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डिजिटल अरेस्ट: आईपीएस बोल रहा हूं... मनी लाॅड्रिंग में आपका नाम आया है, सीनियर सिटीजन से 1.83 करोड़ रुपये ठगे
Tue, 18 Aug 2026 10:44 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Tue, 18 Aug 2026 10:44 PM IST
सार
साइबर ठग ने सीनियर सिटीजन को डिजिटल अरेस्ट कर 1.83 करोड़ रुपये ठगे। पीडब्ल्यूडी से सेवानिवृत्त कर्मी की तहरीर पर साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
साइबर ठगों ने पीडब्ल्यूडी से सेवानिवृत्त कर्मी को 12 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर 1.83 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की है। साइबर ठग ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर कर्मी का नाम मनी लाॅड्रिंग के मामले में शामिल होने का डर दिखाकर ठगी की। बाद में ठग का मोबाइल बंद हो गया तब जाकर कर्मी को ठगी की जानकारी हो सकी। वह पहले कल्याणपुर थाने गए, जहां से उन्हें साइबर थाने भेजा गया। साइबर थाने के इंस्पेक्टर अभय सिंह का कहना है कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है।
कल्याणपुर सत्यम विहार निवासी पीडब्ल्यूडी से सेवानिवृत्त सुभाष चंद्र ने साइबर थाना पुलिस को बताया कि बीती 13 जुलाई को उनके पास किसी ने फोन कर कहा उनके नाम से न सिर्फ क्रेडिंट कार्ड लिया गया है बल्कि उससे एक लाख रुपये की खरीदारी भी की गई है। इस पर उन्होंने किसी भी तरह का कार्ड न लिए जाने की बात कहते हुए फोन काट दिया। इसके अगले दिन यानि 14 जुलाई को फिर से किसी ने फोन कर कहा कि वह मुंबई से आईपीएस सुनील गौतम बोल रहा है और आपका यानि सुभाष का नाम किसी संदीप नाम के व्यक्ति के साथ मनी लॉड्रिंग केस में आया है। आपके पैसों की जांच होगी। आपको आजीवन कारावास या फिर फांसी की सजा भी हो सकती है।
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कल्याणपुर सत्यम विहार निवासी पीडब्ल्यूडी से सेवानिवृत्त सुभाष चंद्र ने साइबर थाना पुलिस को बताया कि बीती 13 जुलाई को उनके पास किसी ने फोन कर कहा उनके नाम से न सिर्फ क्रेडिंट कार्ड लिया गया है बल्कि उससे एक लाख रुपये की खरीदारी भी की गई है। इस पर उन्होंने किसी भी तरह का कार्ड न लिए जाने की बात कहते हुए फोन काट दिया। इसके अगले दिन यानि 14 जुलाई को फिर से किसी ने फोन कर कहा कि वह मुंबई से आईपीएस सुनील गौतम बोल रहा है और आपका यानि सुभाष का नाम किसी संदीप नाम के व्यक्ति के साथ मनी लॉड्रिंग केस में आया है। आपके पैसों की जांच होगी। आपको आजीवन कारावास या फिर फांसी की सजा भी हो सकती है।
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इससे बचने के लिए अभी आपको अलग-अलग खातों में कुछ रकम जमा करनी होगी और जांच होने के बाद सारे पैसे वापस भी कर दिए जाएंगे। इसके बाद 14 जुलाई से लेकर 12 दिनों तक फर्जी आईपीएस उसे लगातार फोन करता रहा और अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से उनसे रकम डलवाता रहा। फिर 12 वें दिन अचानक फर्जी आईपीएस का फोन बंद हो गया। तब तक वह 1.83 करोड़ रुपये उसके बताए गए खातों में आरटीजीएस कर चुके थे। सुभाष चंद्र के मुताबिक उनकी जीवन भर की जमा पूंजी थी, जिसे साइबर ठग ले गया है।
मना करते रहे बैंक कर्मी पर नहीं मानें
साइबर पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान जब बैंक कर्मियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि जब सुभाष चंद्र आरटीजीएस करने आते थे तो उनकी ओर से उन्हें टोका और पूछा जाता था कि आखिर इतनी बड़ी-बड़ी रकम वह क्यो और किसे दे रहे हैं लेकिन उन्होंने बैंक कर्मियों की कभी भी एक न सुनी और अपना एकाउंट लगभग खाली कर लिया।
साइबर पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान जब बैंक कर्मियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि जब सुभाष चंद्र आरटीजीएस करने आते थे तो उनकी ओर से उन्हें टोका और पूछा जाता था कि आखिर इतनी बड़ी-बड़ी रकम वह क्यो और किसे दे रहे हैं लेकिन उन्होंने बैंक कर्मियों की कभी भी एक न सुनी और अपना एकाउंट लगभग खाली कर लिया।
फोन असम से और रुपये मंगाए दक्षिण भारत की बैंकों में
साइबर पुलिस ने बताया कि 13 और 14 जुलाई को अलग-अलग लोगों ने सुभाष चंद्र को फोन किया। इसके बाद भी जितने फोन उनके पास आए सभी के नंबर असम के रहे। इसके अलावा जिन बैंकों में आरटीजीएस कराया गया उनकी सभी शाखाएं दक्षिण भारत में हैं। लिहाजा दोनों ही राज्यों में संपर्क कर मामले की जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।
साइबर पुलिस ने बताया कि 13 और 14 जुलाई को अलग-अलग लोगों ने सुभाष चंद्र को फोन किया। इसके बाद भी जितने फोन उनके पास आए सभी के नंबर असम के रहे। इसके अलावा जिन बैंकों में आरटीजीएस कराया गया उनकी सभी शाखाएं दक्षिण भारत में हैं। लिहाजा दोनों ही राज्यों में संपर्क कर मामले की जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।