धनतेरस मंगलवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन आदि वैद्य भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना के साथ खरीदारी का विशेष महत्व है। किसी भी चीज की खरीद निर्धारित मुहूर्त में की जाए तो श्रेष्ठ होगा। साथ ही इन विशेष बातों का ध्यान रखने से सफल हो सकती है आपकी पूजा...
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Dhanteras Puja Vidhil - ऐसे करें पूजा, गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति लेते समय रखें ये ध्यान
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 17 Oct 2017 11:46 AM IST
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ऐसे करें धनतेरस की पूजा
पंडित डॉ. आदित्य पांडेय ने बताया कि धनतेरस पूजा का सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त रात 11:54 से रात 1:29 बजे तक है। नया बर्तन, सोने या चांदी का सिक्का एक पाटे पर रख लें। इसके बाद चंदन, केसर, धूप, हल्दी, दूर्वा, शमीपत्र, घी और गुड़ या मिष्ठान से सोने या चांदी के सिक्के का और बर्तन का पूजन करें। यहां पर बर्तन का पूजन इसलिए विशेष है क्योंकि समुद्र मंथन में कलश के साथ माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।
धनतेरस के दिन बर्तन का पूजन करने से सुख शांति, अन्न, धन की वृद्धि होती है। वहीं सोने या चांदी के सिक्के में प्रत्यक्ष लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसलिए सोने-चांदी के सिक्कों को पंचामृत में स्नान कराकर उसमें केसर, हल्दी, कुमकुम, रोली, सिंदूर लगाते हैं। इसके बाद लइया, गट्टा, खिलौना व अन्न का भोग लगाएं और सात दीपक घी के जलाएं। इस तरह से पूजन करने से धन लक्ष्मी और सर्व सौभाग्य की प्राप्ति होगी। अगर संभव हो तो 21 हरे मोती शंख, 21 पीली कौड़ी और 21 काली कौड़ी को पीले वस्त्र में बांधकर मां लक्ष्मी का मंत्र का जाप करें। इसके बाद इन्हें तिजोरी या जहां पर धन रखते हों वहां रख दें।
पंडित डॉ. आदित्य पांडेय ने बताया कि धनतेरस पूजा का सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त रात 11:54 से रात 1:29 बजे तक है। नया बर्तन, सोने या चांदी का सिक्का एक पाटे पर रख लें। इसके बाद चंदन, केसर, धूप, हल्दी, दूर्वा, शमीपत्र, घी और गुड़ या मिष्ठान से सोने या चांदी के सिक्के का और बर्तन का पूजन करें। यहां पर बर्तन का पूजन इसलिए विशेष है क्योंकि समुद्र मंथन में कलश के साथ माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।
धनतेरस के दिन बर्तन का पूजन करने से सुख शांति, अन्न, धन की वृद्धि होती है। वहीं सोने या चांदी के सिक्के में प्रत्यक्ष लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसलिए सोने-चांदी के सिक्कों को पंचामृत में स्नान कराकर उसमें केसर, हल्दी, कुमकुम, रोली, सिंदूर लगाते हैं। इसके बाद लइया, गट्टा, खिलौना व अन्न का भोग लगाएं और सात दीपक घी के जलाएं। इस तरह से पूजन करने से धन लक्ष्मी और सर्व सौभाग्य की प्राप्ति होगी। अगर संभव हो तो 21 हरे मोती शंख, 21 पीली कौड़ी और 21 काली कौड़ी को पीले वस्त्र में बांधकर मां लक्ष्मी का मंत्र का जाप करें। इसके बाद इन्हें तिजोरी या जहां पर धन रखते हों वहां रख दें।
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ऐसे करें धनवंतरि की पूजा
आचार्य गौरव शुक्ला ने बताया कि धनवंतरि का पूजन करने के लिए धनतेरस की पूजा वाले स्थान के दाएं ओर एक नया पाटा रखकर बीच में सतिया बनाएं। इसमें दाईं ओर ओम और बाईं ओर लक्ष्मी (श्री) बना लें। तीनों पर एक-एक सुपारी कलावा बांधकर रखें। बीच में धनवंतरि का पूजन करें। ओम वाले स्थान पर कुबेर का पूजन होगा और श्री वाले स्थान पर लक्ष्मी जी का।
