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धनतेरस स्पेशलः आज विशेष योग में करें धनवंतरि की पूजा, इन 5 बातों का ध्यान जरूर रखें
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 17 Oct 2017 12:01 PM IST
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धनतेरस विशेष
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आज धनतेरस है। ऐसी मान्यता है भगवान धनवंतरि जब समुद्र मंथन से उत्पन्न थे तब उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। इस दिन खरीदारी करने से धन में 13 गुना की बढ़ोत्तरी होती है। लेकिन धनतेरस पर कुछ चीजों को खरीदने से बचना चाहिए।
धनतेरस विशेष
धनतेरस हर व्यक्ति कुछ न कुछ नई चीज जरूर खरीदता है। माना जाता है कि धनतेरस पर नई चीज खरीदने से पूरे वर्ष घर धन धान्य से भरा रहता है। कई लोग इस दिन बड़ी खरीदारी खरीदते हैं तो कुछ लोग एक चम्मच लेकर भी इस परंपरा को पूरा करते हैं, लेकिन इस दिन कुछ न कुछ खरीदने के चक्कर में भूलकर ऐसी चीज न खरीद लें, जो अशुभ होता है। ऐसी 4 चीजें हैं, जिस धनतेरस पर नहीं खरीदना चाहिए।
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बनें धनवान
इस बार धनतेरस ऐन्द्र योग में है। अति शुभ योग में पर्व पर खरीदारी शाम 6:01 बजे गणेश लक्ष्मी मूर्ति खरीदने पर सुख-समृद्धि आएगी। इसदिन यदि आप विधि से पूजा-अर्चना करते हैं तो मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। धनतेरस की पूजा सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त रात 11:54 से 1:29 बजे तक है। जबकि शाम को दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त रात 7:10 से 8:44 बजे तक है।
इस बार धनतेरस ऐन्द्र योग में है। अति शुभ योग में पर्व पर खरीदारी शाम 6:01 बजे गणेश लक्ष्मी मूर्ति खरीदने पर सुख-समृद्धि आएगी। इसदिन यदि आप विधि से पूजा-अर्चना करते हैं तो मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। धनतेरस की पूजा सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त रात 11:54 से 1:29 बजे तक है। जबकि शाम को दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त रात 7:10 से 8:44 बजे तक है।
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धनतेरस विशेष
धनतेरस की पूजा
धनतेरस पूजा का सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त रात 11:54 से रात 1:29 बजे तक है। पंडित डॉ. आदित्य पांडेय ने बताया कि नया बर्तन, सोने या चांदी का सिक्का एक पाटे पर रख लें। इसके बाद चंदन, केसर, धूप, हल्दी, दूर्वा, शमीपत्र, घी और गुड़ या मिष्ठान से सोने या चांदी के सिक्के का और बर्तन का पूजन करें। यहां पर बर्तन का पूजन इसलिए विशेष है क्योंकि समुद्र मंथन में कलश के साथ माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।
धनतेरस पूजा का सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त रात 11:54 से रात 1:29 बजे तक है। पंडित डॉ. आदित्य पांडेय ने बताया कि नया बर्तन, सोने या चांदी का सिक्का एक पाटे पर रख लें। इसके बाद चंदन, केसर, धूप, हल्दी, दूर्वा, शमीपत्र, घी और गुड़ या मिष्ठान से सोने या चांदी के सिक्के का और बर्तन का पूजन करें। यहां पर बर्तन का पूजन इसलिए विशेष है क्योंकि समुद्र मंथन में कलश के साथ माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।
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धनतेरस विशेष
धनतेरस के दिन बर्तन का पूजन करने से सुख शांति, अन्न, धन की वृद्धि होती है। वहीं सोने या चांदी के सिक्के में प्रत्यक्ष लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसलिए सोने-चांदी के सिक्कों को पंचामृत में स्नान कराकर उसमें केसर, हल्दी, कुमकुम, रोली, सिंदूर लगाते हैं। इसके बाद लइया, गट्टा, खिलौना व अन्न का भोग लगाएं और सात दीपक घी के जलाएं।