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अब नहीं बचेंगी 'मुखौटा वाली कंपनियां', सरकार ऐसे पकड़ेगी काले धन को सफेद करने का खेल
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 05 Sep 2018 08:30 AM IST
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काले धन को सफेद करने वाली मुखौटा कंपनियों पर और शिकंजा कसने की तैयारी सरकार ने शुरू कर दी है। इन कंपनियों को पूरी तरह से खत्म करने के लिए कड़े कानून बनाए जा रहे हैं। इसके तहत यदि किसी कंपनी का कार्यालय कंपनी रजिस्ट्रार को दिए गए पते पर नहीं है तो उसे मुखौटा कंपनी की श्रेणी में लाया जा सकता है। काले धन को सफेद करने में इन कंपनियों की भूमिका के चलते सवा दो लाख कंपनियों पर सरकार शिकंजा कस चुकी है। इसमें से कानपुर शहर में भी कई हजार कंपनियां थी।
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कंपनी मामलों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सरकार एक नया प्रावधान लाने जा रही है। इसके लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। समिति ने हाल ही में एक सिफारिश की है। इसके तहत कंपनी रजिस्ट्रार कार्यालय में दर्ज पते पर यदि संबंधित कंपनी चलते हुए नहीं मिलती है तो उसे मुखौटा कंपनी माना जाए। बताया गया कि मौजूदा समय में किसी भी रजिस्टर्ड कंपनी के कार्यालय पर पत्राचार होने वाले सभी दस्तावेजों पर कंपनी का नाम, उसका टिन नंबर, पता, ई-मेल आईडी, वेबसाइट यदि है तो दर्ज होना चाहिए। जब कंपनी रजिस्ट्रार द्वारा कोई पत्राचार संबंधित कंपनी से होता है तो उस पते पर कंपनी के न मिलने पर पेनाल्टी आदि का प्रावधान था। अब इस पर सख्ती की जा रही है।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- दो लाख ऐसी कंपनियों के पंजीकरण रद्द किए जा चुके...
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बताया गया कि इस नई व्यवस्था से इन कंपनियों के बोर्ड निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। कंपनी सेक्रेटरी अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि मुखौटा कंपनियों पर सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है। पिछले वर्षों में करीब सवा दो लाख ऐसी कंपनियों के पंजीकरण रद्द किए जा चुके हैं। जहां से सालाना रिटर्न नही आए थे। अब ऐसी कंपनियों पर और सख्ती की जा रही है। ऐसी कई कंपनियां हैं जो अनुचित लाभ लेने के लिए एक या एक से अधिक पतों का इस्तेमाल करती हैं।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- मुखौटा कंपनियों के बारे में...
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मुखौटा कंपनियों को कोई भी अस्तित्व नहीं होता हैं। एक फर्जी पते पर यह कंपनी संचालित होती दिखाई जाती है। बड़े-बड़े लेन-देन दिखाकर इन कंपनियों के माध्यम से काले धन को सफेद किया जाता है।