जानिए क्या है रेलवे का 'जितना नशा, उतनी सजा' का फार्मूला
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शराब की पुष्टि होने पर सेवा समाप्त कर देने के नियमों में बदलाव के लिए नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे मैंस (एनएफआईआरएम) लंबे समय से मांग कर रहा था। उनका तर्क था कि कई दवाएं ऐसी होती हैं, जिनमें अल्कोहल की मात्रा शामिल रहती है। ऐसे में एनालाइजर उपकरण से जांच किए जाने पर नशे की पुष्टि होती है। नौकरी जाने का खतरा रहता है। दूसरी तरफ लोको पायलट की संख्या कम होने से उन्हें आठ घंटे भी आराम नहीं मिलता है। चालकों, सहायक चालकों और गार्डों की कमी के मद्देनजर रेलवे बोर्ड ने फेडरेशन की इस मांग को मान लिया है। नियमों में बदलाव कर दिए हैं। नए नियम के मुताबिक अब नशे की मात्रा के मुताबिक दंड दिया जाएगा।
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रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर (सुरक्षा) ने मंडल रेल प्रबंधकों को जारी किए गए पत्र में कहा है कि चालक व गार्ड लॉबी में आरडीएसओ से प्रमाणित ब्रीद एनालाइजर मशीन लगाई जाए। इससे नशे की जांच की जाए। शराब की पुष्टि होने पर खून की जांच कराई जाए। 100 एमएल खून में 40 मिली ग्राम तक शराब की पुष्टि होने पर लोको पायलट की सेवा समाप्त नहीं की जाएगी। उन्हें हल्का दंड या चेतावनी दी जाएगी।
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