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UP: मुस्कुराती आखिरी सेल्फी, पीछे छोड़ गई आंसू, सफेद कार खून से लाल; साढ़े 14 फीट की टवेरा 10 फीट में सिमटी
अमर उजाला नेटवर्क, ललितपुर/जालौन
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 05 May 2026 01:52 PM IST
सार
अयोध्या के सरयू में खंडित मूर्तियों को विसर्जित कर लौट रहे ललितपुर के महरौनी के 10 श्रद्धालु हादसे का शिकार हो गए। श्रद्धालुओं की कार डंपर से टकरा गई। हादसे में आठ की मौत हो गई। वहीं, श्रद्धालुओं ने लौटने से पहले अयोध्या में सरयू नदी के घाट पर सेल्फी ली थी।
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सरयू नदी में स्नान के बाद सेल्फी लेते कार सवार लोग
- फोटो : परिजन
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अयोध्या की धार्मिक यात्रा से लौट रहे महरौनी के आठ श्रद्धालुओं की सोमवार सुबह जालौन जिले के कालपी इलाके में जोल्हूपुर मोड़ पर सड़क हादसे में मौत हो गई। सरयू नदी के घाट पर ली गई उनकी मुस्कुराती तस्वीर अब परिजनों के लिए आखिरी याद बन गई है, जिसने पूरे कस्बे को गहरे शोक में डुबो दिया।
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Orai Road Accident
- फोटो : amar ujala
रविवार रात करीब आठ बजे सभी लोग टवेरा कार से महरौनी के लिए चले। सोमवार सुबह करीब छह बजे कालपी क्षेत्र के जोल्हूपुर मोड़ के पास उनकी कार हादसे का शिकार हो गई। इस दर्दनाक हादसे में शशिकांत तिवारी (30), कृष्णकांत नायक (38), स्वामी प्रसाद तिवारी (58), मनोज भोड़ेले (36), देशराज नामदेव (36), उमेश तिवारी (25), दीपक तिवारी (30) और बृजभूषण तिवारी (45) की मौत हो गई।
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Orai Road Accident
- फोटो : amar ujala
मोहल्ले में पसरा सन्नाटा, हर घर में मातम
एक ही मोहल्ले के आठ लोगों की मौत की खबर ने पूरे महरौनी को झकझोर दिया। सोमवार सुबह जैसे ही सूचना पहुंची, परिजनों में कोहराम मच गया। कई परिवारों के चिराग एक साथ बुझ गए। मोहल्ले की गलियों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा और घरों से सिर्फ चीख-पुकार और रोने की आवाजें सुनाई देती रहीं। परिजन बदहवास हालत में मौके की ओर रवाना हो गए। पूरे कस्बे में यह घटना चर्चा का विषय बनी रही और हर आंख नम नजर आई।
एक ही मोहल्ले के आठ लोगों की मौत की खबर ने पूरे महरौनी को झकझोर दिया। सोमवार सुबह जैसे ही सूचना पहुंची, परिजनों में कोहराम मच गया। कई परिवारों के चिराग एक साथ बुझ गए। मोहल्ले की गलियों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा और घरों से सिर्फ चीख-पुकार और रोने की आवाजें सुनाई देती रहीं। परिजन बदहवास हालत में मौके की ओर रवाना हो गए। पूरे कस्बे में यह घटना चर्चा का विषय बनी रही और हर आंख नम नजर आई।
Orai Road Accident
- फोटो : amar ujala
इनके परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
- शशिकांत तिवारी : बेकरी का संचालन करते थे, एक पुत्र है।
- कृष्णकांत नायक : शिक्षा विभाग में शिक्षक थे और अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। परिवार सहित ससुराल पक्ष की जिम्मेदारी भी उन पर थी और उसकी दो पुत्रियां हैं।
- स्वामी प्रसाद तिवारी : निजी विद्यालय में शिक्षक थे और उनके दो पुत्र हैं।
- मनोज भोड़ेले : माता-पिता की इकलौती संतान और भागवत आचार्य के साथ शास्त्री थे। उनकी दो पुत्री व एक पुत्र है।
- देशराज नामदेव : इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे और इलेक्ट्रिकल्स की दुकान का संचालित करते थे। उनकी दो पुत्रियां हैं।
- उमेश तिवारी : परिवार में सबसे छोटा था और अविवाहित था।
- शशिकांत तिवारी : बेकरी का संचालन करते थे, एक पुत्र है।
- कृष्णकांत नायक : शिक्षा विभाग में शिक्षक थे और अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। परिवार सहित ससुराल पक्ष की जिम्मेदारी भी उन पर थी और उसकी दो पुत्रियां हैं।
- स्वामी प्रसाद तिवारी : निजी विद्यालय में शिक्षक थे और उनके दो पुत्र हैं।
- मनोज भोड़ेले : माता-पिता की इकलौती संतान और भागवत आचार्य के साथ शास्त्री थे। उनकी दो पुत्री व एक पुत्र है।
- देशराज नामदेव : इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे और इलेक्ट्रिकल्स की दुकान का संचालित करते थे। उनकी दो पुत्रियां हैं।
- उमेश तिवारी : परिवार में सबसे छोटा था और अविवाहित था।
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- फोटो : amar ujala
धार्मिक यात्रा बनी अंतिम सफर
महरौनी के राम जानकी मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पुरानी खंडित मूर्तियों को सरयू नदी में विसर्जित करने के लिए सभी श्रद्धालु अयोध्या गए थे। पूजा-अर्चना और दर्शन के बाद लौटते समय यह यात्रा उनके जीवन का अंतिम सफर बन गई।
महरौनी के राम जानकी मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पुरानी खंडित मूर्तियों को सरयू नदी में विसर्जित करने के लिए सभी श्रद्धालु अयोध्या गए थे। पूजा-अर्चना और दर्शन के बाद लौटते समय यह यात्रा उनके जीवन का अंतिम सफर बन गई।