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Bijnor News: 12वीं की छात्रा ने दूसरी मंजिल की छत से लगा दी छलांग, गंभीर
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- दोनों हाथ और पैर में हुआ फ्रैक्चर, नाक और मुंह की हड्डी भी टूटी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। तनाव के चलते 12वीं की छात्रा ने लाइब्रेरी की दूसरी मंजिल की छत से छलांग लगा दी। जान देने का प्रयास करने वाली छात्रा गंभीर रूप से घायल हुई है। जिसका निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बिजनौर शहर की एक कॉलोनी में रहने वाली छात्रा शक्ति चौक के पास एक लाइब्रेरी में पिछले दो महीने से पढ़ने के लिए आ रही थी। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगी थी। सोमवार की सुबह नौ बजे छात्रा लाइब्रेरी में पहुंची और अपना बैग सीट पर रखने के बाद तुरंत ही छत पर चली गई। दूसरी लाइब्रेरी की बालकनी में खड़े एक छात्र ने बताया कि शुरुआत में छात्रा छत पर टहल रही थी, कुछ ही पलों में उसने रेलिंग पर अपने दोनों पैर लटकाए और नीचे कूद गई। पल भर में छात्रा मुंह के बाल सड़क पर आ गिरी। तुरंत ही अन्य छात्र घायल छात्रा को लेकर अस्पताल में पहुंचे। छात्रा की हालत खतरे से बाहर है मगर उसके दोनों हाथ, पैर की हड्डी टूटी है। साथ ही मुंह की हड्डी भी टूट गई।
सहपाठियों ने बताया कि दो महीने के अंतराल में उक्त छात्रा दो बार ही छत पर गई है। रविवार को भी छत पर जाने लगी थी, मगर सीढ़ियों से ही लौट गई थी। सोमवार को फिर से दूसरी बार छत पर पहुंची, जिसने छत की रेलिंग से छलांग लगा दी। छात्रा के परिजनों ने बताया कि किसी बात को लेकर वह तनाव में चल रही थी, मगर उसने कभी किसी को कुछ बताया नहीं।
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क्षेत्राधिकारी सिटी अभय कुमार पांडेय ने बताया कि छात्रा के छत से कूदने के संबंध में परिजनों ने कोई जानकारी नहीं दी है।
-- - प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, छात्रों में बढ़ रहा मानसिक तनाव
- असफलता को स्वीकार न कर पाने का डर भी बच्चों को कर रहा बीमार
- मेडिकल कॉलेज में रोजाना इस समस्या के दो विद्यार्थी तक पहुंच रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता को लेकर विद्यार्थियों में दबाव बढ़ रहा है। इसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के मनकक्ष में रोजाना एक से दो विद्यार्थी पहुंच रहे हैं जो प्रतियोगी परीक्षा में सफलता को लेकर तनाव में हैं। इसमें सबसे जरूरी है कि अभिभावक बच्चों पर दबाव नहीं डालें।
मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन कुमार ने बताया कि परीक्षा या प्रतियोगिता अपने आप में आत्महत्या का कारण नहीं होती है। बल्कि परीक्षा में असफलता या अपेक्षित परिणाम न मिलना मानसिक समस्या का कारण है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे कुछ बच्चे परीक्षा से पहले अत्यधिक चिंता, नींद की समस्या और पढ़ाई में ध्यान न लगने की शिकायत लेकर आते हैं।
-- विद्यार्थियों में इसलिए बढ़ रहा तनाव
- परिवार और रिश्तेदारों की लगातार अपेक्षाएं
- परिणाम को जीवन की सफलता या असफलता से जोड़ देना
- नीट, जेई जैसी परीक्षाओं में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और सीमित सीटों का दबाव
- बच्चों की दूसरे विद्यार्थियों से तुलना करना
- बार-बार टेस्ट और कम अंक आने के बाद आत्मविश्वास में गिरावट
- असफलता को स्वीकार न कर पाने का डर
- पढ़ाई के दौरान नींद, आराम, खेल और सामाजिक गतिविधियों की उपेक्षा
- सोशल मीडिया के कारण दूसरों की सफलता से लगातार तुलना
- बच्चे को अपनी समस्या या डर परिवार के सामने बताने में संकोच होना
- पहले से चिंता या तनाव जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं
-- -- परिजन ऐसे समझें लक्षण
- लगातार चिंता, डर या बेचैनी
- चिड़चिड़ापन या बार-बार रोना
- अत्यधिक निराशा, आत्मविश्वास में अचानक कमी
- परिवार और दोस्तों से अचानक दूरी बनाना
- पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में रुचि खत्म होना
- पढ़ाई से पूरी तरह बचना या अत्यधिक और असंतुलित तरीके से पढ़ते रहना
- स्कूल/कोचिंग से अनुपस्थित रहना, अचानक प्रदर्शन में गिरावट
- अत्यधिक गुस्सा, बेचैनी या आवेगशीलता
- नींद न आना या बहुत ज्यादा सोना
- भूख में बदलाव, लगातार सिरदर्द या पेट दर्द
- अत्यधिक थकान, ध्यान और एकाग्रता में कठिनाई
-- -- अभिभावक ऐसे कर सकते हैं बचाव
- बच्चे को यह महसूस कराएं कि उसका मूल्य उसके अंकों से अधिक हैं
