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झांसी अग्निकांड: 'ओ मेरे लाल... बड़ी मन्नत से आया, कहां चला गया'; बेहोश हुई जिगर का टुकड़ा नहीं मिलने पर मां

अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 16 Nov 2024 01:52 PM IST
सार

झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष (एसएनसीयू) में शुक्रवार देर रात भीषण आग लगने से 10 नवजात की मौत हो गई। जिस वार्ड में आग लगी थी, वहां 55 नवजात भर्ती थे। हादसे की सूचना मिलते ही करीब 15 दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई। सेना को भी बुला लिया। रास्ता नहीं मिलने पर नवजातों को खिड़की के कांच तोड़कर बाहर निकाला गया।

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Jhansi Medical College Fire child was born with great prayer After many years of marriage
Jhansi Medical College - फोटो : अमर उजाला
झांसी में आग लगने के बाद मेडिकल कॉलेज की एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट) से तेजी से धुएं के गुबार निकले तो बाहर खुले में बैठे माता-पिता दौड़ते हुए अंदर गए और अंदाजे से अपने लाडले को लेकर बाहर आए। जिन माता-पिता को अपना लाडला नहीं मिला, वह बिलखते हुए तेजी से बाहर निकले। लोगों से हाथ जोड़कर लाडले को बाहर निकलवाने में हाथ जोड़कर मदद की गुहार करने लगे। महोबा के एक दंपती को जब अपना नवजात नहीं मिला तो वह वहीं अचेत होकर गिर पड़े। लोगों ने उनके मुंह पर पानी डाला तब करीब पांच मिनट के बाद होश आया।
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Jhansi Medical College Fire child was born with great prayer After many years of marriage
Jhansi Medical College Fire - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद दंपती ने बताया कि शादी के कई साल के बाद बड़ी मन्नत से संतान हुई थी। जब उसकी तबीयत बिगड़ी तभी से भगवान से जीवन की दुआ कर रहे थे। कोई एक बार मेरे लाल का चेहरा तो दिखा दो। उन्होंने रोते हुए बताया हमारा बच्चा नहीं मिल रहा है। कोई भी उसका पता लगाने में मदद नहीं कर रहा है। ऐसे में लगता है कि अब जीने का कोई मतलब नहीं है। 

वहीं, एक मां बेटा नहीं मिलने की वजह से बिलख बिलखकर रोने लगी। वह रोते हुए बोली, नौ माह पेट में रखा और तुझे पाने के लिए ऑपरेशन का कष्ट भी झेला। तू मुझे ऐसे छोड़कर नहीं जा सकता। बिलखती माताओं को देखकर माहौल दर्दमय रहा। 
 
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Jhansi Medical College Fire child was born with great prayer After many years of marriage
Jhansi Medical College Fire - फोटो : अमर उजाला
एसएनसीयू वार्ड के अंदरूनी हिस्से में ज्यादा गंभीर और बाहर कम गंभीर बच्चों को भर्ती किया जाता है। बाहर की तरफ भर्ती लगभग सभी बच्चों को बचा लिया गया है। अंदर के बच्चों में से भी काफी बच गए हैं। दस बच्चों की मौत की सूचना प्राप्त हुई है। राहत और बचाव कार्य जारी है। -अविनाश कुमार, जिलाधिकारी
Jhansi Medical College Fire child was born with great prayer After many years of marriage
Jhansi Medical College Fire - फोटो : अमर उजाला
पीड़ित बच्चों को बचाना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा केंद्र में जन्म से ही गंभीर बीमारी से ग्रस्त बच्चों को भर्ती किया जाता है। यहां भर्ती कई बच्चे वेंटिलेटर पर थे, जबकि ज्यादातर को ग्लूकोस की बोतल लगी हुईं थीं। आग लगने के बाद मची अफरा-तफरी में बच्चों को बचाने के लिए उनकी ऑक्सीजन व ग्लूकोस की बोतलें हटा दी गईं और उन्हें इमरजेंसी लाया गया। ऐसे में तमाम बच्चों की हालत बिगड़ गई। ऐसे बच्चों को बचाना अब स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। 
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Jhansi Medical College Fire - फोटो : अमर उजाला
वरिष्ठ ही नहीं, सभी जूनियर डॉक्टर भी बुलाए
एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट) में आग लगने की सूचना मिलते ही मेडिकल कॉलेज के न सिर्फ सीनियर डॉक्टर्स बल्कि सभी जूनियर डॉक्टर्स को ड्यूटी पर बुला लिया गया है। बाल रोग विभाग के सभी डॉक्टरों की ड्यूटी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लगा दी गई है ताकि किसी भी बच्चे के उपचार में कोई दिक्कत नहीं हो।
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