सबसे पहले धनवंतरि पर जल देकर हल्दी कुमकुम का टीका लगाएं। ओम धनवंतरायनमो नम: मंत्र 16 बार पढ़ें। रोली, चावल, पान, लौंग, इलायची, हर, बहड़ा, आंवला, हल्दी व केसर चढ़ा दें। फल में सिंघाड़ा, कैथा, गन्ने के टुकड़े चढ़ाएं। इसके बाद ध्यान करें कि हमारे परविार में रोग व्याधि न आएं।
आचार्य गौरव शुक्ला ने बताया कि धनवंतरि का पूजन करने के लिए धनतेरस की पूजा वाले स्थान के दाएं ओर एक नया पाटा रखकर बीच में सतिया बनाएं। इसमें दाईं ओर ओम और बाईं ओर लक्ष्मी (श्री) बना लें। तीनों पर एक-एक सुपारी कलावा बांधकर रखें। बीच में धनवंतरि का पूजन करें। ओम वाले स्थान पर कुबेर का पूजन होगा और श्री वाले स्थान पर लक्ष्मी जी का।
सबसे पहले धनवंतरि पर जल देकर हल्दी कुमकुम का टीका लगाएं। ओम धनवंतरायनमो नम: मंत्र 16 बार पढ़ें। रोली, चावल, पान, लौंग, इलायची, हर, बहड़ा, आंवला, हल्दी व केसर चढ़ा दें। फल में सिंघाड़ा, कैथा, गन्ने के टुकड़े चढ़ाएं। इसके बाद ध्यान करें कि हमारे परविार में रोग व्याधि न आएं।
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गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति लेते समय ध्यान दें
आचार्य सत्येंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति लेते समय विशेष ध्यान देना चाहिए। गणेश जी की सूंड़ दायीं ओर मुड़ी होनी चाहिए और एक दंत दिखना चाहिए। सवारी मूषक हो या सिंहासन पर विराजमान हों।
वहीं लक्ष्मी कमल पुष्प पर विराजमान हों, क्योंकि कमल लक्ष्मी जी का प्रधान आसन है। उल्लू को लेकर भ्रांति है क्योंकि उल्लू रात्रिचर पक्षी है। उल्लू के साथ में लक्ष्मी और अलक्ष्मी दोनों का वास हो जाता है। इसलिए गृहस्थ जीवन में कमल पर विराजमान लक्ष्मी जी की मूर्ति ही श्रेष्ठ है।
आचार्य सत्येंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति लेते समय विशेष ध्यान देना चाहिए। गणेश जी की सूंड़ दायीं ओर मुड़ी होनी चाहिए और एक दंत दिखना चाहिए। सवारी मूषक हो या सिंहासन पर विराजमान हों।
वहीं लक्ष्मी कमल पुष्प पर विराजमान हों, क्योंकि कमल लक्ष्मी जी का प्रधान आसन है। उल्लू को लेकर भ्रांति है क्योंकि उल्लू रात्रिचर पक्षी है। उल्लू के साथ में लक्ष्मी और अलक्ष्मी दोनों का वास हो जाता है। इसलिए गृहस्थ जीवन में कमल पर विराजमान लक्ष्मी जी की मूर्ति ही श्रेष्ठ है।
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धनतेरस पर पूजा कर बनें धनवान
इस बार धनतेरस ऐन्द्र योग में है। अति शुभ योग में पर्व पर खरीदारी शाम 6:01 बजे गणेश लक्ष्मी मूर्ति खरीदने पर सुख-समृद्धि आएगी। इसदिन यदि आप विधि से पूजा-अर्चना करते हैं तो मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। धनतेरस की पूजा सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त रात 11:54 से 1:29 बजे तक है। जबकि शाम को दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त रात 7:10 से 8:44 बजे तक है।
इस बार धनतेरस ऐन्द्र योग में है। अति शुभ योग में पर्व पर खरीदारी शाम 6:01 बजे गणेश लक्ष्मी मूर्ति खरीदने पर सुख-समृद्धि आएगी। इसदिन यदि आप विधि से पूजा-अर्चना करते हैं तो मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। धनतेरस की पूजा सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त रात 11:54 से 1:29 बजे तक है। जबकि शाम को दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त रात 7:10 से 8:44 बजे तक है।