- उसकी दूसरे बच्चों से तुलना बंद करें
- असफलता को स्वीकार्य बनाएं
- पढ़ाई के साथ नींद और आराम को भी महत्व दें
- बच्चे से नियमित बातचीत करें, जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। तनाव के चलते 12वीं की छात्रा ने लाइब्रेरी की दूसरी मंजिल की छत से छलांग लगा दी। जान देने का प्रयास करने वाली छात्रा गंभीर रूप से घायल हुई है। जिसका निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बिजनौर शहर की एक कॉलोनी में रहने वाली छात्रा शक्ति चौक के पास एक लाइब्रेरी में पिछले दो महीने से पढ़ने के लिए आ रही थी। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगी थी। सोमवार की सुबह नौ बजे छात्रा लाइब्रेरी में पहुंची और अपना बैग सीट पर रखने के बाद तुरंत ही छत पर चली गई। दूसरी लाइब्रेरी की बालकनी में खड़े एक छात्र ने बताया कि शुरुआत में छात्रा छत पर टहल रही थी, कुछ ही पलों में उसने रेलिंग पर अपने दोनों पैर लटकाए और नीचे कूद गई। पल भर में छात्रा मुंह के बाल सड़क पर आ गिरी। तुरंत ही अन्य छात्र घायल छात्रा को लेकर अस्पताल में पहुंचे। छात्रा की हालत खतरे से बाहर है मगर उसके दोनों हाथ, पैर की हड्डी टूटी है। साथ ही मुंह की हड्डी भी टूट गई।
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सहपाठियों ने बताया कि दो महीने के अंतराल में उक्त छात्रा दो बार ही छत पर गई है। रविवार को भी छत पर जाने लगी थी, मगर सीढ़ियों से ही लौट गई थी। सोमवार को फिर से दूसरी बार छत पर पहुंची, जिसने छत की रेलिंग से छलांग लगा दी। छात्रा के परिजनों ने बताया कि किसी बात को लेकर वह तनाव में चल रही थी, मगर उसने कभी किसी को कुछ बताया नहीं।
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क्षेत्राधिकारी सिटी अभय कुमार पांडेय ने बताया कि छात्रा के छत से कूदने के संबंध में परिजनों ने कोई जानकारी नहीं दी है।
- असफलता को स्वीकार न कर पाने का डर भी बच्चों को कर रहा बीमार
- मेडिकल कॉलेज में रोजाना इस समस्या के दो विद्यार्थी तक पहुंच रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता को लेकर विद्यार्थियों में दबाव बढ़ रहा है। इसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के मनकक्ष में रोजाना एक से दो विद्यार्थी पहुंच रहे हैं जो प्रतियोगी परीक्षा में सफलता को लेकर तनाव में हैं। इसमें सबसे जरूरी है कि अभिभावक बच्चों पर दबाव नहीं डालें।
मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन कुमार ने बताया कि परीक्षा या प्रतियोगिता अपने आप में आत्महत्या का कारण नहीं होती है। बल्कि परीक्षा में असफलता या अपेक्षित परिणाम न मिलना मानसिक समस्या का कारण है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे कुछ बच्चे परीक्षा से पहले अत्यधिक चिंता, नींद की समस्या और पढ़ाई में ध्यान न लगने की शिकायत लेकर आते हैं।
- परिवार और रिश्तेदारों की लगातार अपेक्षाएं
- परिणाम को जीवन की सफलता या असफलता से जोड़ देना
- नीट, जेई जैसी परीक्षाओं में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और सीमित सीटों का दबाव
- बच्चों की दूसरे विद्यार्थियों से तुलना करना
- बार-बार टेस्ट और कम अंक आने के बाद आत्मविश्वास में गिरावट
- असफलता को स्वीकार न कर पाने का डर
- पढ़ाई के दौरान नींद, आराम, खेल और सामाजिक गतिविधियों की उपेक्षा
- सोशल मीडिया के कारण दूसरों की सफलता से लगातार तुलना
- बच्चे को अपनी समस्या या डर परिवार के सामने बताने में संकोच होना
- पहले से चिंता या तनाव जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं
- लगातार चिंता, डर या बेचैनी
- चिड़चिड़ापन या बार-बार रोना
- अत्यधिक निराशा, आत्मविश्वास में अचानक कमी
- परिवार और दोस्तों से अचानक दूरी बनाना
- पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में रुचि खत्म होना
- पढ़ाई से पूरी तरह बचना या अत्यधिक और असंतुलित तरीके से पढ़ते रहना
- स्कूल/कोचिंग से अनुपस्थित रहना, अचानक प्रदर्शन में गिरावट
- अत्यधिक गुस्सा, बेचैनी या आवेगशीलता
- नींद न आना या बहुत ज्यादा सोना
- भूख में बदलाव, लगातार सिरदर्द या पेट दर्द
- अत्यधिक थकान, ध्यान और एकाग्रता में कठिनाई
- बच्चे को यह महसूस कराएं कि उसका मूल्य उसके अंकों से अधिक हैं
- उसकी दूसरे बच्चों से तुलना बंद करें
- असफलता को स्वीकार्य बनाएं
- पढ़ाई के साथ नींद और आराम को भी महत्व दें
- बच्चे से नियमित बातचीत करें, जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें