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ढाई साल की सुहानी की गला रेत कर हत्या, पिता का दर्द सुनकर किसी के आंसू न रुके, पुलिस की घोर लापरवाही

Sat, 10 Feb 2018 08:55 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 10 Feb 2018 08:55 AM IST
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Murder of innocent child in kanpur
सुहानी की फाइल फोटो, रोती बिलखती मां - फोटो : अमर उजाला
यूपी के कानपुर में ढाई साल की बच्ची की गला रेत कर हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठ रहे हैं। हत्या के इस मामले में रेप की आशंका भी जताई जा रही है। 


गला रेतकर मारी गई ढाई साल की बच्ची सुहानी के परिजनों ने बर्रा थाना पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पिता बाबूलाल ने बताया कि पुलिस ने बेटी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर ली थी, लेकिन उसे खोजने में रुचि नहीं दिखाई। पुलिस ने सार्वजनिक स्थलों पर न तो पोस्टर चस्पा कराए और न ही पंफ्लेट बंटवाए। पुलिस ने शक के आधार पर किसी से पूछताछ करना भी मुनासिब नहीं समझा। बाबूलाल के मुताबिक उनके गरीब होने की वजह से पुलिस ने मामले को हल्के में लिया। अगर किसी बड़े परिवार की बच्ची होती तो पुलिस बच्ची को तलाश करने में पूरी ताकत झोंक देती। गरीब की बच्ची थी सो मरने दिया। अगर पुलिस उसी दिन खोजबीन में जुट जाती तो शायद बच्ची बच जाती।
 

हत्या कहां हुई, साफ नहीं 

Murder of innocent child in kanpur
रोती बिलखती मां - फोटो : अमर उजाला
सुहानी की हत्या कहां की गई, यह अभी साफ नहीं हुआ है। अफसरों का मानना है कि हत्यारे ने सुहानी की हत्या के बाद शव को गहरी सीवर लाइन में डाल दिया होगा। सीवर लाइन के पाइप से शव सीवरेज प्लांट के चैंबर (जहां गंदा पानी इकट्ठा होता है) तक पहुंच गया। हत्यारोपी के पकड़े जाने के बाद ही साफ हो सकेगा कि सुहानी की हत्या कहां हुई थी।

 

हत्या की धारा बढ़ाई गई    

Murder of innocent child in kanpur
सुहानी की फाइल फोटो, रोती बिलखती मां - फोटो : अमर उजाला
बर्रा पुलिस ने सुहानी का शव मिलने के बाद उसके अपहरण की एफआईआर में हत्या की धारा बढ़ा दी है। थानाध्यक्ष भाष्कर मिश्रा ने कहा है कि अपहरण और हत्या में किसी जानकार और आसपास के व्यक्ति का हाथ है। मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही वारदात का खुलासा किया जाएगा।

 
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पैसा बचाने को पुलिस ने नहीं छपवाए पोस्टर

Murder of innocent child in kanpur
सुहानी की फाइल फोटो, रोती बिलखती मां - फोटो : अमर उजाला
सुहानी अपहरण और हत्याकांड में बर्रा पुलिस की घोर लापरवाही उजागर हुई है। पुलिस ने सार्वजनिक स्थानों पर सुहानी के पोस्टर चस्पा कराने से लेकर राष्ट्रीय क्राइम रिकार्ड ब्यूरो तक उसके लापता होने की सूचना भेजने की कार्यवाही की लेकिन सिर्फ कागजों पर। सुहानी की तलाश के लिए पुलिस की एक टीम भी बनाने की बात कही लेकिन टीम ने क्या किया, कुछ पता नहीं।


किसी भी नाबालिग लड़के या लड़की के लापता होने पर संबंधित पुलिस अपहरण (आईपीसी की धारा 363) में रिपोर्ट दर्ज करती है। इसके बाद तय प्रोफार्मा में लापता का फोटोग्राफ्स लगाकर और हुलिया भरकर इसकी सूचना जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय क्राइम रिकार्ड ब्यूरो को भेजती है। स्मार्ट पुलिसिंग के तहत कुछ अफसर लापता का पूरा डिटेल फेसबुक और व्हाटसअप पर डाल देते हैं, ताकि देश में कहीं भी लापता बच्चे के हुलिए का कोई बच्चा जीवित या मृत अवस्था में मिले तो उसकी शिनाख्त हो सके। साथ ही बच्चे की तलाश के लिए थाना और जिला स्तर पर पुलिस टीम गठित की जाती है। सर्विलांस और क्राइम ब्रांच टीम को लगाया जाता है, लेकिन सुहानी अपहरण के मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। 

 
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पैसा फंसता इसलिए बचती पुलिस

Murder of innocent child in kanpur
सुहानी की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
पोस्टर, पंफ्लेट छपवाने, समाचार पत्रों और समाचार चैनलों में विज्ञापन प्रकाशित कराने के लिए पुलिस को अपने पास से पैसा खर्च करना पड़ता है। विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद पुलिस उसका बिल थाने से एसएसपी दफ्तर भेजती है। शासन से बजट आने पर संबंधित थानेदार को बिल का भुगतान होता है। भुगतान मिलने में कम से कम एक साल लगता है। तब तक थानेदार का किसी दूसरे थाने या जनपद में ट्रांसफर हो जाता है। इसलिए थानेदार गुमशुदा या लापता बच्चे का विज्ञापन प्रकाशित कराने से बचते हैं। 
  
इकलौती बेटी थी 
सुहानी अपने घर की अकेली बेटी थी। परिवार में पिता बाबूलाल, मां सरोज और दो भाई प्रमोद और चिंटू हैं। सुहानी की हत्या से मां सरोज का रो-रो कर बुरा हाल है। 
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