहा चुकी है। स्कूल में पढ़ाई पहले से ही बंद है। गांव के बच्चों को गांव सेफपुरा के एक घर में पढ़ाया जा रहा है। दिपेंद्र, रामकिशन, सरवन, रोहताश आदि ने बताया कि उनका आधे से ज्यादा गांव कई साल पहले गंगा की वजह से उजड़ गया था। अगर कटान नहीं रुका तो उन्हें भी यहां से जाना होगा। उन्होंने कटान रोकने के लिए तटबंध बनवाने की मांग की है।
मनोहरवाली के परिषदीय स्कूल में भरा पानी
अफजलगढ़ में पिछले तीन दिन से लगातार कालागढ़ के रामगंगा बांध से रामगंगा नदी में पानी की निकासी की जा रही है। इससे गांव मनोहरवाली के अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। विद्यालय परिसर में रामगंगा नदी का तीन से चार फीट पानी भरा है।
गांव मनोहरवाली स्थित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 312 है। बृहस्पतिवार को स्कूल खुलने पर इनमें से मात्र 76 बच्चे ही स्कूल पहुंचे। संविलियन विद्यालय के प्रधानाध्यापक उत्तम सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत स्तर पर स्कूल की चहारदीवारी बनाने का कार्य चल रहा था। रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया और पानी खेतों के रास्ते स्कूल परिसर तक आ पहुंचा है। निर्माणाधीन दीवार पानी में डूब गई। प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापक शबाना परवीन ने बताया कि बाढ़ का पानी भरा होने के कारण स्कूली बच्चों को लगातार खतरा बना हुआ है। यदि गलती से कोई मासूम बच्चा पानी की ओर चला गया तो अनहोनी हो सकती है।