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Dhanteras 2017- सुबह से शाम तक शुभ मुहूर्त, ऐसा क्या करें जिससे खरीदारी हो अति शुभफलदायी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 16 Oct 2017 07:56 PM IST
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धनतेरस मंगलवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन आदि वैद्य भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना के साथ खरीदारी का विशेष महत्व है। कोई नई बाइक, कार, प्रॉपर्टीं, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, कपडे़ आदि की खरीदारी करेगा तो कोई सोने-चांदी के आभूषणों में निवेश करेगा। इन सबकी खरीदारी के वैसे तो सुबह से शाम तक आठ उत्तम मुहूर्त हैं लेकिन किसी भी चीज की खरीद निर्धारित मुहूर्त में की जाए तो श्रेष्ठ होगा।
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वैदिक आचार्य पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि धनतेरस पर मंगलवार को खरीददारी के तमाम मुहूर्त के अलावा भगवान धनतेरस की पूजा-अर्चना के श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह से ही मिलने शुरू हो जाएंगे। घरों और प्रतिष्ठानों में शाम 7 बजकर तीन मिनट से वृष लग्न में भगवान धनतेरस की पूजा का उत्तम मुहूर्त है, जो रात 9 बजे तक रहेगा।
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उन्होंने बताया कि 16 अक्तूबर सोमवार देर रात 12:17 बजे से त्रयोदशी लग जाएगी, जो 17 अक्तूबर की रात 11:55 बजे तक रहेगी। धन त्रयोदशी पर गोधूलि बेला भी पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त हैं। उन्होंने बताया कि इस बार ऋण मोचन योग होने के चलते लंबे समय से कर्ज न चुका पाने वाले लोग ऋण चुका सकते हैं। वैदिक आचार्य पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि धनतेरस पर स्थिर और अस्थिर लगन में खरीददारी के विशेष योग हैं।
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क्यों मनाया जाता है धनतेरस
शास्त्रों के मुताबिक धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था। इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान वो अपने साथ अमृत का कलश और आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण से भगवान धन्वंतरि को औषधि का जनक भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि धनतेरस के दिन सोने-चांदी के बर्तन खरीदना भी शुभ होता है।
शास्त्रों के मुताबिक धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था। इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान वो अपने साथ अमृत का कलश और आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण से भगवान धन्वंतरि को औषधि का जनक भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि धनतेरस के दिन सोने-चांदी के बर्तन खरीदना भी शुभ होता है।
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पूजा करने की विधि
धनतरेस पर धन्वंतरि और लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने के लिए सबसे पहले एक लकड़ी का पाटों और उस पर स्वास्तिक का निशान बनाएं। उसके बाद पाटे पर तेल का दिया जलाकर रख दें और आस-पास गंगाजल की छीटें लगाएं। दीपक पर रोली और चावल का तिलक लगाएं। दीपक में थोड़ा सा मीठा डालकर भोग लगाएं फि र देवी लक्ष्मी और गणेश भगवान को कुछ पैसे चढ़ाएं। दीपक का आशीर्वाद लेकर दिए को मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में रखें।
धनतरेस पर धन्वंतरि और लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने के लिए सबसे पहले एक लकड़ी का पाटों और उस पर स्वास्तिक का निशान बनाएं। उसके बाद पाटे पर तेल का दिया जलाकर रख दें और आस-पास गंगाजल की छीटें लगाएं। दीपक पर रोली और चावल का तिलक लगाएं। दीपक में थोड़ा सा मीठा डालकर भोग लगाएं फि र देवी लक्ष्मी और गणेश भगवान को कुछ पैसे चढ़ाएं। दीपक का आशीर्वाद लेकर दिए को मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में रखें।